चंद्रयान -3 लॉन्चिंग की सारी तैयारियां पूरी की जा रही हैं। कहा जा सकता है कि चंद्रयान -3 अपने लॉन्चिंग के आखिरी चरणों में है। इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (ISRO) ने बुधवार को एक वीडियो जारी किया जिसमें श्रीहरीकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर में चंद्रयान- 3 के ऊपरी हिस्से यानी इनकैप्सुलेटेड असेंबली को LVM3 से जोड़ा गया।

अगर इस बार भारत चंद्रमा पर अपने चंद्रयान की सॉफ्ट लैंडिंग करवाने में कामयाब हो जाता है तो ऐसा करने वाला भारत चौथा देश बन जाएगा। इससे पहले अमेरिका, रूस और चीन चंद्रमा पर अपने स्पेसक्राफ्ट्स की सॉफ्ट लैंडिंग करवाने में कामयाब हो चुके हैं।
कब लॉन्च होगा चंद्रयान-3
चंद्रयान-2 की असफलता के बाद यह मिशन भारत का एक महत्वकांक्षी स्पेस मिशन बन चुका है। चंद्रयान-3 के ऊपरी हिस्से को असेंबलिंग यूनिट में ले जाकर LVM3 से जोड़ना भारत के लिए बेहद रोमांचक क्षण है। मिली जानकारी के अनुसार इस मिशन को 12 से 19 जुलाई के बीच किसी दिन लॉन्च किया जा सकता है लेकिन इसकी संभावित लॉन्च डेट 13 जुलाई है।

गुरुवार को ISRO ने ट्वीट कर चंद्रयान- 3 को लॉन्च करने की तारीख की घोषणा कर दी है। इसरो के ट्वीट के अनुसार चंद्रयान-3 मिशन को 14 जुलाई को दोपहर 2.35 मिनट पर लॉन्च किया जाएगा। यानी इसरो अपने इस बहुप्रतिक्षित मिशन को लॉन्च करने के लिए अब पूरी तरह से तैयार हो गया है। इसरो चंद्रयान-3 को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से लॉन्च करेगा। जानकारी के मुताबिक चंद्रयान-3 को लॉन्च करने के लिए GSLV-MK3 रॉकेट का इस्तेमाल किया जाएगा।
चांद की धरती कब चूमेगा चंद्रयान-3
मीडिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इसरो के चेयरमैन एस. सोमनाथ ने बताया कि चंद्रयान-3 को 23 या 24 अगस्त को चंद्रमा की जमीन पर सॉफ्ट लैंडिंग करवाने का प्रयास किया जाएगा। बकौल एस. सोमनाथ इससे अंतरिक्ष के बारे में जानने व शोध कार्यों में भारत को बड़ी सफलता हाथ लगेगी। बताया जाता है कि चंद्रयान-2 के रास्ते से ही चंद्रयान-3 आगे बढ़ेगा क्योंकि यह रास्ता जाना-पहचाना हो गया है। बताया जाता है कि चंद्रयान-3 का लैंडर मॉड्यूल देसी तकनीक से बना हुआ है।
क्या-क्या लेकर जाएगा चंद्रयान-3

चंद्रयान-3 मिशन इसरो के लिए अपनी पिछली गलतियों यानी चंद्रयान-2 की असफलता से सबक लेते हुए अपनी शक्ति को प्रदर्शित करने का एक सुनहरा मौका है। इसरो ने इस मिशन की सफलता का पूरा भरोसा जताया है। चंद्रयान-3 के साथ इस बार एक लैंडर और रोवर जा रहा है लेकिन ऑर्बिटर नहीं भेजा जा रहा है। चंद्रयान -2 की तरह ही मिशन 3 के लैंडर और रोवर का नाम भी विक्रम और प्रज्ञान ही दिया गया है। लैंडर विक्रम का नाम भारतीय अंतरीक्ष कार्यक्रम के जनक विक्रम साराभाई के नाम पर रखा गया है।
क्या होगा चंद्रयान-3 मिशन में खास
चंद्रयान -2 को चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड कराने की कोशिश की गयी थी, लेकिन क्रैश लैंडिंग होने की वजह से चंद्रयान 2 से स्पेस सेंटर का कनेक्शन टूट गया था और यह मिशन फेल करार दिया गया था। चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग जुलाई 2019 को हुई थी। अब तक सभी देशों ने अपने-अपने स्पेसक्राफ्ट्स को चंद्रमा के उत्तरी ध्रुव पर ही लैंड करवाया था।
चंद्रयान-3 की खासियतें :
- चंद्रयान-3 को भी चांद के दक्षिणी गोलार्द्ध में ही लॉन्च करवाने की कोशिश की जाएगी।
- चंद्रयान -2 के क्रैश साइट से करीब 100 किमी की दूर पर इसे लैंड करवाया जाएगा।
- चंद्रयान-3 के लैंडर का काम चंद्रमा के तापमान, वहां भूकंप, रेडिएशन, भूकंपीय गतिविधियों, प्लाज्मा के घनत्व और सौर हवाओं के बारे में पता लगाना होगा।
- अंतरिक्ष में 100 किमी ऊपर चंद्रयान-3 को GSLV-MK3 रॉकेट से छोड़ दिया जाएगा।
- यह रॉकेट करीब 6 मंजिला ऊंची है, जिसका वजन 640 टन है।
- यह अपने साथ 37000 किमी ऊंची जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में 4000 किलो वजनी सैटेलाइट ले जा सकता है।
- रॉकेट समेत चंद्रयान-3 मिशन का कुल वजन लगभग 3900 किलो बताया जाता है।
- चंद्रयान-3 के लैंडर का वजन 1752 किलो और रोवर का वजन 26 किलो है।



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