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'गढ़-पंचकोट' जहां 17 रानियों ने कुएं में कूदकर दी थी अपनी जान, बंगाल का है फेवरेट डेस्टिनेशन

गर्मी, धूप और रोज ऑफिस की भागदौड़...इन सबसे बोर होकर लोग अक्सर कुछ पल सुकून की तलाश में ऐसी जगहों पर जाना चाहते हैं जहां शांति हो, हरियाली हो। पश्चिम बंगाल का पुरुलिया जिला ऐसा ही एक Hidden Gem है, जो प्रकृति और इतिहास के साथ तालमेल बैठाकर लोगों को सालों से वह सुकून लौटाता आ रहा है।

पुरुलिया जिले का 'गढ़-पंचकोट' कोलकाता व आसपास के उपनगरीय इलाकों में रहने वाले लोगों का न सिर्फ फेवरेट पर्यटन स्थल है बल्कि यहां विदेशों से भी पर्यटक भारत का इतिहास और यहां की संस्कृति को समझने के लिए अक्सर आते रहते हैं। लेकिन 'गढ़-पंचकोट' ने अपने अंदर सिर्फ सुनहरे भारत का इतिहास ही नहीं बल्कि बंगाल का एक काला अध्याय भी समेट कर रखा है।

garh panchkot ruins

इतिहासकारों के मुताबिक पुरुलिया जिले के इस प्रसिद्ध गढ़ में एक नहीं बल्कि 17 रानियों और उनकी सेविकाओं ने एक साथ कुएं में कूदकर अपनी जान दे दी थी। पर उन्हें ऐसा क्यों करना पड़ गया था? क्या थी वह वजह कि शाही परिवार की 17 रानियों और उनकी सेविकाओं ने ऐश-ओ-आराम की जिंदगी के बदले मौत का रास्ता चुनना ज्यादा आसान समझा!

कहां है गढ़-पंचकोट?

गढ़-पंचकोट पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले में पंचेट लेक और पंचेट पहाड़ी की तराई में बसा हुआ है। इस जगह को देव राजवंश के दामोदर शेखर ने बसाया था। गढ़-पंचकोट का शाब्दिक अर्थ पांच तरफ दीवारों से घिरा हुआ गढ़ होता है।

कोलकाता से लगभग 270 किमी की दूरी पर मौजूद गढ़-पंचकोट न सिर्फ एक फेवरेट वीकेंड डेस्टिनेशन है बल्कि जिन लोगों को दुर्गापूजा के समय कोलकाता में होने वाली भीड़भाड़ रास नहीं आती, या गर्मी या दुर्गापूजा की छुट्टियों में प्रकृति और इतिहास के साथ समय बिताना पसंद करते हैं या फिर बिना ज्यादा सोच-विचार के सिर्फ रिलैक्स करना चाहते हैं, वैसे लोग भी यहां अक्सर आते रहते हैं।

garh panchkot purulia

क्या है गढ़-पंचकोट का इतिहास?

इतिहासकारों से मिली जानकारी के अनुसार 9वीं शताब्दी में दामोदर शेखर ने बंगाल में अपने पंचकोट साम्राज्य की स्थापना की। यह साम्राज्य जिन स्थानों पर फैला था वहां वर्तमान के पुरुलिया जिला मौजूद है। इसके कुछ सालों के बाद वर्ष 1740 में बंगाल की सत्ता नवाब अली-वर्दी खान के हाथों में गयी।

यह वह दौर था जब नवाब अली-वर्दी खान और ओडिशा के तत्कालिन डिप्टी गवर्नर रुस्तम जंग के बीच सत्ता की लड़ाई शुरू हुई। मार्च 1941 में रुस्तम जंग को अली-वर्दी खान से हुई लड़ाई में अपनी हार होती दिखाई दी तो वह नागपुर के मराठा राजा राघोजी भोंसले से मदद मांगने के लिए पहुंच गये।

क्यों 17 रानियों को करनी पड़ी आत्महत्या?

कहा जाता है कि राघोजी भोंसले ने रुस्तम जंग की मदद करने के लिए मराठा साम्राज्य में सबसे अधिक खुंखार और लुटपाट मचाने वाली जाति 'बरगी' को पंचेट में भेजा। बरगी ने पंचकोट पर न सिर्फ हमला बोल दिया बल्कि हर जगह तबाही मचा दी। लुटपाट किया और तोड़-फोड़ भी।

इसी हमले में पंचेट के तत्कालिन राजा की मृत्यु हो गयी और उनकी 17 रानियों ने अपने सम्मान की रक्षा करते हुए अपनी सेविकाओं समेत कुएं में कुदकर आत्महत्या कर ली। आज भी गढ़-पंचकोट के महलों की दीवारों पर बरगी जाति के आक्रमण के निशान स्पष्ट नजर आते हैं।

panchet kingdom purulia west bengal

गढ़-पंचकोट और आसपास घूमने लायक जगहें

पंचकोट किला - अगर आपको इतिहास में रुचि है तो गढ़-पंचकोट के किले में जरूर जाना चाहिए। आज यह एक जर्जर किला बन चुका है लेकिन 3 अलग-अलग वास्तुशिल्प शैलियों, पंचरत्न, जोर बंगला और पिरहा, का बना यह किला किसी जमाने में बेहद भव्य हुआ करता था।

पंचेट हिल - पहाड़ों और प्रकृति की जिस सुन्दरता की तलाश में पुरुलिया तक पहुंचे हैं, उसे कैसे मिस किया जा सकता है। यहां दूर-दूर तक बस हरियाली ही नजर आएगी। गढ़-पंचकोट उन जगहों में शामिल है, जहां घूमने जाने का किसी भी पर्यटक को कोई अफसोस नहीं होगा।

तेलकुपी - पंचेट डैम के पास का वह गांव जो इस डैम के कारण हमेशा के लिए पानी में डूब गया। यहां बांध के पास आपको कई घर दिखेंगे जो आज खंडहर में तब्दील हो चुके हैं।

बरंती - बरंती लेक के किनारे बसा एक आदिवासी गांव है बरंती। बंगाल के गांवों में कितनी सुन्दरता बसती और प्रकृति ने अपनी सर्वश्रेष्ठ कलाकारी से इन गांवों को संवारा है, इस बात का अंदाजा आपको पुरुलिया के इस छोटे से आदिवासी गांव में आकर हो जाएगा। यहां ठहरने के लिए होटल और टेंट दोनों तरह की सुविधाएं उपलब्ध हैं। यहां से आप माइथन बांध भी देखने जा सकते हैं।

garh panchkot tourist place purulia

कैसे पहुंचे पुरुलिया, गढ़-पंचकोट

सड़क मार्ग - कोलकाता से गढ़-पंचकोट लगभग 270 किमी की दूरी पर है। यहां तक आने के लिए आपको कोलकाता में किराए पर गाड़ी आसानी से मिल जाएगी। इसके अलावा इंटर-डिस्ट्रिक्ट कैब सेवाएं प्रदान करने वाली कंपनियों से कैब भी बुक किया जा सकता है।

ट्रेन - कोलकाता से गढ़-पंचकोट आने के लिए सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन कुमारडुबी है। स्टेशन के बाहर से आपको लोकल गाड़ियां मिल जाएंगी, जिन्हें बुक कर आप सीधे गढ़-पंचकोट पहुंच सकते हैं।

view of purulia west bengal

विशेष नोट - पुरुलिया बंगाल के सबसे गर्म जिलों में से एक है। इसलिए मई-जून की गर्मी में यहां जाने से पहले एक बार अच्छी तरह से सोच-विचार जरूर कर लें। हालांकि प्राकृतिक जगह और पेड़-पौधे होने की वजह से शाम के बाद मौसम थोड़ा सुहावना भी जरूर हो जाता है, जो शहरों में होने वाली रोजमर्रा की थकान को उतारने के लिए काफी होता है।

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