आपने आधुनिक वॉल क्लॉक, रिस्ट वॉट (Wrist Watch), डिजीटल वॉच...यहां तक की स्मार्ट वॉच जरूर देखा होगा। पुराने जमाने की बात की जाए तो आपने सूर्य और चंद्रमा के रोशनी की परछाई से समय बताने वाली सौर अथवा चंद्र घड़ी के बारे में भी जरूर सुना होगा। लेकिन क्या आपने कभी वैदिक घड़ी के बारे में सुना या देखा है?
दुनिया की पहली वैदिक घड़ी महाकाल की नगरी उज्जैन में लगायी गयी है जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया। इस घड़ी का नाम विक्रमादित्य वैदिक घड़ी है। पिछले लंबे समय से ही इस वैदिक घड़ी का इंतजार मध्य प्रदेश के उज्जैन में रहने वाले लोग कर रहे थे।

क्या होती है वैदिक घड़ी?
भारत में वैदिक घड़ियों का इतिहास सदियों पुराना बताया जाता है। वैदिक घड़ी सिर्फ समय की टिक-टिक ही नहीं बल्कि समय के साथ-साथ शुभ मुहूर्त भी दिखाता है। कहा जाता है कि 1906 से पहले समय की गणना के लिए वैदिक घड़ी का ही इस्तेमाल किया जाता था। इसके बाद भारतीय मानक में समय आया था।
उज्जैन में स्थापित विक्रमादित्य वैदिक घड़ी समय के साथ-साथ हिंदू पंचांग, तिथि, ग्रहों की स्थिति, चंद्र ग्रहण, सूर्य ग्रहण, नक्षत्रों की स्थिति, शुभ मुहूर्त, चंद्रमा की स्थिति, ज्योतिषीय गणना और भविष्यवाणियों के बारे में भी सटिक जानकारी प्रदान करेगी। यह घड़ी एक सूर्योदय से दूसरे सूर्योदय की गणना करेगा।
क्यों उज्जैन में ही स्थापित हुई वैदिक घड़ी?
भारत का हर कोना अपनी परंपरा और ऐतिहासिकता से जुड़ा हुआ है, फिर उज्जैन में ही क्यों वैदिक घड़ी को स्थापित करने का फैसला लिया गया? दरअसल, उज्जैन कर्क रेखा पर स्थित है। इसलिए लंबे समय से ही मुहूर्त की सटिक गणना के लिए इस स्थान को केंद्र के तौर पर मान्यता दी गयी है। कहा जाता है कि उज्जैन वह स्थान है जहां विक्रमी पंचांग और विक्रम संवत कैलेंडर जारी किये जाते हैं। इसलिए इस घड़ी को स्थापित करने के लिए उज्जैन एकदम सही स्थान माना गया है।
कैसे काम करेगी यह घड़ी?
वैदिक घड़ी एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक के समय की गणना करता है। विक्रमादित्य वैदिक घड़ी इस अवधि को 30 भागों में विभाजित करेगा। इसमें से प्रत्येक वैदिक घंटा 48 मिनट का होगा। इस घड़ी को इंटरनेट से जोड़ा गया है। घड़ी से जुड़ा मोबाइल ऐप सूर्योदय और सूर्यास्त की लाइव फोटो समेत विभिन्न धार्मिक स्थलों और मंदिरों के लिए मौसम का अपडेट भी प्रदान करेगा।
कहां तैयार की गयी है वैदिक घड़ी?
यह घड़ी लखनऊ में स्थित आरोहण संस्था ने तैयार किया है। बताया जाता है कि यह वैदिक घड़ी मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव का ड्रीम प्रोजेक्ट है। उज्जैन के जीवाजी वेधाशाला के पास जंतर-मंतर में 86 फीट ऊंचे टावर पर इस अनोखे वैदिक घड़ी को लगाया गया है। साल 2022 में इस घड़ी का टावर बनाने के लिए सीएम यादव ने अपने विधायक फंड से 1.68 करोड़ रूपए आवंटित किया था। टावर की आधारशिला नवंबर 2022 में सीएम मोहन यादव ने रखी थी।



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