चंडीगढ़ का एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है रॉक गार्डन (Rock Garden)। अगर हम ये कहें कि चंडीगढ़ को पहचान दिलाने में इस गार्डन की बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका रही है, तो ऐसा कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा। साल 1976 में बना यह गार्डन जल्द ही अपने 50 साल पूरे करने वाला है। उससे पहले केंद्र शासित प्रदेश की प्रशासन ने चंडीगढ़ के रॉक गार्डन की कायापलट करने का फैसला लिया है।
बता दें, वर्ष 1976 में चंडीगढ़ के सेक्टर 1 में लगभग 40 एकड़ के क्षेत्र में इस गार्डन का निर्माण किया गया था। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो वर्तमान समय में इस गार्डन में हर दिन लगभग 5000 सैलानी घूमने के लिए आते रहते हैं।

रॉक गार्डन में घूमने आने वाले सैलानियों में बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक भी होते हैं। Hindustan Times की एक रिपोर्ट के अनुसार इस गार्डन का निर्माण इंडस्ट्रियल और शहरी अपशिष्ट पदार्थों से किया गया था। वर्तमान समय में इस गार्डन से प्रदेश की प्रशासन को हर दिन लगभग 1 लाख रुपए की आय होती है, जो इसे प्रदेश का एक फायदेमंद पर्यटन स्थल बनाता है। मिली जानकारी के अनुसार रॉक गार्डन की कायापलट के लिए लगभग 20 करोड़ रुपए खर्च करने की घोषणा की गयी है।
क्या-क्या बनेगा नया?
हाल ही में चंडीगढ़ के रॉक गार्डन फेज 3 में केंद्रशासित प्रदेश की सचिव (पर्यटन) हरगुंजीत कौर की इंजीनियरिंग व पर्यटन विभाग के अधिकारियों के साथ हुई बैठक के बाद गार्डन में एक नया दरवाजा बनाने का प्रस्ताव दिया गया है। इसके साथ ही पुनरुद्धार योजना में गार्डन में एक नया रॉक कैफे, डॉल म्यूजियम को फेज 3 तक बढ़ाने, कंक्रीट से बने बैठने की जगहों का विस्तार, कुछ और मूर्तियों का निर्माण, कैशलेस टिकट व्यवस्था के साथ ही अंदरुनी हिस्से में रास्ते का निर्माण आदि का प्रस्ताव भी दिया गया है।

रॉक गार्डन में शनिवार और रविवार को विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन करने के साथ-साथ सभी तीनों फेज में शौचालयों की संख्या बढ़ाने का भी फैसला लिया गया है।
कब तक शुरू होगा पुनरुद्धार का काम?
प्रदेश के इंजीनियरिंग विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी, जो इस बैठक में भी शामिल थे, ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि हमें उम्मीद है कि इस साल के अंत तक पुनरुद्धार का काम शुरू और इसे अगले 1 साल के अंदर पूरा कर लिया जाएगा। हालांकि यह मंत्रालय की तरफ से रुपए आवंटित करने पर निर्भर करता है।
वरिष्ठ आर्किटेक्चर सुरिंदर बहगा ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि जून 2015 में इसका डिजाइन तैयार करने वाले नेक चंद की मृत्यु के बाद प्रशासन सभी मूर्तियों की देखरेख करने में विफल रहा जिससे इनको व्यापक स्तर पर क्षति पहुंचनी शुरू हो गयी थी।

बता दें, रॉक गार्डन यूं तो पर्यटन विभाग के अधीन आता है लेकिन इसकी देखरेख की जिम्मेदारी इंजीनियरिंग विभाग पर है।
समय के साथ मरम्मत कार्य नहीं होने की वजह से रॉक गार्डन की कई मूर्तियों को नुकसान पहुंचा है। हालांकि इंजीनियरिंग विभाग ने इन मूर्तियों की मरम्मत करने की कोशिश तो की थी लेकिन इनकी मरम्मत सीमेंट से होने की वजह से मूर्तियां भद्दी दिखने लगी थी। रॉक गार्डन की एंट्री शुल्क ₹30 है, जिससे प्रशासन की काफी कमाई होती है। इसके साथ ही रॉक गार्डन में अक्सर फिल्मों की शूटिंग भी होती रहती है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो फिल्मों की शूटिंग से रॉक गार्डन की लगभग ₹80 लाख रुपए हर महीने कमाई होती है।



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