समुद्री ओलिव रिडले कछुओं को दुर्लभ माना जाता है, क्योंकि ये अपना अधिकांश समय समुद्र के अंदर ही बिताते हैं। साल में एक खास समय पर ये मादा कछुए बड़ी तादाद में समुद्रतटों की तरफ आते हैं और नर्म रेत पर अपने घोसले बनाकर उनमें अंडे देते हैं। रात के अंधेरे में अपने घोसलों में अंडे देने के बाद ये कछुए उन अंडों को यूं ही छोड़कर फिर से समुद्र की तरफ बढ़ जाते हैं।
मजेदार बात ये है कि इन अंडो में से निकलने वाला बच्चा नर होगा या फिर मादा, वह इस बात पर निर्भर करता है कि मादा कछुए ने अपना घोसला गर्म जगह पर बनाया है या फिर ठंडी जगह पर। अंडों से बच्चे निकलने में करीब 40-50 दिनों का समय लगता है। इसके बाद अंडों से बच्चे निकलकर समुद्र की ओर रेस लगाते हैं। जी हां, इन नन्हें-मुन्ने कछुओं की फौज से पूरा समुद्रतट ही मानों पट जाता है।

भारत में कई ऐसे समुद्रतट हैं, जहां दुर्लभ मादा ओलिव रिडले कछुए अपना घोसला बनाने और अंडे देने के लिए आती हैं।
1. ओडिशा
गहीरमाथा समुद्रतट ओडिशा से भीतरकणिका अभयारण्य का हिस्सा है। यह समुद्रतट दुनिया में ओलिव रिडले कछुओं का सबसे बड़ा प्रजनन क्षेत्र है। हर साल नवंबर से मार्च के बीच इस समुद्रतट पर लाखों की तादाद में मादा कछुए अपना घोंसला बनाने और अंडे देने समुद्रतट पर आती हैं। इस दौरान ओडिशा सरकार न सिर्फ समुद्र में मछुआरों के जाने पर रोक लगा देती है बल्कि समुद्रतट पर आने वाली इन मादा मेहमानों की सुरक्षा पर भी पूरा ध्यान देती है।

2. गोवा
उत्तर गोवा का मोरजिम समुद्रतट ओलिव रिडले कछुओं के घोंसले बनाने की एक लोकप्रिय जगह है। यह समुद्रतट डॉ. सलीम अली पक्षी अभयारण्य का हिस्सा है। अपनी प्राकृतिक सुन्दरता के लिए मशहूर इस समुद्रतट पर भी बड़ी संख्या में नवंबर से मार्च के बीच में ये दुर्लभ मादा समुद्री कछुए आती हैं, जिनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी न सिर्फ समुद्रतट पर अपनी दुकान चलाने वाले दुकानदार बल्कि पर्यटक भी उठाते हैं। इसके अलावा गोवा के गलगीबागा समुद्रतट पर भी आप यह दुर्लभ नजारा देख सकते हैं।
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3. लक्षद्वीप
कुछ सकरात्मक और थोड़ी सी नकरात्मक कारणों से भले ही पिछले दिनों लक्षद्वीप सूर्खियों में छाया हो, लेकिन मादा ओलिव रिडले कछुओं को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता। हर साल की तरह इस साल भी बड़ी संख्या में ये समुद्री कछुए लक्षद्वीप के अगात्ती समुद्रतट पर आकर अपना घोंसला बना रही हैं और वहां अंडे भी दे रही हैं।
यहां कछुओं के आने का सिलसिला अक्टूबर से मार्च के बीच चलता है। लक्षद्वीप प्रशासन की तरफ से इन कछुओं की सुरक्षा और यहां इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए योजनाएं चलायी जाती हैं।

4. रुशीकुल्या समुद्रतट, ओडिशा
ओडिशा का यह दूसरा समुद्रतट है, जहां हर साल अपना घोंसला बनाने के लिए ओलिव रिडले मादा कछुए आती हैं। खास बात है कि दूसरे समुद्रतटों के मुकाबले इस समुद्रतट पर हर साल इन हरे रंग की कछुओं के आने का सिलसिला फरवरी में शुरू होता है और अप्रैल में खत्म हो जाता है।
यहां की नर्म रेत में अपना घोंसला बनाकर रात के अंधेरे में अंडे देने के बाद कछुए उन घोंसलों पर अपने पैरों से रेत डालकर हल्का सा ढंक भी देती हैं।

5. तमिलनाडु
तमिलनाडु के विभिन्न समुद्रतटों पर भी ओलिव रिडले कछुए अपने अंडे देते हैं। खास बात है कि तमिलनाडु सरकार के वन विभाग की तरफ से इन कछुओं के संरक्षण का प्रयास किया जा रहा है। तमिलनाडु के मयिलादुथुराई जिले में सिरकाजी के समुद्रतट पर जनवरी के महीने में ओलिव रिडले कछुए अपना घोंसला बनाती हैं।
तमिलनाडु सरकार की तरफ से उन सभी अंडों के लिए विशेष हैचरी की व्यवस्था की गयी है जो कमजोर श्रेणी में होते हैं। इन अंडों से जब कछुओं के नवजात बच्चे निकलते हैं तो उन्हें सुरक्षित समुद्र में छोड़ दिया जाता है।



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