Search
  • Follow NativePlanet
Share
» »5 ऐसे मंदिर जहां होती है लंकेश रावण की पूजा, कहां हैं और क्यों होती है राक्षसराज की पूजा?

5 ऐसे मंदिर जहां होती है लंकेश रावण की पूजा, कहां हैं और क्यों होती है राक्षसराज की पूजा?

हमारे देश में जब बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में लंकापति रावण का पुतला जलाया जाता है। ठीक उसी समय कुछ ऐसी जगहें भी हैं, जहां मंदिरों में राक्षसराज रावण की पूजा की जाती है। ये मंदिर रावण के अपने राज्य लंका (वर्तमान श्रीलंका) में नहीं बल्कि हमारे देश के ही अलग-अलग राज्यों में मौजूद हैं। इन सभी मंदिरों में रावण को एक विद्वान के तौर पर पूजा जाता है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार दशहरा के दिन ही श्रीराम ने रावण का अंत कर उसके चुंगल से माता सीता को मुक्त करवाया था और दीवाली के दिन अपने भाई लक्ष्मण और माता सीता समेत श्रीराम की अयोध्या वापसी हुई थी।

इसी घटना को दर्शाते हुए आज भी दशहरा के दिन रावण के साथ-साथ उसके बेटे मेघनाथ और भाई कुंभकर्ण की मूर्तियों को भी जलाया जाता है।

लेकिन आज हम आपको उन मंदिरों के बारे में बताने वाले हैं, जहां रावण को एक विद्वान के तौर पर पूजा जाता है :

1. मंदसौर, मध्य प्रदेश

रावणों को जिन स्थानों पर सम्मान के साथ पूजा जाता है, उसमें सबसे पहला नाम मध्य प्रदेश के मंदसौर का आता है। मंदसौर में लंकापति रावण का मंदिर है, जहां सम्मान के साथ उसकी पूजा की जाती है। मान्यताओं के अनुसार रावण और उसकी पत्नी मंदोदरी की शादी मंदसौर के रावण मंदिर में ही हुई थी।

इस मंदिर में सिर्फ रावण ही नहीं बल्कि कई महिला देवियों की मूर्तियां भी स्थापित हैं, जिनकी पूजा की जाती है। इसके अलावा इस मंदिर में कई शिलालेख भी मिले थे जिनका हड़प्पा काल से संबंध बताया जाता है।

2. कानपुर, उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहर कानपुर के शिवाला इलाके में मौजूद है दशानन मंदिर, जो लगभग 125 साल पुराना बताया जाता है। कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण वर्ष 1890 में किया गया था। हर साल दशहरा के दिन इस मंदिर के कपाट खुलते हैं और श्रद्धालु पूजा-अर्चना कर पाते हैं। इस मंदिर से जुड़े के के तिवारी का कहना है कि जब पूरी दुनिया में रावण का पुतलादहन होता है, उस समय कानपुर के दशानन मंदिर के कपाट साल में एक दिन के लिए खोले जाते हैं और श्रद्धालु पूजा करते हैं।

उन्होंने बताया कि इस मंदिर का निर्माण 1890 में महाराज गुरु प्रसाद शुक्ल ने करवाया था। तिवारी ने बताया कि इस मंदिर को बनवाने की मुख्य वजह थी कि रावण एक महान विद्वान था और वह भगवान शिव का सबसे बड़ा भक्त था। शिवाला जिला क्षेत्र में भगवान शिव के एक मंदिर के परिसर में ही रावण के इस मंदिर का निर्माण किया गया था। दशहरा के दिन रावण की आरती भी की जाती है और लोग श्रद्धापूर्वक उसके मंदिर में मिट्टी के दीये भी जलाते हैं। हर साल दशहरा के दिन करीब 15000 श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।

3. बिसरख, ग्रेटर नोएडा, उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश के ही ग्रेटर नोएडा इलाके में स्थित बिसरख में रावण को एक भगवान के रूप में पूजा की जाती है। यहां दशहरा पर रावण दहन नहीं किया जाता है। दरअसल, नवरात्रि के 9 दिन बिसरख में शोक मनाया जाता है। एक तरह से कहा जा सकता है कि बिसरख में नवरात्रि खुशियां नहीं बल्कि गम लेकर आता है। पर ऐसा क्यों? दरअसल, स्थानीय मान्यताओं के अनुसार लंकापति रावण का जन्म बिसरख में हुआ बताया जाता है।

बिसरख में स्थित रावण का मंदिर सिर्फ ग्रेटर नोएडा ही नहीं बल्कि आसपास के इलाकों में भी काफी लोकप्रिय है। इस मंदिर का विरोध भगवान राम के कई भक्तों ने किया था लेकिन रावण को मानने वालो ने इस मंदिर के पक्ष में लड़ाई लड़ी और इसे नष्ट होने से बचा लिया।

4. विदिशा, मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश का एक गांव रावणग्राम, में मौजूद है रावण का चौथा मंदिर। यह मंदिर विदिशा के पास मौजूद है, जिसके बारे में कहा जाता है कि यह रावण की पत्नी मंदोदरी का मायका है। रावणग्राम का नाम भी, लंकापति रावण के नाम से ही रखा गया है।

इस मंदिर में रावण की 10 फीट लंबी मूर्ति स्थापित है, जिसकी पूजा करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां आते रहते हैं। खास तौर पर शादी की सालगिरह पर इस मंदिर में जोड़े रावण का दर्शन करने जरूर आते थे। पिछले कुछ सालों से दशहरा के दिन इस मंदिर में रावण की पूजा बड़े पैमाने पर की जा रही है।

5. कांकीनाड़ा, आंध्र प्रदेश

आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले में स्थित कांकीनाड़ा में रावण का एक प्रसिद्ध मंदिर स्थित है। मान्यताओं में कहा जाता है कि इस स्थान का चयन रावण ने भगवान शिव का मंदिर बनाने के लिए किया था। इस स्थान पर एक विशाल शिवलिंग मुराल भी मौजूद है, जो रावण की शिवभक्ति का प्रमाण माना जाता है।

यह मंदिर समुद्रतट के बेहद करीब मौजूद है और बड़ी संख्या में पर्यटक इस मंदिर को देखने के लिए आते रहते हैं। बता दें,कांकीनाड़ा आंध्र प्रदेश की इकलौती जगह है जहां रावण की पूजा होती है।

More News

Read more about: dussehra temple
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+