देशभर में इन दिनों चर्चा का विषय राजधानी दिल्ली में बढ़ा प्रदूषण का स्तर है। GRAP - 4 को लागू किया जा चुका है, लोगों को सांस लेने में तकलीफ हो रही है, आंखों में जलन महसूस हो रही है, स्कूल-कॉलेजों को बंद कर दिया गया है और ऑफिसों में वर्क फ्रॉम होम देने का आदेश जारी किया जा चुका है। इसके साथ ही वाहनों के परिचालन से लेकर कई तरह की औद्योगिक गतिविधियों पर भी पाबंदी लगायी जा चुकी है। लेकिन...
दिल्ली में प्रदूषण है कि कम होने का नाम ही नहीं ले रहा है। हालांकि दिल्ली के AQI मंगलवार के मुकाबले बुधवार को थोड़ी कमी जरूर आयी है लेकिन अभी भी स्थिति काफी गंभीर बनी हुई है। वहीं कुछ ऐसी ही स्थिति पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में भी है। पाकिस्तान के कई शहरों जैसे लाहौर और मुल्तान में वायु की गुणवत्ता का सूचकांक (AQI) 2000 को पार कर गया था।

लेकिन पाकिस्तान ने एक ऐसी तकनीक का सहारा लिया, जिसके बाद इन शहरों की हवा में घुला जहर अब काफी ज्यादा कम हो गया है और लोग खुली हवा में सांस ले पा रहे हैं। क्या उसी तकनीक को अपनाकर अब दिल्ली भी प्रदूषण से निपटा जाएगा? क्या है वह तकनीक?
सबसे पहले आपको दिल्ली में आज की स्थिति से रू-ब-रू करवा देते हैं -
थोड़ा सा कम हुआ AQI
दैनिक जागरण की एक रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार दिल्ली और नोएडा के AQI में बुधवार को थोड़ा सुधार देखने को मिला है। बताया जाता है कि दिल्ली के कई इलाकों का AQI 400 से नीचे रहा जो पिछले कुछ दिनों से 600 से 1000 तक पहुंच जा रहा था। इसके साथ ही दिल्ली-एनसीआर में कोहरे और धुंध से भी थोड़ी राहत मिली, जिसकी वजह से दृश्यता बढ़ी और वाहनों को चलाने में थोड़ी आसानी हुई। इसके साथ ही अब दिल्ली में ठंड ने भी अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। सुबह और शाम के वक्त अब दिल्ली में ठंड महसूस हो रही है।
कहां कितना रहा AQI (सुबह 7 बजे)
| इलाका | AQI |
| सोनिया विहार | 321 |
| अलीपुर | 206 |
| पंजाबी बाग | 334 |
| ITI शारदा | 327 |
| लोनी | 324 |
| नई दिल्ली | 285 |
| नोएडा सेक्टर -1 | 385 |
| गाजियाबाद | 374 |
| फरीदाबाद (हरियाणा) | 361 |
पाकिस्तान ने अपनायी कौन सी तकनीक?
पाकिस्तान में जिस तकनीक को अपनाकर मुल्तान और लाहौर में प्रदूषण को नियंत्रित करने में सफलता पायी है, वह है कृत्रिम बारिश (Cloud Seeding)। जी हां, वहीं तकनीक जिसका इस्तेमाल दिल्ली में करने को लेकर भी इन दिनों खूब चर्चाएं हो रही हैं। मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की सरकार ने झेलम, चकवाल, तालागांग और गूजर खान इलाकों में कृत्रिम बारिश करवायी।
इसके अलावा पाकिस्तान के प्रदूषण प्रभावित शहरों में कुछ दिनों का लॉकडाउन भी लगाया गया था जिसके बाद अब हवा काफी ज्यादा शुद्ध हो गयी है। इससे पहले साल 2023 में भी पाकिस्तान में UAE की मदद से दिसंबर के महीने में क्लाउड सीडिंग के जरिए लाहौर में बारिश करवायी थी।

क्या है Cloud Seeding?
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर दिल्ली में क्लाउड सीडिंग के माध्यम से कृत्रिम बारिश करवाने की मांग की है। उन्होंने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव को पत्र लिखा है जिसमें प्रदूषण से निपटने का एकमात्र तरीका कृत्रिम बारिश को ही बताया है। पर कैसे होती है कृत्रिम बारिश? अब तक आपने हर जगह जरूर सुन लिया होगा कि क्लाउड सीडिंग के जरिए नकली बारिश करवाने के लिए बादलों में रसायनिकों का छिड़काव किया जाता है।
इस तकनीक में सिल्वर आयोडाइड, पोटैशियम आयोडाइड या ड्राई आइस आदि को हेलीकॉप्टर, लंबी दूरी तक मारने में सक्षम बंदूक अथवा मिसाइल के जरिए बादलों में पहुंचाया जाता है। ये सभी रासायनिक कण जल वाष्प को आकर्षित करते हैं जिससे बादल बनते हैं और बारिश होती है।
कितनी होती है लागत?
जनसत्ता की एक रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार IIT कानपुर दिल्ली में प्रदूषण से निपटने के लिए कृत्रिम बारिश कराने की पहल का नेतृत्व कर रही है। IIT कानपुर की टीम की योजना बादलों में फ्लेयर्स से रसायनों को छोड़ने की है जिसके लिए 6 सीटर Cessna प्लेन का इस्तेमाल किया जाएगा। बताया जाता है कि IIT कानपुर की टीम ने दिल्ली सरकार को इसकी लागत के बाबत जो जानकारी दी है उसके अनुसार प्रति वर्ग किमी के क्षेत्र में क्लाउड सीडिंग करने के लिए लगभग ₹1 लाख की लागत आने वाली है।
सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि अगर केंद्र सरकार दिल्ली में कृत्रिम बारिश करवाने पर फैसला ले लेती है तो उसे 20 नवंबर तक करवाने की योजना है। संभावना जतायी जा रही है कि कृत्रिम बारिश के बाद लगभग 1 सप्ताह तक दिल्लीवालों को प्रदूषण से थोड़ी राहत मिलेगी और साफ हवा में सांस लेने का मौका मिलेगा।



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