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भोपाल मेट्रो का हुआ फाइनल ट्रायल रन, 20 मिनट में पूरा किया 4 किमी का सफर

भोपाल मेट्रो का फाइनल ट्रायल रन पूरा कर लिया गया है। मंगलवार (3 अक्टूबर) को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खुद भोपाल मेट्रो को हरी झंडी दिखाई। उन्होंने इस मेट्रो की सवारी भी की। चुनावी मौसम में भोपाल मेट्रो कई मायनो में बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है लेकिन जनता को इससे निश्चित रूप से फायदा भी पहुंचेगा। भोपाल मेट्रो का स्वरूप देश के दूसरे शहरों में चलने वाली मेट्रो से काफी अलग है।

Metro MP

बता दें, भोपाल मेट्रो का काम अभी तक अधुरा ही है, लेकिन इस फेज के एक हिस्से का काम पूरा कर मेट्रो का फाइनल ट्रायल रन किया गया।

मुख्यमंत्री ने की मेट्रो की सवारी

भोपाल मेट्रो के फाइनल ट्रायल रन का सफर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी किया। मेट्रो ने 4 किमी का रास्ता 20 मिनट 10 सेकेंड में पूरा किया। ट्रायल रन के दौरान मेट्रो 10 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से ट्रैक पर दौड़ी। हालांकि अभी तक मेट्रो की सेफ्टी टीम ने इसका मुआयना नहीं किया है। भोपाल में सभी स्टेशनों का काम पूरा होने के बाद दिल्ली की सेफ्टी टीम भोपाल आकर मेट्रो का निरीक्षण करेगी।

Shivraj singh chauhan

उनकी हरी झंडी मिलने के बाद ही मेट्रो की सवारी आम जनता कर सकेगी। मुख्यमंत्री ने इस दौरान अपने भाषण में कहा, "मेट्रो यहीं नहीं रुकेगी। इसका विस्तार मंडीदीप भी किया जाएगा। जरूरत पड़ी तो सीहोर और विदिशा भी ले जाएंगे।" उन्होंने कहा कि मैं जब बचपन में भोपाल आता था तब यहां तांगा चला करती थी। फिर ऑटो, टैक्सी और स्मार्ट बसें चली। अब हम तांगे से मेट्रो तक सफर तय करेंगे।

ट्रायल रन रूट का 95% काम हो चुका पूरा

CM Of MP

मेट्रो के जिस रूट पर मंगलवार को ट्रायल रन किया गया, वह सुभाषनगर से एम्स तक बना है। लेकिन ट्रायल रन सिर्फ सुभाषनगर से रानी कमलापति स्टेशन तक का ही किया गया। पूरे रूट की लंबाई करीब 16 किमी है लेकिन अभी 6 किमी पर काम जारी है। हालांकि ट्रायल रन 10 नहीं बल्कि सिर्फ 4 किमी पर ही किया गया। सुभाषनगर से एम्स के बीच कुल 8 स्टेशन बनेंगे। इसमें से फाइनल ट्रायल रन 5 स्टेशनों के बीच किया गया है। 3 ऑफिस डीआरएम ऑफिस, अलकापुरी और एम्स का काम अभी तक अधुरा है। वहीं केंद्रीय स्कूल, डीबी मॉल, एमपी नगर और रानी कमलापति स्टेशन की फिनिशिंग का काम चल रहा है।

Metro BHopal

बता दें, पिछले 17 सितंबर की रात को गुजरात के सांवली (वडोदरा) में तैयार मेट्रो के कोचों को लगभग 850 किमी दूर भोपाल लाया गया था। 8 दिनों तक 50 से ज्यादा लोगों की टीम ने मिलकर कोच को कनेक्ट और उनकी जांच की। 26 सितंबर और उसके बाद कई दिनों तक मेट्रो को इस ट्रैक पर चलाकर देखा गया था।

कौन कौन से स्टेशन

  • सुभाषनगर
  • केंद्रीय विद्यालय
  • बोर्ड ऑफिस चौराहा
  • एमपी नगर
  • रानी कमलापति स्टेशन
  • करोंद चौराहा
  • डीआईजी बंगला
  • भोपाल स्टेशन

मेट्रो कोच की खासियतें

  • प्रत्येक कोच की लंबाई 22 मीटर और चौड़ाई 2.9 मीटर है।
  • एक कोच में करीब 50 यात्री बैठ और 300 खड़े हो सकेंगे।
  • स्वचालित ट्रैक निगरानी प्रणाली।
  • ऊर्जा बचत सुविधाएं।
  • इंटेलिजेंट सीसीटीवी सिस्टम।
  • ग्रिप हैंडल।
  • एलईडी पैनल, डिजिटल रूट मैप।
  • एयर कंडीशन कोच।

बता दें, आम यात्री भोपाल मेट्रो की सवारी कब से कर सकेंगे, इस बारे में कोई स्पष्ट निर्देश तो नहीं मिला है। लेकिन संभावना व्यक्त की जा रही है कि अगले साल मई-जून तक भोपाल मेट्रो के इस फेज का काम पूरा होकर, दिल्ली की सेफ्टी टीम निरीक्षण कर लेगी। दिल्ली की सेफ्टी टीम का सिग्नल मिलते ही पूरे रफ्तार से आम यात्रियों के लिए पटरियों पर दौड़ पड़ेगी भोपाल मेट्रो।

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