किसी भी नयी जगह की ट्रिप स्थानीय म्यूजियम में घूमे बगैर अधूरी ही मानी जाती है। कहा भी गया है कि किसी जगह की संस्कृति को समझना हो तो वहां के म्यूजियम में जरूर जाना चाहिए। भारत में कई ऐसी विचित्र जगहें हैं जो हमें चौंकाने का कोई मौका नहीं छोड़ती हैं।

ठीक उसी तरह से कई बड़े ही अनोखे म्यूजियम भी हैं, जहां रखी चीजों को देखकर आप विस्मित हुए बिना नहीं रह सकेंगे।
आज हम कुछ ऐसे ही अनोखे और बड़े विचित्र म्यूजियम के बारे में बता रहे हैं :
1. नीमहंस ब्रेन म्यूजियम

बेंगलुरु में स्थित नीमहंस ब्रेन म्यूजियम को ब्रेन बैंक के नाम से भी जाना जाता है। यह म्यूजियम 'नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंसेज' के बेसमेंट बना हुआ है। इस म्यूजियम में 300 से ज्यादा इंसानी दिमागों को, उनके परिजनों की मर्जी से, सुरक्षित रखा गया है। ये सभी दिमाग उन व्यक्तियों के हैं जो किसी सड़क दुर्घटना का शिकार बन चुके हैं। यहां न्यूरोसाइंस और अंगदान व दिमाग को दान करने के लिए लोगों को जागरुक भी बनाया जाता है।
कब जाएं : प्रवेश निःशुल्क। म्यूजियम सोमवार से शुक्रवार तक निर्धारित समय के लिए खुलता है।
2. विचार म्यूजियम फॉर यूटेंसिल्स

अहमदाबाद में स्थित विचार कल्चर एंड हेरिटेज म्यूजियम फॉर यूटेंसिल्स एक ऐसा म्यूजियम है जहां आपको विभिन्न प्रकार के बर्तन देखने को मिलेंगे। लेकिन ये कोई आम बर्तन नहीं। यहां प्रदर्शित बर्तन करीब 4000 साल तक पुराने हैं। 1981 में इस म्यूजियम को डिजाइनर सुरेंद्र पटेल और एंथ्रोपोलॉजिस्ट ज्योतिंद्र जैन ने बनवाया था। यह दुनिया का इकलौता म्यूजियम है, जहां विभिन्न कालों उपयोग होने वाली रोजमर्रा के बर्तनों को प्रदर्शित किया जाता है। म्यूजियम में विभिन्न प्रकार के कलश, जग, पीकदान और भी कई तरह के बर्तन देख सकेंगे।
कब जाएं : प्रवेश शुल्क 20 रुपये (वयस्क), 10 रुपये (3-11 साल के बच्चे)। सोमवार को छोड़कर म्यूजियम सप्ताह के बाकी सभी दिन शाम 3 बजे से रात को 10.30 बजे तक खुला रहता है।
3. आरबीआई मॉनिटरी म्यूजियम
भारत दुनिया में सिक्कों को जारी करने वाले कुछ शुरुआती देशों में शामिल रहा है। आरबीआई ने इस म्यूजियम को भारत की इन धरोहरों को सहेज कर रखने के लिए ही तैयार किया था। मुंबई में स्थित आरबीआई के मॉनिटरी म्यूजियम में पुराने सिक्के, कागज के नोट से लेकर सोने के बार तक सुरक्षित रखे हुए हैं।

2004 में आरबीआई द्वारा बनाये गये इस म्यूजियम का उद्धाटन तत्कालिन राष्ट्रपति डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम ने किया था। म्यूजियम में सिंधु घाटी सभ्यता, कुशन साम्राज्य, गुप्त काल से लेकर ब्रिटिश शासन के दौरान उपयोग होने वाले सिक्कों, भारत, चीन और दक्षिणपूर्व एशिया में चलने वाले शुरुआती कागज के रुपए भी सुरक्षित रखे हुए हैं।
कब जाएं : प्रवेश शुल्क 10 रुपये। सोमवार के अतिरिक्त सप्ताह में हर दिन सुबह 10 बजे से शाम को 5 बजे तक।
4. सुलभ इंटरनेशनल म्यूजियम ऑफ टॉयलेट

दिल्ली में स्थित यह म्यूजियम अपने आप में बेहद अनोखा है। शौचालय को समर्पित इस म्यूजियम का नाम सुनकर आपको नाक-भौं सिकोरने की जरूरत नहीं है। सुलभ इंटरनेशनल म्यूजियम ऑफ टॉयलेट में आपको 3000 ईसा पूर्व के प्राचीन चेंबर पॉट्स से लेकर विक्टोरियन टॉयलेट सीट तक देखने को मिलेंगे। इस म्यूजियम में सोने व अन्य कई धातुओं से बने टॉयलेट सीट प्रदर्शित किये गये हैं।
कब जाएं : प्रवेश निःशुल्क। यह म्यूजियम सप्ताह के सातों दिन खुला रहता है। सोमवार से शनिवार तक सुबह 10 से शाम 6 बजे तक। रविवार और किसी छुट्टी के दिन सुबह 10 से शाम 5 बजे तक।
5. काइट म्यूजियम

गुजरात में पतंग को लेकर बात ना हो, ऐसा कैसे हो सकता है। अहमदाबाद के पल्दी में स्थित काइट म्यूजियम में करीब 125 प्रकार के पतंग प्रदर्शित हैं। यह म्यूजियम बच्चों को खूब पसंद आता है। यहां आपको पुराने जमाने से लेकर आधुनिक युग तक के पतंग देखने को मिलेंगे। यहां पर 16 फीट लंबी पतंग, पारंपरिक कांच का काम किया हुआ पतंग, जापानी पतंग से लेकर ब्लॉक प्रिंट वाले पतंग, राधा-कृष्ण पतंग भी आपको नजर आएंगे।
यह म्यूजियम 1954 में स्थापित संस्कार केंद्र का हिस्सा है। इस म्यूजियम को उस समय तैयार किया गया जब भानु शाह ने अपने पतंग के कलेक्शन को अहमदाबाद म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन को दान में दे दिया। धीरे-धीरे समय के साथ म्यूजियम में पतंगों की संख्या बढ़ती गयी।
कब जाएं : प्रवेश निःशुल्क। सोमवार के अलावा सप्ताह के सातों दिन यह म्यूजियम खुला रहता है। सुबह 10 से दोपहर 12 बजे तक और शाम को 4 से 6 बजे तक म्यूजियम खुलता है।
6. इंटरनेशनल डॉल म्यूजियम

गुड्डे-गुड़ियों से खेलते हुए किसका बचपन नहीं बीता होगा। इसी बात को ध्यान में रखते हुए चंडीगढ़ में अंतर्राष्ट्रीय डॉल म्यूजियम को बनाया गया है। इस म्यूजियम में सिर्फ देसी ही नहीं बल्कि 32 से भी ज्यादा देशों के गुड्डे-गुड़ियों को प्रदर्शित किया जाता है। इन्हें देखकर उन देशों की संस्कृति, रहन-सहन और पहनावे के बारे में लोगों को जानकारी मिलती है।
इन गुड़ियों को क्ले, लकड़ी, प्लास्टर, पत्थर, कपड़े और भी कई प्राकृतिक वस्तुओं से तैयार किया गया है। 1985 में इंटरनेशनल डॉल म्यूजियम को तैयार किया गया था जहां आज दुनियाभर के लोग भेंट स्वरूप गुड़िया भेजा करते हैं।
कब जाएं : प्रवेश शुल्क 10 रुपये (वयस्कों के लिए)। 12 साल से कम उम्र और वरिष्ठ नागरिकों के लिए प्रवेश निःशुल्क। सोमवार के अतिरिक्त सप्ताह के 6 दिन म्यूजियम सुबह 10 से शाम को 4.30 बजे तक खुला रहता है।
7. मयोंग म्यूजियम

अक्सर गांवों में तंत्र-मंत्र और काले जादू के बारे में सुनने को मिलता है। लेकिन क्या आपको पता है कि काले जादू पर आधारित असम में एक म्यूजियम भी है। गुवाहाटी से 40 किमी दूर मोरीगांव जिले में स्थित मयोंग म्यूजियम में काले जादू से जुड़ी कई तरह की चीजें प्रदर्शित होती हैं। इस म्यूजियम की शुरुआत 2002 में राज्य सरकार ने किया था। इस गांव के लोग काले जादू को सालों से काफी ज्यादा मानते हैं। गांव के लोगों ने म्यूजियम में हड्डी, सीप, धातु से बने गहने, पुराने सिक्के, ब्रेसलेट आदि कई वस्तुएं दान भी की है।
8. उरुस्वती म्यूजियम

गुड़गांव में स्थित उरुस्वती म्यूजियम काफी अनोखा है। इसकी स्थापना दिसंबर 1999 में की गयी थी और वर्तमान परिसर में इसे सितंबर 2001 में स्थानांतरित किया गया। यह म्यूजियम लोककथाओं का है। तस्वीरों के माध्यम से लोककथाओं को इस म्यूजियम में बड़े ही सरल तरीके से प्रदर्शित किया गया है। इस म्यूजियम में पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मु और कश्मीर, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और बिहार की लोककथाओं को रोचक तरीके से प्रदर्शित किया गया है।



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