बचपन में हम सबने पढ़ा है कि बाकी सभी ग्रहों में से किसी के पास दो या किसी के पास दो से अधिक चंद्रमाएं हैं लेकिन हमारी धरती माता के पास सिर्फ एक ही चंदा मामा है। जो रात के अंधेरे में धरती को अपनी रोशनी से भर देता है। लेकिन क्या आप यकीन करेंगे, अगर हम आपसे कहे कि पृथ्वी के पास अब दो चंद्रमा है।
जी हां, हमारी धरती का चक्कर एक नहीं बल्कि दो-दो चांद लगा रहे हैं। हालांकि दूसरा चांद हमेशा के लिए पृथ्वी के पास नहीं रहने वाला है। यह अगले कुछ महीनों के लिए ही पृथ्वी की कक्षा में चक्कर लगाएगा।

आइए जानते हैं यह पूरा माजरा क्या है -
पृथ्वी ने अपनी कक्षा में एक एस्टेरॉयड को आकर्षित किया है। वैज्ञानिकों ने इसे मिनी मून (Mini Moon) का नाम दिया है, जो चंदा मामा के साथ-साथ पृथ्वी का चक्कर लगा रहा है। अगले कुछ महीनों तक मिनी मून पृथ्वी की कक्षा में चक्कर लगाता रहेगा। हम दावे के साथ कह सकते हैं कि आप भी जरूर सोचने लगे होंगे कि आज रात को जरूर अपनी खिड़की या बालकनी से झांककर आसमान में इस दूसरे छोटे वाले चंदा मामा को ढूंढने की कोशिश करेंगे।
लेकिन क्या दूसरा चांद जिसे मिनी मून कहा जा रहा है, भारत में दिखाई देगा? अगर दिखाई देगा तो कौन-कौन से शहरों से नजर आएगा? किस रंग का दिखाई देगा यह मिनी मून? क्या सामान्य चांद की तरह ही आसमान में एकदम चमकदार दिखेगा या फिर किसी तारे जैसा टिमटिमाता नजर आएगा?
तो अपने दिमाग के घोड़े दौड़ाना बंद किजीए और इतने उत्साहित न होते हुए शांत होकर बैठ जाइए। क्योंकि पृथ्वी का दूसरा चांद यानी मिनी मून भारत क्या दुनिया में कहीं भी नंगी आंखों से नजर नहीं आने वाला है। यह किसी सामान्य दूरबीन से भी दिखाई नहीं देगा। तो क्या इसे देख ही नहीं पाएंगे? अगर आप पृथ्वी की दूसरी चंद्रमा का दीदार करना चाहते हैं तो आपको विशेष खगोलिय दूरबीन का इस्तेमाल करना पड़ेगा। पर क्या है यह एस्टेरॉयड और कब तक पृथ्वी का चक्कर काटता रहेगा यह?
क्या है धरती का मिनी मून?
इस वक्त धरती का चक्कर लगा रहे एस्टेरॉयड का नाम 2024 PT5 रखा गया है। 29 सितंबर से इसने पृथ्वी की कक्षा में चक्कर काटना शुरू किया है। बताया जाता है कि NASA ने पहली बार इस एस्टेरॉयड को इस साल 7 अगस्त को देखा था। इसकी उत्पत्ति अर्जुन एस्टेरॉयड बेल्ट से हुई बतायी जाती है। इसकी गति करीब 2,200 मील प्रति घंटा बतायी जाती है।
आकार में यह एस्टेरॉयड किसी स्कूल बस जैसा है यानी कि आकार में यह चांद के मुकाबले काफी छोटा है। लेकिन इस आकार और गति के साथ अगर यह पृथ्वी से टकराता है तो किसी एक शहर को पूरी तरह से तबाह करने की क्षमता रखता है। मगर घबराने वाली कोई बात नहीं है। ऐसा बिल्कुल नहीं होगा।
कब तक चक्कर लगाएगा एस्टेरॉयड 2024 PT5?
यह एस्टेरॉयड 25 नवंबर तक पृथ्वी के चक्कर लगाने के बाद धरती की कक्षा से बाहर निकल जाएगा। खास बात है कि यह एस्टेरॉयड चांद की तरह पृथ्वी का गोल चक्कर नहीं काटेगा बल्कि घोड़े की नाल के आकार में पृथ्वी के चारों तरफ घूमेगा। ऐसा पृथ्वी की गुरुत्वाकर्षण शक्ति की वजह से ही होगा।
वर्ष 2055 में 2024 PT5 के पृथ्वी की कक्षा में वापस लौटने की उम्मीद है। गौरतलब है कि वैज्ञानिकों का मानना है कि लगभग 6.6 करोड़ साल पहले 10 किमी के व्यास वाले एक एस्टेरॉयड के पृथ्वी के टकराने की वजह से ही दुनिया से डायनासोर का अस्तित्व खत्म हो गया था।



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