हर साल 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस (World Environment Day) मनाया जाता है। इस दिन को ज्यादा से ज्यादा लोगों को मनाने के लिए विभिन्न संस्थाओं और सरकार की तरफ से हमेशा प्रेरित किया जाता है ताकि ज्यादा लोग प्रकृति से जुड़ सकें और पेड़-पौधे लगा सकें।
पर्यावरण से संबंधित कई तरह की समस्याएं इन दिनों पर्यावरण वैज्ञानिकों की चिंता का कारण बना हुआ है जैसे तापमान का अत्यधिक बढ़ना, चक्रवाती तूफानों का आना, बारिश का कम या औसत से ज्यादा होना और ग्लोबल वार्मिंग। इन सभी समस्याओं की जड़ पर्यावरण का संतुलन बिगड़ना और पेड़ों का धड़ाधड़ काटा जाना ही माना जाता है।

विश्व पर्यावकण दिवस का इतिहास
साल 1972 में संयुक्त राष्ट्र संघ ने स्टॉकहोम सम्मेलन में विश्व पर्यावरण दिवस को मनाने का फैसला लिया था। पहली बार इस खास दिन को 5 जून 1974 को 'एक पृथ्वी' की थीम पर मनाया गया था। इस साल विश्व पर्यावरण दिवस को 'Land Restoration, Desertification And Drought Resilience' की थीम पर मनाया जा रहा है। इस थीम में 'हमारी भूमि' नारे के तहत सबका ध्यान भूमि बहाली, मरुस्थलीकरण और सूखे पर केंद्रित है।
एक तरह जहां लोग विकास के नाम पर पेड़ों को काटने पर उतारु हैं वहीं दूसरी तरफ भारत में कई शहर ऐसे भी हैं, जहां हर तरफ हरियाली छायी रहती है। चलिए ऐसे 6 शहरों के नाम जानते हैं, जहां देशभर में सबसे ज्यादा पेड़ मौजूद हैं :
मैसूर
मैसूर को भारत का न सिर्फ सबसे ज्यादा हरा-भरा बल्कि सबसे अधिक साफ-सुथरा शहर भी माना जाता है। अपनी सांस्कृतिक धरोहर की वजह से देश में एक अलग ही पहचान बनाने वाला मैसूर शहर कर्नाटक का दूसरा सबसे विशाल शहर है जिसे योजनाबद्ध तरीके से बसाया गया है। शहर के बीचोंबीच मौजूद मैसूर पैलेस चारों तरफ हरियाली से घिरा हुआ है। इसके अलावा मैसूर को ठंडक पहुंचाने के लिए वृंदावन गार्डन भी मौजूद है, जो शहर को न सिर्फ हरा-भरा बल्कि यहां खिलने वाले फूल इसे रंगीन भी बनाते हैं।
बैंगलोर
बैंगलोर को भले ही भारत का सिलीकॉन वैली कहा जाता है, लेकिन यह भारत का गार्डन सिटी भी है। बैंगलोर को सबसे ज्यादा ठंडक पहुंचाने वाला लालबाग बोटैनिकल गार्डन और कब्बन पार्क दुनिया भर में मशहूर है। कब्बन पार्क को बैंगलोर का दिल माना जाता है जहां सालों से पर्यटक पेड़-पौधों और उनसे जुड़ी विभिन्न जानकारियों के लिए आते रहते हैं। वहीं दूसरी तरफ लालबाग बोटैनिकल गार्डन में विभिन्न प्रकार की एक्टिविटी जैसे फ्लावर शो, मैंगो मेला आदि का आयोजन किया जाता है जो लोगों को हरियाली और प्रकृति से जोड़ने का काम करता है।
चंडीगढ़
पंजाब की राजधानी और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ की गिनती न सिर्फ भारत के सबसे ज्यादा हरे-भरे शहरों में होती है। चंडीगढ़ में सबसे ज्यादा हरियाली इसके सुन्दर पार्क और गार्डन्स में पायी जाती है। इसके अलावा चंडिगढ़ में सड़कों के किनारे पर भी बड़ी संख्या में विशाल पेड़ लगे हुए हैं जो शहर के वातावरण को ठंडा रखने में मदद पहुंचाते हैं। सुखा लेक, रॉक गार्डन और रोज गार्डन जैसी खुली जगहें चंडीगढ़ को ठंडक और पर्यावरण को स्वच्छ बनाए रखने में मदद पहुंचाते हैं।

गांधीनगर
गुजरात की राजधानी गांधीनगर एक योजनाबद्ध तरीके से बसाया हुआ शहर है। गांधीनगर में बड़ी संख्या में आपको हरियाली नजर आएगी। यहां लोग आधुनिकता के साथ प्रकृति को जोड़ना और प्रकृति को साथ लेकर चलना बखुबी जानते हैं। गांधीनगर का सरिता उद्यान और इंद्रोदा नेचर पार्क ऐसी जगहें हैं जो यहां आने वाले हर पर्यटक को लुभाता है। लेकिन जो जगह गांधीनगर को प्रकृति के और भी करीब लाती और इसे एक ग्रीन सिटी बनाती है, वह है साबरमती रिवर फ्रंट। जो इस शहर को एक नये स्तर पर पहुंचाती है।
शिमला
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला को अक्सर लोग क्विंस ऑफ हिल्स के नाम से पुकारते हैं लेकिन इस शहर के आसपास बसे पाइन के जंगलों को नजरंदाज कर जाते हैं। शिमला के आसपास फैले जंगल इस जगह को जादुई सुन्दरता प्रदान करते हैं। शिमला का माल रोड हो या जाखु हनुमान मंदिर हर जगह आपको पाइन के विशाल पेड़ और घने जंगल दिख जाएंगे। हाल ही में शिमला म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन को ग्रीन ग्रोथ सिटी का खिताब भी मिला है। शिमला बड़े ही प्यार से अपनी हरियाली और प्राकृतिक सुन्दरता को बनाए रखती है।
पुणे
महाराष्ट्र में जितनी ज्यादा हरियाली मौजूद है, उतनी हरियाली शायद ही किसी और राज्य में देखने को मिलती है। अपने शानदार वातावरण के लिए मशहूर पुणे भारत के सबसे ज्यादा इको-फ्रेंडली शहरों की लिस्ट में शामिल है। पुणे में सिर्फ गार्डन और पार्क ही नहीं बल्कि यहां सड़कों के किनारे भी बड़ी संख्या में विशाल पेड़ लगे होते हैं जो इस शहर को ग्रीन सिटी बनाते हैं। खासतौर पर मानसून के आने के बाद इस शहर की हरियाली काफी ज्यादा बढ़ जाती है जिस कारण लोग यहां शानदार वातावरण को एंजॉय कर पाते हैं।



Click it and Unblock the Notifications














