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अरे आओ, कुछ दिन तो गुज़ारो गुजरात में, गुजरात के बेस्ट टूरिस्ट डेस्टिनेशन

By Belal Jafri

आज गुजरात का शुमार भारत के सबसे खूबसूरत राज्यों में होता है। साथ ही आज गुजरात में पर्यटन के भी अलग अलग आयामों का विस्तार किया गया है। सुंदर परिदृश्य और समुद्र तटों के अलावा धार्मिक स्थलों और महलों वाला गुजरात अपनी झोली में वो सब कुछ लिए हुए है जिसकी एक ट्रेवलर को तलाश है। भारत के पश्चिम में बसा राज्य गुजरात अपनी स्थलाकृतिक और सांस्कृतिक विविधता के लिए जाना जाता है। वो गिर जहां रहते हैं खूंखार मगर बेहद खूबसूरत एशियाई शेर

जैसे की यह राज्य सिंधु घाटी सभ्यता का उद्गमस्थल भी है गुजरात हमेशा भारत के इतिहास में सांस्कृतिक और व्यापार का केंद्र माना जाता रहा है। गुजरात पश्चिमी भारत में स्थित एक राज्य है। इसकी उत्तरी-पश्चिमी सीमा जो अन्तर्राष्ट्रीय सीमा भी है, पाकिस्तान से लगी है। राजस्थान और मध्य प्रदेश इसके क्रमशः उत्तर एवँ उत्तर-पूर्व में स्थित राज्य हैं। महाराष्ट्र इसके दक्षिण में है। अरब सागर इसकी पश्चिमी-दक्षिणी सीमा बनाता है।

इसकी दक्षिणी सीमा पर दादरा एवँ नगर-हवेली हैं। आज हमारा ये लेख आपको इसी खूबसूरत गुजरात से रू-ब- रू कराएगा।साथ ही ये लेख आपको ये भी बताएगा कि वो कौन सी बातें है जो पर्यटन की दृष्टि से गुजरात को और राज्यों से अलग करती हैं। तो आइये जानें क्या क्या ख़ास और दूसरों से जुदा है गुजरात में।

वड़ोदरा के महल

वड़ोदरा के महल

यदि आप गुजरात में हैं और आपने वड़ोदरा के महलों को नहीं देखा तो हम यही कहेंगे कि तब आपने कुछ नहीं किया और आपकी यात्रा अधूरी है। यहां के महल अपनी उत्कृष्ठ वास्तुकला और खूबसूरत नक्काशी के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। लक्ष्मी विलास महल, नज़रबाग पैलेस, मकरपुरा पैलेस गुजरात के वो महल हैं जिनकी यात्रा आपको अवश्य करनी चाहिए। इसके अलावा अंकोत्तका,छोटा उदयपुर, दभोई, कडिया डूंगर की गुफाएं, संखेड़ा,श्री अरविंदो निवास वड़ोदरा के वो स्थान है जिनकी यात्रा आपको अवश्य करनी चाहिए।

सरदार सरोवर बाँध

सरदार सरोवर बाँध

नर्मदा नदी पर बनाया गया सरदार सरोवर बाँध नदी के मुहाने से 1163 किमी की दूरी पर है। इस बाँध की आधारशिला जवाहरलाल नेहरू ने 1961 में रखी थी पर निर्माण का कार्य अंततः 1979 में शुरू किया गया। बाँध के रिसेप्शन में गाइडेड पर्यटन की सुविधा उपलब्ध है जिसमें एक नक्शा भी है जिसमें भम्रण के लिए सभी छः दर्शनीय स्थलों का विवरण प्रदान किया गया है। ये स्थल हैं - एक उद्यान, नींव का पत्थर, नौका विहार के लिए एक झील, पहली लॉक गेट और प्रकृति शिविरों में भाग लेने आए छात्रों के लिए एक ट्रैकिंग पॉइंट भी है। आपको बताते चलें कि सरदार सरोवर बाँध की ऊँचाई 128 मीटर है। यह नर्मदा नदी के तट पर बना सबसे बड़ा बाँध है जो नर्मदा के अनजाने जल स्रोतों का उपयोग करके लोगों और पर्यावरण के विकास के लिए बनाया गया है। यह बाँध पूरे गुजरात को पीने का पानी, सिंचाई के लिए पानी और पन बिजली प्रदान करने में मदद करता है।

लघु रण जंगली गधा अभ्यारण्य, कच्छ

लघु रण जंगली गधा अभ्यारण्य, कच्छ

गुजरात के कच्छ के रण में स्थित जंगली गधा अभ्यारण्य भारत का सबसे बड़ा वन्यजीव अभ्यारण्य है। यह अभ्यारण्य 4954 किमी क्षेत्र में फैला है और इसमें विभिन्न प्रजाति के जन्तु और पक्षी पाये जाते हैं जिनमें भारतीय जंगली गधे की लुप्तप्राय प्रजाति के साथ-साथ चिंकारा, कैराकल्स और ऐशिया के विशालतम नीलगाय देखे जा सकते हैं। अभ्यारण्य में इनकी संख्या लगभग 3000 है और ये जानवर अक्सर झुण्ड में देखे जा सकते हैं, खासतौर से प्रजनन काल में।

झूलता मीनारा, अहमदाबाद

झूलता मीनारा, अहमदाबाद

झूलता मीनारा, दो हिलती मीनारों का एक जोड़ा है, इनमें से एक सिदी बशीर मस्जिद के विपरीत सारंगपुर दरवाजा में स्थित है और दूसरी राज बीबी मस्जिद के विपरीत अहमदाबाद रेलवे स्‍टेशन के अंदर स्थित है। इस जोड़ी वाली मीनारों की खास बात यह है कि जब एक मीनार हिलती है तो थोड़ी देर बाद दूसरी मीनार भी हिलती है। सिदी बशीर मस्जिद की मीनार, तीन मंजिला है जिसमें बालकनी में काफी नक्‍काशी बनी हुई है और यह पत्‍थर की नक्‍काशी से डिजाइन की गई है। माना जाता है कि इसे सिदी बशीर के द्वारा बनवाया गया था, जो सुल्‍तान अहमद शाह का नौकर था।

अदालज स्टेप वैल, गांधीनगर

अदालज स्टेप वैल, गांधीनगर

अदालज स्टेप वैल या अदालज वीएवी(गुजराती) राष्ट्रीय राजमार्ग पर गांधीनगर से 15 कि.मी. दूर स्थित एक अद्वितीय हिंदु कुँआ है। यह कुँआ अपनी अनूठी वास्तुकला और बारीक नक्काशी के लिए लोकप्रिय है। यह कुँआ वाघेला प्रमुख, वीर सिंह की पत्नी रानी रूदाबाई के लिए एक मुस्लिम राजा मोहम्मद बेगदा ने 1499 में बनवाया था। ग्रामीणों के लिए इस कुँए का आध्यात्मिक महत्व है, चूंकि वे इस कुँए पर पानी भरने और इसकी दीवारों पर खुदे देवताओं के चित्रों पर प्रार्थना करने के लिए आते हैं।

इंड्रोडा डायनासोर और जीवाश्म पार्क, गांधीनगर

इंड्रोडा डायनासोर और जीवाश्म पार्क, गांधीनगर

इंड्रोडा डायनासोर और जीवाश्म पार्क अथवा इंड्रोडा नेचर पार्क साबरमती नदी के किनारे 400 हैक्टेयर भूमि पर स्थित है। इसे दुनियाभर में डायनासोर के अंडों की दूसरी सबसे बड़ी हैचरी माना जाता है। इस नेचर पार्क की देखभाल गुजरात इकोलोजिकल एजुकेशन एंड रिसर्च फाउंडेशन करती है और यह भारत का एकमात्र डायनासोर संग्रहालय है। 'भारत का जुरासिक पार्क' उपनाम वाले इस पार्क में एक चिडि़याघर, वनस्पति उद्यान, एम्फीथिएटर और अनेक समुद्री स्तनधारियों के कंकाल भी हैं जिसमें ब्लू व्हेल शामिल है।

द्वारकाधीश मंदिर, द्वारका

द्वारकाधीश मंदिर, द्वारका

द्वारकाधीश मंदिर द्वारका का मुख्य मंदिर है जिसे जगत मंदिर (ब्रह्मांड मंदिर) भी कहा जाता है। किवदंती है कि जगत मंदिर - द्वारकाधीश मंदिर का मुख्य मंदिर लगभग 2500 वर्ष पुराना है और इसका निर्माण भगवान कृष्ण के पड़ पोते वज्रनाभ ने किया था। ऐसा भी कहा जाता है कि महाभारत के युद्ध के बाद जब द्वारका जो भगवान कृष्ण का राज्य था, पानी में डूब गई थी तब इस मंदिर का निर्माण किया गया था।

बेट द्वारका, द्वारका

बेट द्वारका, द्वारका

बेट द्वारका वह स्थान है जिसकी प्रशंसा प्रत्येक धार्मिक व्यक्ति करेगा। इस आइलैंड पर कुछ दुर्लभ और सुंदर मंदिर हैं तथा इसे बेट शंखोधर के नाम से भी जाना जाता है और यह एक समृद्ध बंदरगाह है। यहाँ आप डॉल्फिन देख सकते हैं, कैम्पिंग का आनंद उठा सकते हैं और समुद्री यात्रा भी कर सकते हैं। आपको बताते चलें कि यहाँ के कुछ प्रमुख मंदिर हैं वल्लभाचार्य द्वारा बनाया हुआ 500 वर्ष पुराना मंदिर, हनुमान मंदिर जो उनके पुत्र मकरध्वज की मूर्ति के लिए प्रसिद्ध है।

मोढेरा सूर्य मंदिर, दंता

मोढेरा सूर्य मंदिर, दंता

ये एक बहुत सुन्दर मंदिर है जो भारतीय वास्तुकला को दर्शाता है। यहां का सूर्य मंदिर कोई 900 साल पुराना मंदिर है जो उस समय का इतिहास बताता है। ये मंदिर मेहसाणा से 25 - 30 किलोमीटर दूर है।

कीर्ति मंदिर, पोरबन्दर

कीर्ति मंदिर, पोरबन्दर

कीर्ति मंदिर वह पवित्र स्थान है, जहां महात्मा गांधी का जन्म हुआ। मोहनदास करमचंद गांधी ने 2 अक्टूबर, 1869 को, पोरबंदर में तीन मंजिला नीली हवेली में जन्म लिया था। तथा अब यह स्थान कीर्ति मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है। इस जगह को अब महात्मा के जीवन पर आधारित एक संग्रह स्थल के रूप में बदल दिया गया है जिसमें गांधी जी की कुछ दिलचस्प तस्वीरें, उनकी कुछ दुर्लभ चीजें एवं गांधीवादी दर्शन और अभ्यास के संग्रह के साथ एक सुंदर पुस्तकालय को भी शामिल किया गया है।

सापूतारा

सापूतारा

सापूतारा गुजरात के शुष्क प्रकृति के बीच एक बिलकुल अलग जगह है। यह गुजरात के उत्तर पूर्व सीमांत पर है और पश्चिमी घाट के शायिदरी तक फैला हुआ दूसरा सबसे ऊंचा पठार पर है। सहयाद्रि रेंज के डांग वन क्षेत्र में बसा, सापूतारा हरियाली के साथ बहुत विविधता संजोये हुए एक खूबसूरत हिल स्टेशन है। इसके हिलने का मुख्‍य कारण आज तक नहीं पता चला और इसके पीछे इसकी बनावट का कोई गहरा रहस्‍य छुपा हुआ है, ब्रिटिशों ने इसका कुछ हिस्‍सा नष्‍ट कर दिया था जो आज तक सही नहीं किया जा सका।

हड़प्पा शहर, धोलावीरा

हड़प्पा शहर, धोलावीरा

यह जगह घूमने के लिए बहुत ही रोचक और रहस्यमय आकर्षण है। धोलावीरा छोटी सी जगह है जो भुज से 250 किलोमीटर दूर स्थित है। इसका स्थानीय नाम कोटडा टिम्बा है, यहाँ प्राचीन हड़प्पा शहर के खंडहर हैं जो भारत में प्रमुख पुरातात्विक स्थल है और सिंधु घाटी सभ्यता के अंतर्गत आता है। कच्छ रेगिस्तान वन्यजीव अभयारण्य में खदिर बेट द्वीप पर बसी इस जगह की 1967-68 के दौरान की खोज की गयी थी, जो भारतीय उपमहाद्वीप का पांचवां सबसे बड़ा हड़प्पाकालीन स्थल है। वर्ष 1990 के बाद से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यहाँ लगातार खुदाई कर रहा है। धोलावीरा, 100 एकड़ में फैला हुआ है जो समकोणीय आकार का है और एक ठोस ज्यामितीय योजना को प्रदर्शित करता है।

यूरोपीय कब्रिस्तान, सूरत

यूरोपीय कब्रिस्तान, सूरत

16वीं सदी के ये ब्रिटिश और डच मकबरे वास्तुकला में सथानीय हिंदु और इस्लामी शैली से प्रभावित हैं और इनके साथ ही आर्मेनियाई कब्रिस्तान है जहाँ कब्रें बनी हुई हैं जिनकी बनावट बड़ी नहीं है लेकिन इनपर शिलालेख बने हैं। ये सभी संरक्षित ऐतिहासिक स्मारक हैं और इस क्षेत्र में फोटोग्राफी करना मना है।

सस्पेंशन ब्रिज, मोरबी

सस्पेंशन ब्रिज, मोरबी

मोरबी आने पर झूला पुल या सस्पेंशन ब्रिज की सैर अवश्‍य करें। यह पुल, एक आश्‍चर्य कर देने वाली संरचना है जिसे देखकर, विक्‍टोरियन लंदन की याद आ जाती है। गुजरात आने पर उसे जरूर देखें। यह खास मोरबी में ही बना हुआ है।

गिर राष्ट्रीय उद्यान

गिर राष्ट्रीय उद्यान

गिर वन्यजीव अभ्यारण्य भारत के गुजरात राज्य में लगभग 1424 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। इस वन्य अभ्यारण्य में अधिसंख्‍य मात्रा में पुष्प और जीव-जन्तुओं की प्रजातियां मिलती है। यहां स्तनधारियों की 30 प्रजातियां, सरीसृप वर्ग की 20 प्रजातियां और कीडों- मकोडों तथा पक्षियों की भी बहुत सी प्रजातियां पाई जाती है। दक्षिणी अफ्रीका के अलावा विश्‍व का यही ऐसा एकलौता स्थान है जहां शेरों को अपने प्राकृतिक आवास में रहते हुए देखा जा सकता है। जंगल के शेर के लिए अंतिम आश्रय के रूप में गिर का जंगल, भारत के महत्वपूर्ण वन्य अभ्यारण्यों में से एक है। गिर के जंगल को सन् 1969 में वन्य जीव अभ्यारण्य बनाया गया और 6 वर्षों बाद इसका 140.4 वर्ग किलोमीटर में विस्तार करके इसे राष्ट्रीय उद्यान के रूप में स्थापित कर दिया गया।

लोथल, अहमदाबाद

लोथल, अहमदाबाद

लोथल एक ऐसा स्‍थान है जहां हड़प्‍पा सथ्‍यता के अवशेष आज भी पाएं जाते है। लोथल का अर्थ होता है - '' मृतकों की माउंड '' और यह स्‍थल, शहर की वास्‍तुकला योजना और परिशुद्धता के बारे में एक महान अंर्तदृष्टि प्रदान करता है। आज भी राज्‍य में खंडहर के रूप में, लोथल, प्राचीन समाज और संरचना, अर्थव्‍यवस्‍था को दर्शाता है जो कई सालों पहले यहां बसती थी। इसके अलावा, यहां कला और शिल्‍प भी पाएं जाते है जो कई बार यहां आई बाढ़ से प्रभावित हुए है और फिर भी आज तक विरासत के रूप में मौजूद में है।

चंपानेर

चंपानेर

चंपानेर की स्थापना चावड़ा वंश के राजा वनराज चावड़ा ने की थी। उनके एक मंत्री का नाम चंपाराज था, जिसके नाम पर इस जगह का नामकरण हुआ। कुछ लोगों का मानना है कि चंपानेर नाम ‘चंपक' फूल के कारण पड़ा है, क्योंकि इस क्षेत्र के पाए जाने वाले आग के चट्टानों में भी फूलों की तरह ही पीलापन देखने को मिलता है। चंपानेर के ठीक ऊपर बने पावागढ़ किले को खिची चौहान राजपूतों द्वारा बनवाया गया था।

सोमनाथ

सोमनाथ

सोमनाथ मंदिर ज्योतिर्लिंग के लिए प्रसिद्ध है। ये पूरे भारत के हिंदूओं के बीच पवित्र और पूजनीय माना जाता है। मुख्य महादेव मंदिर के अलावा सोमनाथ में सूर्य मंदिर भी है। इस मंदिर का निर्माण 14वीं शताब्दी में किया गया था और इसमें दो अनुषंगिकों के साथ भगवान सूर्य की प्रतिमा रखी हुई है। ऐसा माना जाता है कि मुख्य मंदिर को स्वंय चंद्रदेव सोम ने सोने से बनवाया था, क्योंकि वह दक्ष प्रजापति के श्रप से मुक्ति पाना चाहता था। इसके बाद इसे सूर्य देवता ने चांदी से और फिर श्री कृष्ण ने इसे लकड़ी से बनवाया। 11वीं शताब्दी में सोलंकी राजपूत ने चलुकयान शैली में पत्थर से एक नए मंदिर का निर्माण करवाया, जिसका शिखर 50 मीटर ऊंचा था।

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