भारतीय रेलवे के इतिहास में एक नए अध्याय की शुरुआत होने वाली है। देश की पहली सेमी हाई स्पीड वंदे भारत एक्सप्रेस लॉन्च होने के बाद से ही रेलवे यात्रियों के बीच काफी लोकप्रिय हो चुकी है। कम समय में मध्यम से छोटी दूरी की यात्रा करने में रेलवे यात्रियों की पसंद वंदे भारत एक्सप्रेस ही है। अब तक इस ट्रेन में चेयरकार और एग्जिक्यूटिव चेयरकार, दो श्रेणियों में यात्रियों ने यात्रा की है।
लेकिन अब जल्द ही वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों की शुरुआत होने वाली है। हाल ही में वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की पहली रेक ट्रायल रन के लिए ICF चेन्नई भेजी गयी। इस बात की जानकारी केंद्रीय रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव ने अपने X हैंडल पर पोस्ट कर दी। इसके साथ ही उन्होंने वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों की पहली झलक भी शेयर की है।

मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार नयी वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के कोच का निर्माण BEML द्वारा किया गया है, जिसमें ICF ने अपना सहयोग दिया है। अब ट्रेन की कोच बनकर तैयार हो गयी है। इसकी गुणवत्ता से लेकर सुरक्षात्मक जांच तक के लिए अब इसे ICF चेन्नई भेजा गया है। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट हो रहा है कि चेयरकार के बजाए अब वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में यात्री आराम से लेटकर अपना सफर पूरा कर सकेंगे। ठीक वैसे ही, जैसे दुरंतो या राजधानी एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों में करते हैं।
Times of India की एक रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार इन ट्रेनों को खास तौर पर रात के समय चलाने के लिए ही डिजाइन किया गया है। बताया जाता है इन ट्रेनों को औसतन 160 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से चलाया जाएगा।
मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों की प्रोटोटाइप कोच का ट्रायल RDSO द्वारा खजुराहो से महाबो सेक्शन के बीच किया जाएगा। बताया जाता है कि ट्रायल को पूरा होने में करीब 2 महीने का समय लग सकता है। इसके बाद ही स्लीपर कोच वाली वंदे भारत एक्सप्रेस की नयी रेक को सुरक्षात्मक क्लीयरेंस दी जाएगी। सामान्य वंदे भारत एक्सप्रेस से क्या स्लीपर वंदे भारत में कोई फर्क होगा? कौन-कौन सी सुविधाएं मिलेंगी और क्या खासियतें होंगी वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की?
वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की विशेषताएं -
1. कवच - हर वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में यात्रियों की सुरक्षा के लिए बनाया गया विशेष डिवाइस कवच होगा।
2. सेमी परमानेंट कपलर की वजह से यात्रा के दौरान झटके कम महसूस होंगे।
3. ट्रेन की सीट/बर्थ सामान्य स्लीपर ट्रेनों की तुलना में कहीं ज्यादा आरामदायक होगी। इसके साथ ही बर्थ पर चढ़ने-उतरने वाली सीढ़ियां भी ज्यादा सुविधाजनक होगी। इस ट्रेन का डिजाइन यूरोपिय ट्रेनों की डिजाइन से प्रेरित है।
4. आग से सुरक्षा के लिए इस ट्रेन में EN-45545 HL3 अग्निशमन प्रोटोकॉल का पालन किया जाएगा।
5. ट्रेन की तेज रफ्तार के साथ गति को बढ़ाने और घटाने की बेहतर तकनीक। इस ट्रेन की अधिकतम गति 180 किमी प्रतिघंटा तक हो सकती है।
6. किसी भी आपातकाल के समय में ट्रेन के मैनेजर या लोको पायलट (ड्राईवर) से बात करने के लिए कम्यूनिकेशन सिस्टम दी जाएगी।
7. सेंट्रल कंट्रोल के साथ ऑटोमेटिक डोर सिस्टम होगा। यानी ट्रेन के दरवाजे स्वचालित या खुद से खुलने-बंद होने वाले होंगे। दरवाजे सिर्फ स्टेशन आने पर ही खुलेंगे।
8. दिव्यांग यात्रियों के लिए विशेष सुविधाएं रेस्ट्रिक्टेड मोबिलिटी (PRM) होंगी, ताकि उन्हें यात्रा के दौरान किसी भी तरह की परेशानी न हो।
9. पूरी ट्रेन में जगह-जगह पर सुरक्षा कैमरा अथवा सीसीटीवी कैमरे लगाए हुए हैं।
10. वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के कोच एयर कंडिशन और सलून (Saloon) लाइट दिया गया है।
11. हर वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में कुल 16 कोच होंगे 11 एसी 3 टियर कोच, 4 एसी 2 टियर कोच और फर्स्ट क्लास एसी कोच होगा।
12. सफर के दौरान यात्रियों को खाना या चाय-नाश्ता ढूंढने के लिए हर स्टेशन पर उतरने की जरूरत नहीं होगी। यात्रियों की भोजन से संबंधित जरूरतों को पूरा करने के लिए ट्रेन में ही पैंट्री कार मौजूद होगी।
13. वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के शौचालय विमानों की तरह डिजाइन किये गये हैं। इसमें दिव्यांगों की सुविधाओं का भी ध्यान रखा गया है। शौचालयों में बच्चों की नैपी बदलने के लिए भी विशेष व्यवस्था की गयी है। ट्रेन के एसी फर्स्ट क्लास कोच के शौचालय में गर्म पानी से नहाने की व्यवस्था भी मिलेगी। ताकि सफर खत्म होने से पहले सफर की थकान उतर सकें।
14. सभी सीट के पास पढ़ने के लिए रीडिंग लाइट, मोबाइल फोन या लैपटॉप चार्ज करने के लिए पावर प्लग, खाना खाने या कई बार लैपटॉप रखकर काम करने के लिए टेबल आदि भी मौजूद होंगे।
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों को सबसे पहले बेंगलुरु, दिल्ली और मुंबई शहरों में शुरू किया जाएगा। वहीं यह भी दावा किया जा रहा है कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेन सबसे पहले दिल्ली-श्रीनगर के रूट पर चलेंगे। हालांकि अभी तक रेलवे की तरफ से इस बारे में आधिकारिक तौर पर कोई जानकारी नहीं दी गयी है। संभव है जल्द ही इस बारे में कोई फैसला ले लिया जाए।



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