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श्रीखंड महादेव : होती है 72 फीट ऊंचे शिवलिंग की पूजा, जानिए क्यों है अमरनाथ से भी दुर्गम रास्ता!

कैलाश मानसरोवर, अमरनाथ या फिर केदारनाथ भगवान शिव के किसी भी स्थान पर पहुंचना कोई बच्चों का खेल नहीं होता है। हजारों फीट की ऊंचाई, कठिन मौसम और दुर्गम चढ़ाई पार करने के बाद ही महादेव के दिव्य स्वरूप का दर्शन मिल पाता है। आज हम जिस दुर्गम चढ़ाई की बात कर रहे हैं उसके बारे में कहा जाता है कि यह अमरनाथ की चढ़ाई से भी ज्यादा कठिन है।

Shrikhand mahadev

लेकिन जो व्यक्ति इस चढ़ाई को पूरी कर लेता है उसे होते हैं महादेव के 72 फीट ऊंचे दिव्य शिवलिंग के दर्शन। जी हां, आज हम बात कर रहे श्रीखंड महादेव की कठिन यात्रा के विषय में।

कहां है श्रीखंड महादेव?

श्रीखंड महादेव का धाम हिमाचल प्रदेश के शिमला के पास है। भगवान शिव के दर्शन के लिए भक्तों को एक-दो नहीं बल्कि 35 किमी की चढ़ाई करनी पड़ती है। लगभग 18,570 फीट की चढ़ाई करने के बाद भक्तों को महादेव के इस दिव्य पर्वतनुमा शिवलिंग के दर्शन मिलते हैं। यह यात्रा कोई आसान नहीं बल्कि बेहद जोखिम भरा होता है। श्रीखंड महादेव की पवित्र यात्रा साल भर नहीं बल्कि जुलाई में होती है। श्रीखंड महादेव या श्रीखंड कैलाश पंचकैलाश में से एक है।

Shrikhand Mahadev

अत्यधिक ऊंचाई पर होने की वजह से यह जगह पूरी तरह से बर्फ से ढका रहता है। यह ऐसी खतरनाक चढ़ाई है जिसे एक बार पूरी करने वाला तीर्थ यात्री शायद ही दोबारा आने के बारे में सोचे। इसलिए ऐसा कहा जा सकता है कि श्रीखंड महादेव के दर्शन कोई भी भक्त जीवन में सिर्फ एक बार ही कर सकता है।

क्यों है अमरनाथ से कठिन चढ़ाई?

आप सोच रहे होंगे कि महज 35 किमी की चढ़ाई को अमरनाथ से भी ज्यादा खतरनाक क्यों माना जाता है। दरअसल, इस यात्रा के दौरान ना तो कोई घोड़ा, ना खच्चर और ना ही पालकी जाती है। अमरनाथ की चढ़ाई 13 हजार फीट की होती है लेकिन श्रीखंड महादेव की चढ़ाई 18 हजार फीट से ज्यादा होती है।

Shrikhand Mahadev

और यह चढ़ाई को भक्तों को खुद ही पूरी करनी पड़ती है। इस वजह से ही इस यात्रा को अमरनाथ यात्रा से भी ज्यादा कठिन माना जाता है। कई जगह यात्रा पथ के दौरान बर्फिले मार्ग के दोनों तरफ गहरी खाई भी मिलती है। बर्फ की वजह से पैर फिसल जाने का डर भी बना रहता है। जो इस यात्रा को और भी ज्यादा कठिन बना देता है।

क्या है श्रीखंड महादेव का इतिहास?

पौराणिक मान्यता के अनुसार भस्मासुर नाम के एक असुर ने भगवान शिव की तपस्या की और उनसे वरदान मांगा कि वह जिस पर भी अपने हाथ रख दे, वह तुरंत भस्म हो जाए। महादेव ठहरे भोलेनाथ। उन्होंने भस्मासुर को यह वरदान दे भी दिया। बस फिर क्या था, भस्मासुर महादेव को ही भस्म करने के लिए उनके पीछे पड़ गया। कहा जाता है कि उस समय महादेव इसी स्थान पर श्रीखंड महादेव पर्वतश्रृंखला की एक गुफा में छिप गये थे।

Shrikhand mahadev

तब भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धरा और उन्होंने भस्मासुर के साथ नृत्य करते हुए उसे अपने ही सिर पर हाथ रखने के लिए विवश कर दिया। इसके बाद भस्मासुर जलकर राख हो गया। तब कहीं जाकर महादेव उस गुफा से बाहर निकले। कुल्लुवासियों का मानना है कि महादेव आज भी श्रीखंड महादेव के रूप में यहां निवास करते हैं।

कैसे पहुंचे श्रीखंड महादेव?

श्रीखंड महादेव कुल्लू जिले के निरमंड में स्थित है। यहां तक पहुंचने के लिए शिमला के रामपुर से कुल्लू के निरमंड आना होता है। वहां से बागीपुल और जाओं तक कार या बस से जा सकते हैं। इसके बाद आगे का 35 किमी रास्ता पैदल तय करके ही श्रीखंड महादेव के दर्शन मिलते हैं। रास्ते में यात्रियों के लिए 3 पड़ाव बनाए जाते हैं : सिंहगाड़, थाचडू और भीम डवार।

Shrikhand mahadev

श्रीखंड महादेव के पैदल मार्ग पर कई मंदिर भी पड़ते हैं, जिसमें जाओं में माता पार्वती का मंदिर, परशुराम मंदिर, दक्षिणेश्वर महादेव का मंदिर, बकासुर वध स्थल, ढंक द्वार आदि कई पवित्र स्थान पड़ते हैं।

बता दें, इस साल (2023) में भी श्रीखंड महादेव की यात्रा 7 जुलाई से शुरू हुई थी जो 20 जुलाई तक चलने वाली थी। लेकिन ग्लेशियरों के पिघलने और भारी बारिश की वजह से यह जोखिमभरा रास्ता और भी खतरनाक बन जाने की वजह से इस साल यह यात्रा पूरी तरह से स्थगित कर दी गयी है। अगले साल ही अब श्रीखंड महादेव के दर्शन हो सकेंगे।

FAQs
श्रीखंड महादेव कहां स्थित है?

श्रीखंड महादेव हिमाचल प्रदेश के कुल्लू के पास स्थित है। माना जाता है कि यहां भगवान शिव मां पार्वती के साथ निवास करते हैं। इसे भारत के सबसे कठिन ट्रेकों में से एक माना जाता है।

श्रीखंड महादेव की चढ़ाई कितनी कठिन है?

श्रीखंड महादेव की ट्रेकिंग को सबसे कठिन और खतरनाक ट्रेकिंग की श्रेणी में रखा जाता है। 35 किमी की यात्रा में तीर्थ यात्रियों को 18 हजार फीट से भी ज्यादा की ऊंचाई चढ़नी पड़ती है।

श्रीखंड महादेव की चढ़ाई कितनी है?

श्रीखंड महादेव की यात्रा में तीर्थ यात्रियों को करीब 35 किमी की चढ़ाई करनी पड़ती है। यह चढ़ाई भक्तों को पैदल ही पूरी करनी पड़ती है। अमरनाथ की तरफ इस रास्ते पर घोड़े, खच्चर या पालकी से चढ़ाई नहीं होती है।

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