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हिमाचल का एक ऐसा मंदिर..जहां रात भर सोने से होती है सन्तान पूर्ती

Written By: Goldi

मां बाप के जीवन बच्चे बेहद अहमियत रखते है..इस बात का दर्द उन माता-पिता से बेहतर कौन समझ सकता है..जिन्हें दर-दर भटक कर भी उनकी झोली हमेशा खाली रह जाती है। सन्तान पाने के लिए ना जाने कितने ही लोग
हर बार हर जगह मत्था टेकते हैं और मन्नते मांगते हैं। 
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कहते हैं भगवान से कुछ भी मांगों वो पूरा हो जाता है..फिर चाहे वह कुछ भी हो। भगवान सभी की सुनते हैं..इसी क्रम में आज हम आपको एक ऐसे मंदिर के बताने जा रहें है..जहां मात्र सोने से भर से आपके घर में किलकारियां गूँज उठेगी।
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इस मंदिर में संतान प्राप्‍ति के लिए नवरात्रों का विषेष महत्‍व बताया जाता है। इस मौके पर हिमाचल के पड़ोसी राज्यों पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ से सैकड़ों विवाहित जोड़े इस मंदिर में आते हैं जिनकी संतान नहीं होती है। ये स्‍थान
सिमसा माता के मंदिर के नाम से दूर दूर तक प्रसिद्ध है। माता सिमसा या देवी सिमसा को संतान दात्री माता के नाम से भी जाना जाता है।

सिमसा माता मंदिर

सिमसा माता मंदिर

यह मंदिर हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में..इस मंदिर का नाम सिमसा माता मंदिर है। बताया जाता है कि, यहां मंदिर के फर्श पर सोने से नि:संतान महिलाओं की गोदभर जाती है। कहते हैं कि खुद देवी मां उनको सपनों में आकर संतान होने का आशीर्वाद देती है। इसलिए दूर-दूर से हजारों नि: संतान महिलाएं इस खास फर्श पर सोने के लिए मंदिर में आती हैं।

नवरात्र का है विशेष महत्व

नवरात्र का है विशेष महत्व

नवरात्रों में होने वाले इस विशेष उत्सव को स्थानीय भाषा में सलिन्दरा कहा जाता है। सलिन्दरा का अर्थ है स्वप्न आना होता है। नवरात्रों में निसंतान महिलायें मंदिर परिसर में डेरा डालती हैं और दिन रात मंदिर के फर्श पर सोती हैं

सपने में देती हैं आशीर्वाद

सपने में देती हैं आशीर्वाद

ऐसा माना जाता है कि जो महिलाएं माता सिमसा के प्रति मन में श्रद्धा लेकर से मंदिर में आती हैं माता सिमसा उन्हें स्वप्न में मानव रूप में या प्रतीक रूप में दर्शन देकर संतान का आशीर्वाद प्रदान करती है।

स्वप्न में दिखे पत्थर तो

स्वप्न में दिखे पत्थर तो

अगर महिला को स्वप्न में लकड़ी या पत्थर दिख जाये तो इसका मतलब है कि, वह कभी मां नहीं बन सकती। इतना ही नहीं अगर नि:संतान बने रहने स्वप्न प्राप्त होने के बाद भी यदि कोई औरत अपना बिस्तर मंदिर परिसर से
नहीं हटाती है तो उसके शरीर में खुजली भरे लाल-लाल दाग उभर आते हैं।

 लिंग-निर्धारण का संकेत

लिंग-निर्धारण का संकेत

मान्यता के अनुसार, यदि कोई महिला स्वप्न में महिला कोई कंद-मूल या फल प्राप्त करती है तो उस महिला को संतान का आशीर्वाद मिल जाता है। देवी सिमसा आने वाली संतान के लिंग-निर्धारण का भी संकेत देती है।

ऐसे पता लगता है

ऐसे पता लगता है

जैसे कि, यदि किसी महिला को अमरुद का फल मिलता है तो समझ लें कि लड़का होगा। अगर किसी को स्वप्न में भिन्डी प्राप्त होती है तो समझें कि संतान के रूप में लड़की प्राप्त होगी। यदि किसी को धातु, लकड़ी या पत्थर की बनी कोई वस्तु प्राप्त हो तो समझा जाता है कि उसके संतान नहीं होगी।

संतान प्राप्ति

संतान प्राप्ति

संतान प्राप्ति के बाद लोग अपना आभार प्रकट करने सगे-सम्बन्धियों और कुटुंब के साथ मंदिर में आते हैं। यह मंदिर बैजनाथ से 25 किलोमीटर तथा जोगिन्दर नगर से लगभग 50 किलोमीटर दूरी पर स्थित है।

एक उंगली से हिल जाता है भारी भरकम

एक उंगली से हिल जाता है भारी भरकम

सिमसा माता मंदिर के पास यह पत्थर बहुत प्रसिद है । इस पत्थर को दोनों हाथों से हिलाना चाहो तो यह नही हिलेगा और आप अपने हाथ की सबसे छोटी ऊँगली से इस पत्थर को हिलाओगे तो यह हिल जायेगा।

कैसे पहुंचे सिमसा माता मंदिर

कैसे पहुंचे सिमसा माता मंदिर

सिमसा माता मंदिर बस द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है। सिमसा माता मंदिर का नजदीकी बस स्टैंड बैजनाथ है..यहां से माता के मंदिर की दूरी 32 किमी है..श्रद्धालु अपनी कार द्वारा भी आसानी से पहुंच सकते हैं।

कहां रुके

कहां रुके

सिमसा माता के मंदिर के आस पास कई सारी सराए मौजूद है..साथ ही यहां श्रधालुयों की सुख सुविधा का भी ध्यान रखा जाता है।

 
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