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बिना टिकट इस ट्रेन से सफर करते हैं लोग, कहां चलती है और क्यों कभी नहीं पकड़ता है TTE?

ट्रेन में सफर करने के लिए वैध टिकट का होना अनिवार्य माना जाता है। सिर्फ ट्रेन में सफर ही क्यों, अगर आप किसी भी रेलवे स्टेशन के परिसर में भी प्रवेश करना चाहते हैं तो आपको सबसे पहले प्लेटफार्म टिकट खरीदना पड़ता है। अगर बिना वैध टिकट के पकड़े जाते हैं तो जुर्माना तो लगेगा ही, साथ में जेल भी होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है।

लेकिन क्या आप जानते हैं, हमारे देश में ही एक ट्रेन ऐसी भी चलती है, जिससे पिछले 75 सालों से लोग बिना टिकट यात्रा करते हैं। न ट्रेन में कभी TTE पकड़ने आता है और न ही स्टेशन पर कोई TC टिकट चेक करता है।

bhakra nangal train

जी हां, महंगाई के इस दौर में जहां लोग आपस में लंबे समय बाद मिलने के बाद एक-दूसरे का हाल-चाल जानने से पहले महंगाई का रोना रोने लगते हैं, ऐसे में अगर आपको फ्री में ट्रेन की सवारी करने का सुनहरा मौका मिल जाए तो कैसा रहे...। हम जिस ट्रेन की बात कर रहे हैं वह ट्रेन हिमाचल प्रदेश और पंजाब के बीच चलती है। इस ट्रेन से होकर न सिर्फ पर्यटक बल्कि अधिकारी भी बिना टिकट ही सवारी करते हैं।

कौन सी है ट्रेन?

यह ट्रेन है भाखड़ा-नंगल ट्रेन (Bhakra-Nangal Train)। यह ट्रेन हिमाचल प्रदेश और पंजाब के बॉर्डर पर नंगल और भाखड़ा के बीच चलती है। इस ट्रेन में कोई भी TTE नहीं होता है, जो ट्रेन में टिकट चेक करने या बिना टिकट यात्रियों को पकड़ने के लिए आए। खास बात है कि यह ट्रेन आज भी डीजल इंजन से चलती है और इतना ही नहीं, ट्रेन के सभी कोच लकड़ी के बने हुए हैं। किसी जमाने में इस ट्रेन में कुल 10 बोगियां होती थी लेकिन अब 3 बोगी के साथ ही इस ट्रेन का संचालन किया जाता है। इस ट्रेन पर सवार होकर पर्यटक भाखड़ा-नंगल बांध देने के लिए बिना टिकट के यात्रा करते हैं।

bhakra nangal dam

पहाड़ काटकर बिछाया गया था ट्रैक

मात्र 3 बोगियों के साथ चलने वाली भाखड़ा-नंगल ट्रेन में 1 बोगी महिलाओं के लिए रिजर्व रहती है और बाकी 2 बोगी में पर्यटक व भाखड़ा-नंगल बांध से जुड़े अधिकारी यात्रा करते हैं। इस ट्रेन को चलाने के लिए जो रास्ता चुना गया था, वहां पहले पहाड़ हुआ करते थे।

लेकिन उन पहाड़ों को काटकर रास्ता बनाकर ट्रैक बिछाया गया जिसपर इस ट्रेन को चलाया जाता है। इस ट्रेन में सफर करने वाले यात्री लगभग 13 किमी लंबा सफर बिना टिकट मुफ्त में ही तय कर लेते हैं। डीजल इंजन से चलने वाली 3 बोगियों के इस ट्रेन को चलाने में करीब 50 लीटर डीजल खर्च होता है।

रेलवे नहीं चलाती है यह ट्रेन

भाखड़ा-नंगल ट्रेन कई खासियतों से भरी हुई है। पिछले 75 सालों से हर दिन यात्रियों को मुफ्त में 13 किमी लंबा सफर तय करवाने वाली भाखड़ा-नंगल ट्रेन पर भारतीय रेलवे का कोई हक नहीं है। जी हां, इस ट्रेन का मालिकाना हक भारतीय रेलवे के पास नहीं बल्कि भाखड़ा-ब्यास प्रबंधन बोर्ड के पास है। मूल रूप से इस ट्रेन की शुरुआत बांध से जुड़े अधिकारियों व कर्मचारियों की आवाजाही के लिए ही की गयी थी लेकिन आम लोग और पर्यटक भी इस ट्रेन से मुफ्त में यात्रा करके बांध देखने जा सकते हैं।

bhakra railways

1948 से चल रही है ट्रेन

भाखड़ा-नंगल बांध को दुनिया की सबसे ऊंची सीधी बांध के रूप में जाना जाता है। इसे देखने के लिए दूर-दराज के इलाकों से बड़ी संख्या में पर्यटक आते रहते हैं। शुरुआत में भाखड़ा-नंगल बांध तक जाने के लिए परिवहन का कोई साधन नहीं होता था, इसलिए यहां पहाड़ को काटकर रेलवे ट्रैक बिछाया गया। जिस पर 1948 में भाखड़ा-नंगल रेलमार्ग पर सेवा शुरू हुई। क्या आप जानते हैं, बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार कहलाने वाले राजेश खन्ना की फिल्म 'चलता-पुर्जा' में भी इस ट्रेन की एक झलक देखने को मिली थी।

कराची में बने कोच और 60 साल पुराना इंजन

भाखड़ा-नंगल ट्रेन सिर्फ मुफ्त में यात्रा के लिए ही नहीं बल्कि अपने कोच और इंजन की वजह से भी भारत का सबसे अनोखा ट्रेन है। इस ट्रेन में आज से लकड़ी से बने कोच को ही जोड़ा जाता है। इन कोचों का निर्माण कराची में हुआ था जिसकी सीटें भी काफी अलग हैं। शुरुआत में यह ट्रेन भाप इंजन से चलायी जाती थी लेकिन 1953 में अमेरिका से लाए गये 3 आधुनिक इंजन से यह ट्रेन चलने लगी। उस समय के बाद से लेकर अब तक भारतीय रेलवे ने इंजन के 5 वेरिएंट लॉन्च कर दिये हैं लेकिन यह ट्रेन 60 साल पुराने इंजन से ही आज भी चलती है।

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