जंगल के राजा को कौन नहीं जानता, उसकी एक दहाड़ से कई किलोमीटर तक सनसनी फैल जाती है। हिरण, नील गाय, बाराह सिंघा जैसे जानवर हलकान हो जाते हैं। लेकिन जब इसी शेर की मौत होती है तब क्या होता है? जंगल के राजा के परिवार का क्या होता है? उससे बच कर भागने वाले जानवरों का क्या रिएक्शन होता है? गीदड़ क्या करते हैं और तो और इंसान क्या करते हैं, जब एक शेर की मौत होती है?
हम इन सभी सवालों के जवाब भारत के परिप्रेक्ष्य में देंगे और यह भी बतायेंगे कि बीते पाँच वर्षों में भारत में कितने शेरों की मौत हुई है। यही नहीं आप जान पायेंगे कि जंगल के अंदर कैसा माहौल होता है, जब एक शेर की मौत होती है।

सबसे पहले आपको ले चलते हैं जंगल सफारी की दुनिया में
ग्लोबल सफारी आर्काइव में प्रकाशित जंगल सफारी के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए अध्ययन के अनुसार जब किसी जंगल में शेर की मौत होती है, तो उसका परिवार टूट जाता है। परिवार के सभी सदस्य अकेला महसूस करते हैं। खास तौर से यह जब होता है जब नर शेर की मौत होती है। कारण कोई भी हो, उसका परिवार शोकाकुल हो जाता है।
वहीं मादा शेर की मृत्यु पर भी कमोबेश कुछ ऐसा ही होता है, लेकिन अधिकांश मामलों में नर शेर अपने परिवार को बांधने में सफल हो जाता है। यही नहीं बाकी के नर शेरों में परिवार का मुखिया बनने की जद्दोजहद भी होती है। ज्यादातर मामलों में छोटा बेटा (शेर का बेटा) ही राजा बनता है और झुंड को लीड करने लगता है। हालांकि बाकी मामलों में देखा गया है कि मादा शेर पूरे झुंड को बड़े गर्व के साथ लीड करती है।

शेर की मौत पर बाकी जानवरों का रिएक्शन कैसा होता है
अध्ययन के अनुसार जब एक शेर की मौत होती है, तब बाकी के शेर शोकाकुल होते हैं, लिहाज़ा शिकार केवल तभी करते हैं, जब वे बहुत भूखे होते हैं। वहीं गीदड़, भेड़िये, लकड़बग्घे उसे खाने की फिराक में रहते हैं। हालांकि बाकी जानवरों पर कोई खास फर्क नहीं पड़ता है। दरअसल उन्हें तो मालूम ही नहीं होता है कि उनके जंगल के राजा की मौत हो गई है।
भारतीय कानून के अनुसार क्या होता है शेर के अंतिम संस्कार से पहले?
भारत के सभी जंगलों व वन्यजीव अभयारण्यों में मौजूद शेरों का पूरा रिकॉर्ड वन विभाग के पास होता है। समय-समय पर यह रिकॉर्ड मंत्रालय को भी भेजा जाता है। ऐसे में जब भी किसी शेर, चीता, बाघ, गैंडा, दरियाई घोड़ा, या हाथी की मौत के बारे में वन्य अधिकारियों को पता चलता है, तो पूरी टीम मौके पर पहुंच जाती है। शेर की बात करें तो सबसे पहले उसके शव को कब्जे में लिया जाता है और निकटतम वन्यजीव अस्पताल ले जाया जाता है।
उसके बाद डॉक्टर की देख रेख में शेर का पोस्टमॉर्टम किया जाता है। पोस्टमॉर्टम की रिपोर्ट वन विभाग के अलावा जिला अधिकारी को भी भेजी जाती है। साथ ही मंत्रालय में भी उसकी एक कॉपी भेजी जाती है। यही नहीं जरूरत पड़ने पर या फिर जब कभी मौत के सही कारण नहीं पता लगते हैं तब शेर का विसरा फॉरेंसिक विभाग को भेजा जाता है।

बीते पाँच वर्षों में कितने शेरों की हुई मौत?
सोमवार को लोकसभा में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार 2019 से लेकर 2023 के बीच 555 शेरों की मृत्यु हो चुकी है।
वर्षवार आंकड़ा इस प्रकार है-
| वर्ष | कितने शेरों की मौत हुई |
| 2019 | 113 |
| 2020 | 124 |
| 2021 | 105 |
| 2022 | 110 |
| 2023 | 103 |



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