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इस्लाम के अलावा हिंदुत्व के वास्तु की भी झलक दिखाता है टीपू का समर पैलेस

By Syedbelal

यदि आप इतिहास के छात्र रह चुके हैं और इंडियन हिस्ट्री में आपका इंटरेस्ट है तो आपने "टाइगर ऑफ मैसूर" टीपू सुल्तान का नाम अवश्य सुना होगा। टीपू भारत के उन चुनिंदा शासकों में हैं जो अपनी न्यायप्रियता से ज्यादा अपनी तलवार के लिए जाने जाते हैं। ज्ञात हो कि टीपू सुल्तान कर्नाटक में प्राचीन मैसूर राज्य के शासक थे। आपको बताते चलें कि हैदर अली के पुत्र टीपू सुल्तान का जन्म 20 नवम्बर 1750 को कर्नाटक के देवनाहल्ली (यूसुफ़ाबाद) (बैंगलोर से लगभग 33 किमी उत्तर मे हुआ था।

एक योग्य शासक होने के अलावा टीपू एक विद्वान, कुशल सैनिक कवि और भवन निर्माण कला और वास्तुशास्त्र के अच्छे ज्ञाता भी थे। टीपू को वास्तु का कितना ज्ञान और निपुणता थी आप इस बात का अंदाज़ा बैंगलोर के टीपू समर पैलेस को देख के लगा सकते हैं। बंगलौर स्थित टीपू समर पैलेस वो स्थान था जहाँ टीपू गर्मियों के दिनों में वास करते थे। अगर आपको टीपू का ये खास और बेहद खूबसूरत महल देखना है तो कर्नाटक की राजधानी बैंगलोर के कृष्णा राजेंद्र नगर मार्केट के पास आइये।

पुराने बैंगलोर शहर में मौजूद इस महल के बारे में मशहूर है कि टीपू ने कभी इसे "अबोड ऑफ हैपीनेस" कहा था। आज इस स्थान का शुमार बैंगलोर के प्रमुख टूरिस्ट आकर्षणों में होता है। बताया जाता है कि 18 वीं शताब्दी में पिता हैदर अली की मृत्यु के बाद टीपू ने इस महल के निर्माण को पूरा कराया और वहां वास किया। आपको शायद ये जान के हैरत हो कि इस दो मंज़िला महल को केवल टीक वुड से बनाया गया है।

टीपू का समर पैलेस

टीपू का समर पैलेस

यदि आपको टीपू का ये खास और बेहद खूबसूरत महल देखना है तो कर्नाटक की राजधानी बैंगलोर के कृष्णा राजेंद्र नगर मार्केट के पास आइये।

टीपू का समर पैलेस

टीपू का समर पैलेस

महल कब और कैसे बना इसकी जानकारी देता वहां लगा हुआ एक शिलालेख।

टीपू का समर पैलेस

टीपू का समर पैलेस

पुराने बैंगलोर शहर में मौजूद इस महल के बारे में मशहूर है कि टीपू ने कभी इसे "अडोब ऑफ हैपीनेस" कहा था।

अबोड ऑफ हैपीनेस : टीपू समर पैलेस

अबोड ऑफ हैपीनेस : टीपू समर पैलेस

आज इस स्थान का शुमार बैंगलोर के प्रमुख टूरिस्ट आकर्षणों में होता है। बताया जाता है कि 18 वीं शताब्दी में पिता हैदर अली की मृत्यु के बाद टीपू ने इस महल के निर्माण को पूरा कराया और वहां वास किया।

अबोड ऑफ हैपीनेस : टीपू समर पैलेस

अबोड ऑफ हैपीनेस : टीपू समर पैलेस

आपको शायद ये जान के हैरत हो कि इस दो मंज़िला महल को केवल टीक वुड से बनाया गया है। कहा जाता है कि इस महल के निर्माण के लिए उपयोग में लाई जाने वाली लकड़ियों को कई वर्षों तक कावेरी नदी के पानी में डूबा के रखा गया था।

अबोड ऑफ हैपीनेस

अबोड ऑफ हैपीनेस

इंडो इस्लामिक आर्किटेक्चर को बखूबी दर्शाते इस महल के निर्माण में मुख्यतः तीन रंगों लाल भूरे और गोल्डन पीले रंगों का इस्तेमाल किया गया है।

अबोड ऑफ हैपीनेस : टीपू समर पैलेस

अबोड ऑफ हैपीनेस : टीपू समर पैलेस

टीपू द्वारा इस महल के प्रत्येक कोनों पर खूबसूरत ईरानी नक्काशियों का इस्तेमाल किया गया था।

अबोड ऑफ हैपीनेस : टीपू समर पैलेस

अबोड ऑफ हैपीनेस : टीपू समर पैलेस

इस महल की एक ख़ास बात ये भी है कि इस महल के निर्माण के दौरान इस बात का पूरा ख्याल रखा गया था कि ये महल टीपू के जीवन और कला के प्रति उसकी कद्र को दर्शा सके।

अबोड ऑफ हैपीनेस : टीपू समर पैलेस

अबोड ऑफ हैपीनेस : टीपू समर पैलेस

आज भी जब सूरज की रौशनी इस महल पर गिरती है तो इस महल की सुंदरता देखने लायक होती है।

अबोड ऑफ हैपीनेस : टीपू समर पैलेस

अबोड ऑफ हैपीनेस : टीपू समर पैलेस

इस खूबसूरत महल का निर्माण टीक वुड द्वारा किया गया है। आप इस तस्वीर में देख सकते है कि कैसे सीढ़ियों में भी विशेष संरचना दी गयी है।

अबोड ऑफ हैपीनेस : टीपू समर पैलेस

अबोड ऑफ हैपीनेस : टीपू समर पैलेस

कर्नाटक राज्य के प्राचीन इतिहास कि अगर मानें तो हर साल गर्मियों के मौसम में टीपू मैसूर से बैंगलोर आते और अपनी सभाएं करते थे।

अबोड ऑफ हैपीनेस : टीपू समर पैलेस

अबोड ऑफ हैपीनेस : टीपू समर पैलेस

कहा जाता है कि ऊपरी मंज़िले कि पूर्वी और पश्चिमी दिशा से टीपू अपने दरबार का संचालन करते थे।

अबोड ऑफ हैपीनेस : टीपू समर पैलेस

अबोड ऑफ हैपीनेस : टीपू समर पैलेस

टीपू को वास्तु का कितना ज्ञान और निपुणता थी आप इस बात का अंदाज़ा बैंगलोर के टीपू समर पैलेस को देख के लगा सकते हैं।

अबोड ऑफ हैपीनेस : टीपू समर पैलेस

अबोड ऑफ हैपीनेस : टीपू समर पैलेस

ये महल अपने आप में बहुत खूबसूरत है जो पर्यटन की दृष्टि से हर साल देश दुनिया के हज़ारों लोगों को अपनी तरफ आकर्षित करता है।

अबोड ऑफ हैपीनेस : टीपू समर पैलेस

अबोड ऑफ हैपीनेस : टीपू समर पैलेस

आप इस तस्वीर के जरिये इस महल में करी गयी खूबसूरत कारीगरी को देख और निहार सकते हैं।

अबोड ऑफ हैपीनेस : टीपू समर पैलेस

अबोड ऑफ हैपीनेस : टीपू समर पैलेस

वास्तु की दृष्टि से भी इस महल का विशेष महत्त्व है। ये महल आपको अलग अलग सभ्यता और संस्कृतियों का परिचय देता है।

अबोड ऑफ हैपीनेस : टीपू समर पैलेस

अबोड ऑफ हैपीनेस : टीपू समर पैलेस

एक योग्य शासक होने के अलावा टीपू एक विद्वान, कुशल सैनिक कवि और भवन निर्माण कला और वास्तुशास्त्र के अच्छे ज्ञाता भी थे।

अबोड ऑफ हैपीनेस : टीपू समर पैलेस

अबोड ऑफ हैपीनेस : टीपू समर पैलेस

यदि आप इस तस्वीर को ध्यान से देखें तो आपको मिलेगा कि टीपू ने अपने महल के निर्माण के वक़्त इस बात का पूरा ख्याल रखा है कि महल कि नक्काशी और साज सज्जा में कोई कोर कसार न हो।

अबोड ऑफ हैपीनेस : टीपू समर पैलेस

अबोड ऑफ हैपीनेस : टीपू समर पैलेस

महल के स्तम्भों को यदि आप ध्यान से देखें तो आपको मिलेगा कि उसमें भी ईरानी वास्तु से मिलती जुलती नक्काशी करवाई गयी है।

अबोड ऑफ हैपीनेस : टीपू समर पैलेस

अबोड ऑफ हैपीनेस : टीपू समर पैलेस

आज महल के निचले हिस्से को एक म्यूजियम में तब्दील कर दिया गया है जहां टीपू के जीवन का परिचय देती तस्वीरें, तलवार और टीपू के शेर को रखा गया है। यदि आप इस महल में घूमने जा रहे हैं तो इस म्यूजियम कि यात्रा करना न भूलिए।

अबोड ऑफ हैपीनेस : टीपू समर पैलेस

अबोड ऑफ हैपीनेस : टीपू समर पैलेस

इंडो इस्लामिक आर्किटेक्चर को बखूबी दर्शाते इस महल के निर्माण में मुख्यतः तीन रंगों लाल भूरे और गोल्डन पीले रंगों का इस्तेमाल किया गया है साथ ही उस समय टीपू द्वारा इस महल के प्रत्येक कोनों पर खूबसूरत ईरानी नक्काशियों का इस्तेमाल किया गया था।

अबोड ऑफ हैपीनेस : टीपू समर पैलेस

अबोड ऑफ हैपीनेस : टीपू समर पैलेस

पैलेस सोमवार से शनिवार सुबह 9 से शाम 6 बजे तक खुलता है साथ ही ये रविवार को बंद रहता है। यहां जाने के लिए आपको शहर में ऑटो और बसें आसानी से मिल जाएंगी। आइये कुछ ख़ास तस्वीरों के जरिये दिखाएं आपको ये खूबसूरत महल।

बताया जाता है कि इस महल के निर्माण के लिए उपयोग में लाई जाने वाली लकड़ियों को कई वर्षों तक कावेरी नदी के पानी में डूबा के रखा गया था। इंडो इस्लामिक आर्किटेक्चर को बखूबी दर्शाते इस महल के निर्माण में मुख्यतः तीन रंगों लाल भूरे और गोल्डन पीले रंगों का इस्तेमाल किया गया है साथ ही उस समय टीपू द्वारा इस महल के प्रत्येक कोनों पर खूबसूरत ईरानी नक्काशियों का इस्तेमाल किया गया था।

इस महल की एक ख़ास बात ये भी है कि इस महल के निर्माण के दौरान इस बात का पूरा ख्याल रखा गया था कि ये महल टीपू के जीवन और कला के प्रति उसकी कद्र को दर्शा सके। आज भी जब सूरज की रौशनी इस महल पर गिरती है तो इस महल की सुंदरता देखने लायक होती है। कर्नाटक राज्य के प्राचीन इतिहास कि अगर मानें तो हर साल गर्मियों के मौसम में टीपू मैसूर से बैंगलोर आते और अपनी सभाएं करते थे। कहा जाता है कि ऊपरी मंज़िले कि पूर्वी और पश्चिमी दिशा से टीपू अपने दरबार का संचालन करते थे।

आज महल के निचले हिस्से को एक म्यूजियम में तब्दील कर दिया गया है जहां टीपू के जीवन का परिचय देती तस्वीरें, तलवार और टीपू के शेर को रखा गया है। यदि आप इस महल में घूमने जा रहे हैं तो इस म्यूजियम कि यात्रा करना न भूलिए। यहां आने के बाद ही आप जान पाएंगे कि कैसे टीपू ने इतने विशाल राज्य को कुशलता से चलाया।

तो अब देर किस बात कि यदि आप बैंगलोर में हैं तो इस खूबसूरत महल की यात्रा जरूर कीजिये। पैलेस सोमवार से शनिवार सुबह 9 से शाम 6 बजे तक खुलता है साथ ही ये रविवार को बंद रहता है। यहां जाने के लिए आपको शहर में ऑटो और बसें आसानी से मिल जाएंगी। आइये कुछ ख़ास तस्वीरों के जरिये दिखाएं आपको ये खूबसूरत महल।

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