Search
  • Follow NativePlanet
Share
» »क्यों काशी के घाट पर स्थापित भगवान शिव को कहा जाता है 'पाकिस्तानी महादेव', क्या है ऐसे नाम की वजह!

क्यों काशी के घाट पर स्थापित भगवान शिव को कहा जाता है 'पाकिस्तानी महादेव', क्या है ऐसे नाम की वजह!

शिव की नगरी काशी के कण-कण में भगवान भोलेनाथ का वास है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार काशी भगवान शिव के त्रिशुल पर बसी हुई है। पूरे बनारस में आपको भगवान शिव के जितने मंदिर मिलेंगे, उतने मंदिर संभवतः पूरी दुनिया में नहीं मिलेंगे। कहा भी जाता है कि काशी भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है।

Pakistani mahadev

यहां एक ओर स्वयंभू ज्योतिर्लिंग के रूप में भगवान विश्वनाथ का मंदिर है। वहीं दूसरी ओर काशी में गंगा के एक घाट पर 'पाकिस्तानी महादेव' के नाम से स्थापित हैं भगवान शिव। चौंक गये ना...भगवान का भी कोई देश होता है क्या...। पर काशी में गंगा के घाट पर इसी नाम से पूजे जाते हैं महादेव।

कहां है पाकिस्तानी महादेव का मंदिर

lord shiva kashi

पाकिस्तानी महादेव का मंदिर बनारस में दशाश्वमेध घाट के पास स्थित शीतला घाट पर स्थापित महादेव को 'पाकिस्तानी महादेव' के नाम से जाना जाता है। सिर्फ स्थानीय लोग ही नहीं बल्कि सरकारी दस्तावेजों में भी इस मंदिर का नाम 'पाकिस्तानी महादेव' के मंदिर के तौर पर ही दर्ज है। खास तौर पर सावन के समय इस मंदिर में दर्शन करने के लिए आने वाले भक्तों का तांता लगा रहता है। पर सवाल यह उठता है कि भगवान शिव का ऐसा अजीबोगरीब नामकरण क्यों किया गया? इस मंदिर का इतना अजीब नाम रखने की कहानी भारत-पाक बंटवारे से जुड़ी हुई है।

लोगों की है गहरी आस्था

temple of pakistani mahadev

पाकिस्तान का नाम सुनते ही हर भारतीय के दिल में एक दुश्मन की छवि उभरती है जो हमारे देश को हमेशा परेशान व तबाह करने की फिराक में रहता है। मगर भगवान शिव की महिमा भी अपरमपार ही है, कि वह बनारस के गंगा घाट पर 'पाकिस्तानी महादेव' के नाम से स्थापित और पूजे जाते हैं। इस मंदिर का नाम सुनकर ना तो किसी के मन में गुस्सा आता है और ना नफरत...बल्कि भक्ति का भाव ही उमड़ता है। इस मंदिर के प्रति लोगों में काफी गहरी आस्था भी है। किसी भी खास पर्व-त्योहार के दिन 'पाकिस्तानी महादेव' के मंदिर में जलाभिषेक के लिए लंबी लाइन लगती है।

क्या है मंदिर की कहानी

'पाकिस्तानी महादेव' के मंदिर की कहानी 1947 में हुए भारत-पाकिस्तान के बंटवारे से जुड़ी हुई है। बंटवारे की विभिषिका के बारे में आज देश का बच्चा-बच्चा जानता है। उस समय लोगों को ना जाने कितनी तकलीफों से गुजरना पड़ा था। पूरा देश दंगे की आग में जल रहा था। उसी समय पश्चिम बंगाल (तत्कालिन बंगाल) में भी दंगा भड़कने की वजह से लोग दूसरी जगहों पर पलायन कर रहे थे। उस समय मूल रूप से बनारस के जानकी बाई बोगड़ा का परिवार भी पश्चिम बंगाल से पलायन करने पर मजबूर हो गया था।

pakistani mahadev at shitala ghat

जब यह परिवार वापस काशी जा रहा था, उस समय बंगाल में अपने घर में स्थापित शिवलिंग को भी ये लोग अपने साथ वाराणसी ले गये। ये लोग शीतला घाट पर शिवलिंग का विसर्जन करना चाहते थे लेकिन वहां उपस्थित पुरोहितों ने उन्हें ऐसा करने से रोक लिया। स्थानीय पुरोहित से मिली जानकारी के अनुसार इस मंदिर की स्थापना के लिए बूंदी स्टेट के अखाड़ा परिषद ने स्थान दिया, जिसे रघुनाथ व मुन्नू महाराज के सहयोग से शीतला घाट पर ही स्थापित किया गया।

एक और कहानी, जो इस मंदिर को लेकर प्रचलित है, के अनुसार लाहौर के रहने वाले सीताराम मोहानी जब वाराणसी पहुंचे, तब उनके पास एक शिवलिंग भी था, जिसे वह गंगा में प्रवाहित कर देना चाहते थे। स्थानीय लोगों के अनुरोध पर उन्होंने इसे शीतला घाट पर स्थापित कर दिया। कुछ सालों बाद उनके रिश्तेदार यमुना दास ने यहां मंदिर का निर्माण करवाया।

कैसे पहुंचे 'पाकिस्तानी महादेव' के मंदिर

'पाकिस्तानी महादेव' का मंदिर बनारस के शीतला घाट पर स्थित है। अगर आप वाराणसी रेलवे स्टेशन की तरफ से आ रहे हैं तो इस मंदिर तक पहुंचने के लिए आपको रथयात्रा गोदौलिया मार्ग से होकर आना पड़ेगा। दशाश्वमेध घाट के ठीक बगल में ही 'पाकिस्तानी महादेव' के नाम से भगवान शिव विराज करते हैं। चुंकि बंटवारे के समय बंगाल दो हिस्सों, पूर्वी पाकिस्तान (वर्तमान बांग्लादेश) और पश्चिम बंगाल में बंट गया था, इसलिए इस मंदिर को 'पाकिस्तानी महादेव' का मंदिर कहा जाता है। दूसरी कहानी के अनुसार लाहौर (वर्तमान पाकिस्तान) से आने के कारण इस मंदिर को 'पाकिस्तानी महादेव' का मंदिर कहा जाता है।

More News

    Notifications
    Settings
    Clear Notifications
    Notifications
    Use the toggle to switch on notifications
    • Block for 8 hours
    • Block for 12 hours
    • Block for 24 hours
    • Don't block
    Gender
    Select your Gender
    • Male
    • Female
    • Others
    Age
    Select your Age Range
    • Under 18
    • 18 to 25
    • 26 to 35
    • 36 to 45
    • 45 to 55
    • 55+