नवरात्रि के दौरान अमर्यादित परिधानों में मंदिर में आने वाले लोगों की अब खैर नहीं होगी। कोई भी महिला या पुरूष यदि अमर्यादित कपड़ों में मंदिर परिसर में प्रवेश करने का प्रयास करता है तो उसे नवरात्रि के समय मां काली के दर्शन नहीं मिलेंगे। उसे मंदिर परिसर के बाहर ही रोक दिया जाएगा। कुछ ऐसा ही नोटिस मुरादाबाद के प्राचीन सिद्धपीठ काली मंदिर के बाहर लगाया गया है।

यह नोटिस खास तौर पर नवरात्रि के समय मंदिर में उमड़ने वाली भक्तों की भीड़ को ध्यान में रखते हुए ही लगाया गया है।
क्या लगा है नोटिस
मुरादाबाद के प्राचीन सिद्धपीठ काली माता मंदिर के ठीक सामने एक बैनर लगाया गया है जिसमें मंदिर प्रशासन की तरफ से मंदिर में आने वाले सभी श्रद्धालुओं से मंदिर में देवी मां के दर्शन करने आते समय मर्यादित वस्त्र पहनकर आने का अनुरोध किया गया है। यह अनुरोध महिलाओं व पुरुषों दोनों से किया गया है। साथ ही कई तरह के कपड़ों की सूची के साथ कहा गया है कि ऐसे कपड़े पहनकर आने वाले श्रद्धालुओं को मंदिर के बाहर ही रोक दिया जाएगा। वे मंदिर के बाहर से देवी के दर्शन करने में मंदिर प्रशासन का सहयोग करें।
कौन से कपड़ों पर लगा बैन
- छोटे वस्त्र
- हाफ पैंट
- बर्मुडा
- मिनी स्कर्ट
- नाईट सूट
- कटी-फटी जींस
श्रद्धालुओं ने किया समर्थन
प्राचीन सिद्धपीठ काली मंदिर के इस निर्णय का मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं, विशेष रूप से महिला श्रद्धालुओं ने समर्थन किया है। उनका कहना है कि अमर्यादिय और छोटे, कटे-फटे परिधान मंदिर में आने वाले दूसरे श्रद्धालुओं की भावनाओं पर असर डालते हैं, उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचाते हैं। हमारी पारंपरिक वेशभूषा हमेशा से ही मर्यादित रही हैं। मंदिर परिसर में मर्यादित कपड़े पहन कर आना ही सबसे अच्छा और जरूरी होता है।
क्या है इस मंदिर का इतिहास

मुरादाबाद के लाल बाग में स्थित प्राचीन सिद्धपीठ काली माता मंदिर लगभग 20-25 फीट ऊंचे टीले पर मौजूद है। ब्रिटिश शासनकाल के दौरान यहां मां काली एक छोटे से मठ में स्थापित थी, जिनकी सेवा एक महंत किया करते थे। इस मठ की जमीन पर अपना अधिकार जमाने के लिए आए दिन अंग्रेज अफसर मठ में आ धमकते थे। आखिरकार एक दिन महंत ने टीले की थोड़ी सी मिट्टी को उठाकर दूर फेंकते हुए कहा कि यह मिट्टी जहां तक जाएगी, वहां तक मठ की जमीन होगी और यह मिट्टी मिश्री बन जाएगी। लोककथाओं के मुताबिक वास्तव में भी ऐसा ही हुआ। इस चमत्कार के आगे ब्रिटिश अधिकारियों ने भी अपना सिर झुका लिया और टीले की जमीन को हड़पने का उन्होंने इरादा छोड़ दिया। उसके बाद से ही इस मंदिर के टीले को मिश्री वाला टीला भी कहा जाता है।
नवरात्रि के समय उमड़ती है भक्तों की भीड़
मुरादाबाद के इस प्राचीन मंदिर में यूं तो सालभर भक्तों का मेला लगा रहता है लेकिन खासतौर पर शारदीय और चैत्र नवरात्रि के समय काफी संख्या में भक्त यहां मां काली के दर्शन के लिए आते हैं। बताया जाता है कि इस मंदिर की देखरेख जूना अखाड़ा द्वारा की जाती है। कहा जाता है कि मंदिर में आने वाले किसी भी भक्त को मां काली खाली हाथ वापस लौटने नहीं देती हैं। यहां आने वाले भक्तों की मुरादें वह जरूर पूरी करती हैं।



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