पश्चिम बंगाल में भाप से टॉय ट्रेन कहां चलती है? शायद आपका सीधा जवाब होगा दार्जिलिंग में। पर हम अगर आपसे कहें कि टॉय ट्रेन की सवारी के लिए आपको हिल स्टेशन पर जाने की जरूरत नहीं है। क्या आप यकिन करेंगे कि हावड़ा में ही आप भाप इंजन से चलने वाली टॉय ट्रेन की सवारी कर सकते हैं। आमतौर पर कोलकाता के जिन पार्क में टॉय ट्रेन चलती हैं, वे सभी ट्रेन न होकर ट्रेन की शक्ल वाली मोटर गाड़ियां होती है।

लेकिन हम आपको बता रहे हैं भाप इंजन से चलने वाली दो कोच की टॉय ट्रेन का पता। क्रिसमस और न्यू इयर की छुट्टियों में परिवार और खासतौर पर बच्चों के साथ टॉय ट्रेन की सवारी करने का आइडिया बुरा नहीं होगा...क्यों सही कहा न।
कहां मिलेगी टॉय ट्रेन?
तो चलिए अब हम आपको टॉय ट्रेन का असली पता बता ही देते हैं। हावड़ा में अगर आपको टॉय ट्रेन की सवारी करनी है तो आपको जाना होगा हावड़ा रेल म्यूजियम में। हावड़ा रेल म्यूजियम का एकमात्रा आकर्षण सिर्फ टॉय ट्रेन ही नहीं है। बल्कि भारतीय रेलवे की ऐतिहासिकता को इसने बड़े ही प्यार से संभाल कर भी रखा है। बच्चों, परिवार या फिर दोस्तों के साथ मिलकर अगर आप चारों तरफ बगीचे से घिरे हरे घास के मैदान में पिकनिक मनाना चाहते हैं, तो आपको यहां उसका मौका भी मिल जाएगा।

यहां करीब 4.5 एकड़ के क्षेत्र में फैला एक विशाल बागिचा है, जिसे ढेर सारे पेड़-पौधों और फाउंटेन से बहुत ही सुन्दर तरीके से सजाया गया है। भारतीय रेलवे द्वारा हावड़ा में बनाए गये इस रेल म्यूजियम का नारा ही है, 'Learn While You Have Fun' यानी आनंद करने के दौरान ही सीखे।
क्या है हावड़ा रेल म्यूजियम का इतिहास
भारतीय रेलवे की ऐतिहासिक धरोहर का खजाना है हावड़ा का रेल म्यूजियम। हुगली नदी के किनारे बनाया गया यह रेल म्यूजियम अपने-आप में ही काफी खास है। इसका शिलान्यास 1 सितंबर 2005 और उद्घाटन 7 अप्रैल 2006 को किया गया था। हावड़ा रेल म्यूजियम में मुख्य रूप से पूर्वी भारत में इतने सालों में हुए रेलवे के विकास के बारे में जानकारियां उपलब्ध है।

रेल म्यूजियम में पूर्व रेलवे (Eastern Railway), हावड़ा स्टेशन और पूर्वी भारत में रेलवे का इतिहास को दर्शाया गया है। यहां इन सबसे साथ ही मौजूद है 2 बोगियों वाली टॉय ट्रेन जिसमें बच्चे अपने माता-पिता के साथ सवारी का लुत्फ उठा सकते हैं। इस म्यूजियम को अच्छी तरह से घूमने में 3 से 4 घंटे का समय लग सकता है।
क्या-क्या दिखेगा रेल म्यूजियम में

हावड़ा रेल म्यूजियम में भारतीय रेलवे का एक बड़ा सा हिस्सा बतौर धरोहर बड़े ही प्यार से सुरक्षित रखा गया है। यहां आपको ईस्ट इंडियन रेलवे, पूर्व रेलवे, पूर्व मध्य रेलवे, ईस्ट-कोस्ट रेलवे, दक्षिण पूर्व रेलवे, नॉर्थ फ्रंटियर रेलवे, चित्तरंजन लोकोमोटिव वर्कशॉप और कोलकाता के मेट्रो रेलवे से जुड़ी काफी पुरानी और दुर्लभ तस्वीरें भी देखने को मिलेंगी। इसके अलावा करीब 100 साल पुरानी रेलवे परियोजनाओं से जुड़ी ड्राईंग, दस्तावेज, भारतीय रेलवे पर आधारित डाक टिकट संग्रह, 150 साल पुरानी भाप इंजन, गाड़ियां, सैलून गाड़ियां और ट्रेन को देखने के लिए यहां लोगों की भीड़ इकट्ठा होती है।

हावड़ा रेल म्यूजियम में एक एंटिक भाप इंजन, भारत की पहली इलेक्ट्रिक इंजन और रेलवे से संबंधिक कई अन्य चीजों को भी सुरक्षित रखा गया है, जिन्हें आप इस म्यूजियम में जाने पर देख सकेंगे। लेकिन हावड़ा रेल म्यूजियम का मुख्य आकर्षण तो यहां रखा हावड़ा स्टेशन का छोटा सा मॉडल है।
कैसे पहुंचे हावड़ा रेल म्यूजियम
हावड़ा रेल म्यूजियम हावड़ा स्टेशन के बिल्कुल पास में मौजूद है। अगर आप कोलकाता से हावड़ा रेल म्यूजियम जाना चाहते हैं, तो महात्मा गांधी रोड क्रासिंग (बड़ा बाजार) से आपको हावड़ा स्टेशन के लिए ढेर सारी बस आसानी से मिल जाएंगी। हावड़ा ब्रिज को पार कर आपको हावड़ा स्टेशन की तरफ आगे बढ़ना होगा। पहले हावड़ा स्टेशन का ओल्ड कॉम्प्लेक्स और फिर हावड़ा न्यू कॉम्प्लेक्स को पार करने के बाद थोड़ा आगे बढ़ते ही आपको सामने ही हावड़ा रेल म्यूजियम दिख जाएगा।

अगर आप हावड़ा की तरफ से आ रहे हैं तो आपको हावड़ा ब्रिज पार कर बड़ा बाजार तक आने की जरूरत नहीं है। आपको हावड़ा स्टेशन के सामने ही उतर जाना पड़ेगा। इसके बाद 15 मिनट का रास्ता आप बड़ी ही आसानी से पैदल पार कर सकते हैं। हावड़ा और कोलकाता दोनों शहरों से ही आने वाले लोगों को हावड़ा रेल म्यूजियम के लिए कैब या टैक्सी आसानी से मिल जाएगी।
समय और एंट्री फीस

हावड़ा रेल म्यूजियम सुबह 10.30 बजे से शाम 7.30 बजे तक खुला रहता है। जानकारी के मुताबिक इसका प्रवेश शुल्क ₹10 है और टॉय ट्रेन की सवारी का शुल्क भी ₹10 प्रति व्यक्ति ही है। रेल म्यूजियम के आसपास आपको खाने-पीने के ढेर सारे रेस्तरां मिल जाएंगे। अगर आप अपने इस दिन को थोड़ा और खास बनाना चाहते हैं तो हावड़ा स्टेशन के पास ही मौजूद रेल कोच रेस्तरां में जा सकते हैं। अगर आपके साथ बच्चे भी हैं, तो यकिन मानिए वंदे भारत एक्सप्रेस के कोच में बनाए गए इस रेस्तरां में आप सभी को लंच या शाम को चाय के साथ हल्का-फुल्का स्नैक्स खाना बहुत अच्छा लगेगा।



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