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मुर्शिदाबाद का जगत सेठ म्यूजियम : कर्ज लेने वालों की लाइन में यहां खड़े मिलते थे मुगल और अंग्रेज

पश्चिम बंगाल का शहर मुर्शिदाबाद अपनी ऐतिहासिकता, संस्कृति और पर्यटन स्थलों की वजह से लोगों में काफी लोकप्रिय है। मुगलकाल में बंगाल की राजधानी और ब्रिटिशकाल में एक प्रमुख जिले के रूप में मुर्शिदाबाद ने अपनी पहचान को बरकरार रखा। आज भी इतिहासकारों के बीच यहां के हजारदुआरी यानी एक हजार दरवाजों वाले महल की चर्चाएं होती रहती हैं। लेकिन...

jagat seth house

मुर्शिदाबाद में एक और ऐसा ही शानदार महलनुमा घर है, जिसके दरवाजे पर किसी समय मुगल और अंग्रेज भी कर्ज लेने के लिए लाइन लगाकर खड़े होते थे। यह घर है जगत सेठ का, जो उस समय के जाने-माने साहूकार हुआ करते थे। उनके घर को अब म्यूजियम में परिवर्तित कर दिया गया है।

क्यों एक साहूकार का घर बना पर्यटन स्थल

आप सोच रहे होंगे कि पुराने जमाने में तो ऐसे हजारों-लाखों साहूकार हुआ करते थे, जो लोगों को ब्याज पर कर्ज देते थे। फिर जगत सेठ के घर में ऐसी क्या खास बात है कि यह इतना लोकप्रिय है और इसे म्यूजियम में परिवर्तित कर दिया। दरअसल, जगत सेठ कोई आम साहूकार नहीं थे। जगत सेठ का असली नाम फतेह चांद था। उन्हें जगत सेठ यानी दुनिया के सेठ की उपाधी, उनकी अकुत धन-संपत्ति और व्यापारिक सफलता के बाद मिली थी।

temple in the house of jagat seth

कहा जाता है कि 18वीं शताब्दी में जगत सेठ करीब 8.3 लाख करोड़ रुपए की संपत्ति के मालिक थे। आप अंदाजा लगा सकते हैं कि उस समय यह संपत्ति कितनी अधिक मानी जाती होगी। बताया जाता है कि जगत सेठ का काम सिर्फ कर्ज पर रुपए देना ही नहीं बल्कि बंगाल के नवाबों के अकाउंट और टकसालों की देखरेख करना भी था।

कैसे शुरू हुआ था जगत सेठ का यह व्यापार

underground wall

आज के समय जगत सेठ का नाम पश्चिम बंगाल में एक मुहावरे के तौर पर इस्तेमाल होने वाला नाम बन चुका है। जगत सेठ के परिवार का नाम बंगाल में उस समय लोकप्रिय हुआ जब 1700 में माणिक चांद पटना से ढाका आए। माणिक चांद, फतेह चांद उर्फ जगत सेठ के चाचा थे। ध्यान रहे, ढाका उस समय अविभाजित बंगाल का ही एक प्रमुख शहर हुआ करती थी। इसके बाद यह परिवार मुर्शिदाबाद आया और माणिक चांद ने अपना व्यापार शुरू किया।

jagat seth murshidabad

वर्ष 1714 में जब माणिक चांद की मृत्यु हो गयी तो व्यापार की गद्दी उसके भतीजे फतेह चांद ने संभाली, जो कालांतर में जगत सेठ के नाम से प्रसिद्ध हुआ। जगत सेठ की व्यापारिक सफलता को इस बात से ही समझा जा सकता है कि उनके घर के बाहर मुर्शिदाबाद के मुगलशासक और यहां आने वाले अंग्रेज व्यापारी भी कर्ज लेने के लिए लाइन में खड़े रहते थे।

क्या है इस म्यूजियम में खास

building

बंगाल के सबसे अधिक धनवान परिवार के घर को ही आज जगत सेठ म्यूजियम के रूप में एक नयी पहचान मिली हुई है। मुर्शिदाबाद घूमने आने वाले लोग इस म्यूजियम में जरूर आते हैं। इस म्यूजियम में रखी चीजें आपको अविभाजित बंगाल की ऐतिहासिकता और जगत सेठ से जुड़ी कई कहानियों के बारे में जानकारी देती हैं। मुर्शिदाबाद के इस म्यूजियम में हर उस वस्तु को बड़े ही करीने से रखा गया है जो किसी जमींदार बंगाली परिवार के इतिहास और उनकी संस्कृति के बारे में आपको समझा सकें।

यहां असली सोने और चांदी के तारों का काम किया हुआ बनारसी साड़ी, सोने-चांदी के सिक्के, मसलीन के परिधान और भी कई चीजें, जो उस समय एक धनी परिवार का हिस्सा हुआ करती थी, उन्हें दर्शकों के सामने रखा गया है।

अगर आप कभी मुर्शिदाबाद घूमने आने का प्लान बनाते हैं तो जगत सेठ म्यूजियम को अपनी लिस्ट में जरूर शामिल किजीएगा।

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