एक ओर मीलो फैला नीला समुद्र और दूसरी तरफ धुप में चमकती सुनहरी रेत। इनके बीच से होकर गुजरती सड़क। अब जरा सोचिए...अभी-अभी आप श्रीकृष्ण के महल यानी द्वारिकाधिश मंदिर में दर्शन कर बाहर निकले हैं और आपका अगला गंतव्य महादेव का दरबार यानी सोमनाथ मंदिर है। द्वारका-सोमनाथ कोस्टल रोड से होकर आप इस दूरी को तय कर रहे हैं। 200 किमी से भी ज्यादा लंबी दूरी को तय करना।
अब तक इस दूरी को तपती धूप में तय करना पड़ता था लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। श्रीकृष्ण के महल से महादेव के दरबार तक पहुंचाने वाली द्वारका-सोमनाथ कोस्टल रोड के दोनों तरफ पेड़ लगाने का फैसला गुजरात सरकार ने लिया है।

देश का सबसे लंबा मरीन ड्राइव (एनएच 51) जिसमें 200 किमी से भी लंबा रास्ता समुद्र के किनारे-किनारे ही तय किया जाता है। गुजरात का यह अनोखा कोस्टल रोड दो प्रमुख धार्मिक स्थलों को जोड़ता है। मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के अनुसार इस रोड से होकर गुजरने वाली गाड़ियों और यहां आने वाले सैलानियों की सुविधा के लिए हाईवे के दोनों तरफ कुल 40 हजार पेड़ लगाने का फैसला लिया गया है। इस परियोजना को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर ही पूरा किया जाएगा।
इस बारे में मीडिया को दिये बयान में गुजरात के मंत्री ऋषिकेश पटेल ने कहा कि पेड़ लगाने का ठेका एक निजी कंपनी को दिया जाएगा। यह कंपनी हरित वन पथ योजना के तहत हाईवे के दोनों तरफ 6 से 8 फीट के पौधे लगाएगी। सिर्फ पौधों को लगा देने से ही कंपनी की जिम्मेदारी खत्म नहीं हो जाएगी।
इन पौधों के देखरेख की जिम्मेदारी भी इसी कंपनी पर रहेगी। बताया जाता है कि हाईवे के दोनों तरफ हर 10 फीट की दूरी पर इन पौधों को लगाया जाएगा। कुछ समय बाद जब ये पेड़ बढ़ जाएंगे, तब इनकी छांव में मरीन ड्राइव का पूरा सफर तय करना बहुत अच्छा रहेगा।
मीडिया रिपोर्ट्स में किये गये दावों के अनुसार गुजरात सरकार हर पेड़ पर लगभग ₹3000 खर्च करेगी। इसमें पेड़ों को लगाने वाली कंपनी का खर्च और अगले 3 सालों तक पेड़ों का रखरखाव भी शामिल होगा। इस खर्च का आधा हिस्सा गुजरात सरकार उठाएगी और बाकी का आधा हिस्सा निजी कंपनी देगी। बता दें, गुजरात सरकार हरित वन पथ योजना के तहत लगभग 70,000 पेड़ लगाने की तैयारी कर रही है।



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