1 जुलाई से अमरनाथ धाम की यात्रा शुरू हो चुकी है, जो अगले 62 दिनों तक जारी रहेगी। बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु हर रोज अमरनाथ गुफा की तरफ जा रहे हैं। अमरनाथ यात्रा का एक नियम है कि भक्त बाबा बर्फानी की गुफा से पहले टिकरी में काली माता मंदिर में उनके दर्शन के लिए जाते हैं।

लेकिन क्या आपको पता है कि सालों पुरानी इस परंपरा का कारण क्या है? आखिर क्यों बाबा अमरनाथ के दर्शन से पहले भक्तों को काली माता का दर्शन करना अनिवार्य है? क्या है इसके पीछे की कहानी?
आपके इन्हीं सवालों का जवाब ढूंढने की कोशिश करते हैं :
काली माता मंदिर में दर्शन का पौराणिक महत्व
हिंदू धर्म में देवी काली का अपना एक अलग ही महत्व है। काली मां असुरों और सभी बुरी शक्तियों की विनाशक मानी जाती हैं। माना जाता है कि लोगों को परेशान करने वाले राक्षशों का विनाश करने के लिए एक बार भगवान शिव ने मां काली के रुप में ही अवतार लिया था। इसलिए अमरनाथ यात्रा से पहले टिकरी में काली माता मंदिर में जाकर भक्त मां काली से यात्रा के दौरान किसी भी विपत्ति से बचाए रखने और यात्रा के सफल होने का आशीर्वाद मांगते हैं।
शिवभक्त पवित्र अमरनाथ गुफा की यात्रा शुरू करने से पहले मां काली से उनके शरीर, मस्तिष्क और मनोभाव को स्वच्छ बना देने का अनुरोध करते हैं। अमरनाथ यात्रा को सकरात्मक और अध्यात्मिक बनाने के लिए इस नियम का पालन करना आवश्यक माना जाता है।
पारंपरिक तरीके से पूजा करते हैं अमरनाथ यात्री

अमरनाथ की गुफा के लिए प्रस्थान करने से पहले टिकरी काली माता मंदिर में यात्री पारंपरिक तरीके से पूजा-अर्चना करते हैं। कहा जाता है कि पहाड़ी इलाकों में मौसम कभी भी बदल सकता है। साथ ही पहाड़ों पर लैंडस्लाइड से लेकर बादल फटने, खाई में गिरने जैसी आकस्माक दुर्घटनाएं घटने की आशंका भी बनी रहती है। इसलिए अमरनाथ यात्रा के दौरान किसी भी हादसे का शिकार होने से बचने और किसी नकरात्मक शक्ति का प्रकोप ना झेलना पड़े, इसलिए यात्री टिकरी काली माता के मंदिर में दर्शन करने के बाद ही पवित्र गुफा की यात्रा पर आगे बढ़ते हैं।
भक्त को भगवान से जुड़ने का मौका देती है काली माता
अमरनाथ गुफा की पवित्र यात्रा सिर्फ पहाड़ों की चढ़ाई या मनोरंजन ही नहीं बल्कि धर्म, अध्यात्म और आस्था जुड़ा हुआ है। जिसमें भक्त अपने भगवान का साक्षात दर्शन पाकर खुद को धन्य समझता है। भक्त का अपने भगवान से जुड़ाव एक लंबी प्रक्रिया है, जिसमें काली माता अहम भूमिका निभाती हैं।

दरअसल, भक्त जब अमरनाथ गुफा की चढ़ाई के लिए निकलते हैं तो उस समय सबसे पहले टिकरी जाते हैं, काली माता मंदिर में दर्शन के लिए। टिकरी में पूजा-अर्चना करने के बाद से ही भक्त अध्यात्म और आस्था में खोने लगता है। इसलिए जितनी देर में वह अमरनाथ गुफा पहुंचता है, वह भगवान को अपने काफी करीब पाता है और उनसे बिना किसी अड़चन के जुड़ भी पाता है।



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