अहमदाबाद के बाहरी इलाकों में बंजर जमीनें और शहर के अंदर पेड़ों की कमी शहर की इकोलॉलिकल संतुलन को बिगाड़ने का काम कर रही हैं। इस कारण अनियमित बारिश, गर्मी में अधिक तापमान और ठंड में मौसम का उतार-चढ़ाव बना हुआ है। पर्यावरण की इस समस्या से थोड़ी निजाद पाने के लिए अहमदाबाद और देरतरोज जिले में डेढ़ लाख पेड़ लगाये जाएंगे। शनिवार को शुरू किया गया यह कार्य माच 2025 तक पूरा हो जाएगा।

शहर को बेहतर जलवायु मुहैया कराने के लिए इस कार्य को सपोर्ट करने के लिए पर्यावरण की दिशा में कार्य कर रहे गैर सरकारी संगठन बाल भारती अकैडमी के साथ आगे आया है ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ओएनजीसी)। जी हां एक पेड़ मॉंक के नाम से शुरू किए गए इस अभियान में एक के बाद एक लोग जुड़ रहे हैं।
3 लाख पेड़ लगाने का संकल्प
एक पेड़ माँ के नाम के इस अभियान के अंतर्गत कुल 3 लाख वृक्ष लगाने का संकल्प लिया गया है। इसके तहत डेढ़ लाख गुजरात में और बाकी के डेढ़ लाख तमिलनाडु के शिवगंगा जिले में लगाये जाएंगे। इस काम को पूरा करने की डेडलाइन मार्च 2025 रखी गई है। इससे न केवल शहर के वातावरण को स्वच्छ हवा मिल सकेगी बल्कि आस-पास के गांवों में पानी की समस्या भी हल हो सकेगी। उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में मॉनसून में बारिश भी अच्छी होगी।

बाल भारती अकादमी के सचिव मनिंदर सिंह ने कहा कि जो यह तीन लाख पेड़ इन दो राज्यों में लगाये जाएंगे, उन्हें केवल लगा कर छोड़ नहीं दिया जाएगा। पौधे स्वस्थ्य रहें, ठीक तरह से बड़े हों और समय पर उनकी देख रेख हो सके इसके लिए अलग-अलग टीमों का गठन किया गया है। ये टीमें वर्ष 2028 तक इन पेड़ों की निगरानी समय-समय पर करेंगी।
आपको बता दें कि जो पेड़ आज लगाये जा रहे हैं वो आने वाले समय में अहमदाबाद की खूबसूरती को निखारने का काम करेंगे। जरा सोचिए मेट्रो, बुलेट ट्रेन और कई अन्य हाईवे परियोजनाओं की वजह से पहले ही पर्यावरण को नुकसान पहुंच चुका है। इस नुकसान की पूरी भरपाई तो ये डेढ़ लाख पेड़ नहीं कर पायेंगे, लेकिन थोड़ी राहत जरूर देंगे।



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