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भूकंप से झटकों से कांपा अंडमान, जान-माल का नहीं हुआ कोई नुकसान

बुधवार की सुबह भूकंप के झटकों से कांप उठा केंद्र शासित प्रदेश अंडमान। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के मुताबिक सुबह 7 बजकर 53 मिनट पर अंडमान में भूकंप के झटके महसूस किये गये। पिछले दिनों जापान में आए तेज भूकंप और उसके बाद सुनामी की चेतावनी की वजह से कुछ देर के लिए लोगों में डर का माहौल बन गया था।

andaman earthquake

हालांकि अंडमान में किसी के जान-माल के नुकसान की कोई खबर नहीं है। थोड़ी देर बार परिस्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो गयी। इससे पहले नवंबर में भी अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह में भूकंप के झटके महसूस किये गये थे।

बुधवार (10 जनवरी) को अंडमान में रिक्टर स्केल पर 4.1 की तीव्रता वाला भूकंप महसूस किया गया। सोशल नेटवर्किंग साइट X (पूर्व का ट्विटर) पर नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी द्वारा किये गये एक पोस्ट के मुताबिक सुबह 7.53 मिनट पर रिक्टर स्केल पर 4.1 की तीव्रता वाले भूकंप के झटके अंडमान में महसूस किये गये। भूकंप का केंद्र धरती से लगभग 10 किमी अंदर था। इसमें किसी के भी जान-माल के किसी नुकसान की कोई खबर नहीं मिली है। बता दें, अंडमान और निकोबार में अक्सर भूकंप के झटके महसूस होते रहते हैं।

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह 572 द्वीपों का एक समूह है जिसमें से 38 द्वीपों पर लोग निवास करते हैं। बाकी सभी द्वीप सरकार के नियंत्रण में है, लेकिन वहां कोई नहीं रहता है। इससे पहले 19 नवंबर 2023 को भी शाम के समय अंडमान और निकोबार द्वीप समूह पर भूकंप के झटके महसूस किये गये थे। उस समय भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.5 की मापी गयी थी।

भूकंप के उस झटके में भी जान-माल का कोई नुकसान नहीं हुआ था। भूकंप का केंद्र धरती से 120 किमी गहराई में था। नये साल के शुरुआत में ही जापान में आए तेज भूकंप में सैंकड़ों लोगों की मौत हो गयी थी। यहां एक दिन में ही 150 से अधिक बार भूकंप के झटके महसूस हुए थे और इनमें से कई झटकों की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 6.0 से अधिक थी। भूकंप की वजह से समुद्र में सुनामी और जिस प्रायद्वीप में भूकंप आया था वहां भूस्खलन व बर्फबारी का अधिक खतरा होने की चेतावनी भी जापान में जारी किया गया है।

क्यों आते हैं भूकंप के झटके?

भूकंप पृथ्वी के नीचे मौजूद प्लेटों में हलचल के कारण आता है। पृथ्वी की सतह के नीचे ये प्लेट एक-दूसरे के ऊपर और आसपास में तैरती रहती हैं। जब ये प्लेटें तैरते हुए एक-दूसरे से टकरा जाती हैं तो उनके बीच की चट्टानों में तनाव व दबाव पैदा होता है। सहन करने योग्य सीमा से जैसे ही तनाव व दबाव ऊपर जाता है तो चट्टानें टूट जाती हैं और इस वजह से अचानक निकली ऊर्जी तरंगों के रूप में पृथ्वी की सतह से टकराती हैं। यहीं तरंगे भूकंप का कारण बनती हैं। तरंगों की तीव्रता जितनी अधिक होती है, भूकंप की तीव्रता भी उतनी ज्यादा होती है।

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