दिल्ली के आउटर रिंग रोड पर बनेगा 6 लेन का एक फ्लाईओवर, जो क्षेत्र में अक्सर लगने वाली जाम की परेशानी से आम लोगों को राहत दिलाएगा। इस बात की घोषणा दिल्ली के लोक निर्माण विभाग (PWD) के मंत्री परवेश वर्मा ने की। उन्होंने बताया कि PWD ने दिल्ली के आउटर रिंग रोड पर 6 लेन की इस फ्लाईओवर को बनाने पर मंजूरी दे दी है।
इस इलाके में ट्रैफिक के बहाव को अच्छी तरह से नियंत्रित कर जाम की समस्या को कम करने में कारगर साबित होगा। बताया जाता है कि इस फ्लाईओवर के निर्माण में करोड़ों रुपए का खर्च आ सकता है। मीडिया से बात करते हुए परवेश वर्मा का कहना है कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली को आधुनिक और आवाजाही के लिए आसान सड़क नेटवर्क बनाने की दिशा में यह फ्लाईओवर एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकता है।

Hindustan Times की मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार दिल्ली के आउटर रिंग रोड पर इस 6 लेन की इस फ्लाईओवर का निर्माण उत्तर दिल्ली के मेटकाफ हाउस टी-जंक्शन पर सीविल लाइन ट्रॉमा सेंटर के पास किया जाएगा। इस जगह पर सड़क 8 लेन चौड़ी है, जिसके दोनों तरफ 4 लेन की सर्विस रोड है। अधिकारियों के हवाले से बताया जाता है कि इस फ्लाईओवर की लंबाई करीब 680 मीटर होगी।
आउटर रिंग रोड फ्लाईओवर को बनाने की कुल लागत लगभग ₹183 करोड़ हो सकती है। वर्मा ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि यह फ्लाईओवर उत्तर दिल्ली के एक व्यस्त इंटरसेक्शन पर जाम को कम करने में सहायक साबित हो सकता है, जहां आमतौर पर लोग लगभग 30 मिनट तक जाम में फंसे रह जाते हैं।
वर्मा का कहना है कि हमारा उद्देश्य आवाजाही में लगने वाले समय को कम करना, प्रमुख सड़कों पर जाम की वजह से होने वाले तनाव को कम करना और दिल्ली में घूमना-फिरना आसान बनाना है। उन्होंने कहा कि सोच-विचार के बाद सिविल लाइंस और आसपास के क्षेत्रों के निवासियों के लिए सुचारू यातायात की सुविधा मिलेगी, साथ ही हिमाचल प्रदेश और पंजाब की ओर अंतरराज्यीय आवागमन भी अच्छी तरह से हो सकेगी।
इस बारे में PWD के एक अधिकारी का कहना है कि प्रमुख क्रॉसिंग पर ट्रैफिक जाम लगने की वजह से सलीमगढ़ किला से सिग्नेचर ब्रिज तक ट्रैफिक जाम लग जाता है। स्थानीय लोगों, मार्केट एसोसिएशन की तरफ से और कई जगहों से इसकी कई बार शिकायतें भी दर्ज करवायी गयी थी।
इस जगह का मुआयना करने के बाद यहां एक नया फ्लाईओवर बनाने पर सभी की सहमती बनी। बताया जाता है कि यहां फ्लाईओवर के साथ ही एक ड्रेनेज सिस्टम भी बनाने की योजना बनायी गयी है ताकि बारिश के बाद यहां जलजमाव की परेशानी न हो।



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