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रहस्य पड़ताल : पाताल से जुड़ा कुआं बना वैज्ञानिकों के लिए बड़ी चुनौती

By Nripendra Balmiki

जल संचित हेतु बनाए जाने वाले कुओं का इतिहास काफी पुराना है। पीने योग्य जल की उपलब्धता के साथ इनका इस्तेमाल सिंचाई के लिए भी किया जाता रहा है। लेकिन क्या इन्हें बनाने का उद्देश्य मात्र जल संचित करना ही था ? या फिर इन प्राचीन जलाशयों का इस्तेमाल किसी और काम के लिए भी किया जाता था?
इन सवालों से हमारा तात्पर्य आपको यह बताना है कि प्राचीन काल के दौरान अधिकांश संरचनाओं को कई गुप्त उद्देश्यों को पूरा करने के लिए भी बनवाया जाता था। जिसमें से एक की चर्चा आज हम इस लेख के माध्यम से करेंगे। आज हमारे साथ जानिए अशोक काल के दौरान बनाए गए एक रहस्यमय कुएं के बारे में, जिससे जुड़े हैं कई अनसुलझे रहस्य। 

अशोक के काल का रहस्यमयी कुंआ

अशोक के काल का रहस्यमयी कुंआ

PC- Aavindraa

यह रहस्यमयी कुआं मौजूद है बिहार राज्य के पटना शहर में, जिसका निर्माण सम्राट अशोक के काल के दौरान करवाया गया था। इस कुएं का नाम है 'अगम कुआं'। पुरातत्व विभाग की पड़ताल के बाद इस कुएं के विषय में जो भी पता चला वो काफी चौका देने वाला था। आज की तुलना में उस दौरान 20 फीट की खुदाई पर ही पानी निकल आता था, लेकिन इस कुएं की गहराई 105 फीट बताई जाती है।

आखिर इतने गहरे कुएं की खुदाई के पीछे क्या कारण रहा होगा? बहुतों का मानना है कि इसमें सम्राट अशोक का गुप्त खजाना रखा जाता था।

कुएं की अनकही बातें

कुएं की अनकही बातें

बिहार के इस प्राचीन कुएं से कई अनोखी बातें जुड़ी हैं जो इस कुएं को रहस्यमयी बनाने का काम करती हैं। कहा जाता है कि सम्राट अशोक ने अपने 99 भाइयों को मारकर इसी कुएं में फिकवां दिया था। जबकि बहुतों का मानना है कि यह कुआं सम्राट अशोक के गुप्त खजाने को रखने के लिए इस्तेमाल किया जाता था।

हालांकि इस कुएं की असल सच्चाई अभी भी एक रहस्य बनी हुई है। इन सबसे अगल इस रहस्यमयी कुएं की एक बात सबके कान खड़े कर देती है। कि यह कुआं कभी नहीं सूखता। आगे जानिए इस कुएं से जुड़ी और भी कई अनोखी बातों को।

नहीं सूखता कुएं का पानी

नहीं सूखता कुएं का पानी

कहा जाता है कि इस प्राचीन कुएं का पानी कभी नहीं सूखता और बाढ़ आने पर भी जलस्तर समान बना रहता है। हालांकि इस कुएं की वैज्ञानिक जांच से भी कुछ निकलकर सामने नहीं आया। पुरातात्विक सर्वेक्षण के अनुसार इस कुएं का निर्माण 273-232 ईस्वी में कराया गया था। कहा जाता है कि इस कुएं का पानी रंग भी बदलता है।

कहत हैं कि कई समय तक भी पुरातत्व विभाग इस कुएं की गहराई नाप न सका लेकिन काफी मशक्कत के बाद विभाग इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि इस कुएं की गहराई 105 फीट हो सकती है।

कुएं का गुप्त तहखाना

कुएं का गुप्त तहखाना

PC- Photo Dharma

बता दें कि इस कुएं के नाम 'अगम' का शाब्दिक अर्थ है पाताल, यानी पाताल से जुड़ा हुआ कुआं। कहा जाता है कि इस कुएं के अंदर और भी कई कुएं मौजूद हैं, 9 श्रृंखलाबद्ध और बाद में छोटे-छोटे कुएं। जानकारों का मानना है कि कुएं के सबसे अंत में एक गुप्त तहखाना है जहां सम्राट अशोक का खजाना गढ़ा है।

कहा जाता है इस तहखाने से कई गुप्त सुरंगे बाहर की और जाती थीं। हालांकि इस बात में कितनी सच्चाई है इस विषय में कोई सटीक प्रमाण नहीं मिलता।

इसलिए नहीं सूखता कुआं

इसलिए नहीं सूखता कुआं

PC- Ramakrishna Math

कहा जाता है कि यह कुआं गंगा के अंतिम छोर गंगासागर से जुड़ा है, इसलिए यह कुआं कभी नहीं सूखता है। इस बात के पीछे यह तर्क दिया जाता है कि एक बार किसी अंग्रेज की छड़ी बंगाल के गंगा सागर में गिर गई थी, जो बाद में इस कुएं से निकाली गई। छड़ी गंगासागर से होते हुए पाटलीपुत्र पहुंची और कुएं के पानी पर तैरती नजर आई। कहा जाता है कि आज भी वो छड़ी कोलकाता के एक म्यूजियम में रखी हुई है।

99 लाशों का रहस्य

99 लाशों का रहस्य

इस कुएं को लेकर जानकारों का यह भी मानना है कि सम्राट अशोक ने सत्ता हासिल करने के लिए अपने 99 भाइयों को मारकर इसी कुएं में डलवा दिया था। इस कुएं का जिक्र अशोक काल के दौरान आए एक चीनी यात्रि ने अपनी पुस्तक में किया है, जिसमें कहा गया है कि अशोक अपने दुश्मनों को की हत्या कर इसी कुएं में डलवा दिया करता था।

हालांकि इस बात को लेकर भी एक भ्रम है क्योंकि अशोक की गिनती भारत के महान सम्राटों में किया जाती है। इसलिए इस विषय में भी कोई सटीक प्रमाण नहीं मिलता।

किसने ढूंढ़ा इस कुएं को

किसने ढूंढ़ा इस कुएं को

इस रहस्यमयी कुएं की खोज का श्रेय ब्रिटिश खोजकर्ता लौरेंस वाडेल को जाता है। खोजकर्ता वाडेल ने इस बात का उल्लेख किया है कि उस समय जब भी कोई धनी मुस्लिम व्यक्ति पाटलीपुत्र आया करता था तो वह इस कुएं में सोने-चांदी के सिक्के डालता था। इसके अलावा डकैत भी अपना काम में सफलता पाने के बाद इस कुएं में कुछ डाला करते थे। माना जाता है कि जब इस कुएं की खोज की गई तो आसपास कई मूर्तियां मौजूद थीं।

धार्मिक महत्व

धार्मिक महत्व

इन सबसे से अलग अगम कुएं का अपना धार्मिक महत्व भी है। कुएं के पास मां शीतला का मंदिर स्थापित है। धार्मिक मान्यता के अनुसार कुएं की पूजा के बाद ही मां शीतला की पूजा की जाती है। यहां रोजाना कई भक्त मां शीतला के दर्शन के लिए आते हैं। इस कुएं में भक्तों द्वारा चढ़ावा भी चढ़ाया जाता है। कहा जाता है कि इस कुएं का जल शरीर के कई वीकारों को दूर करता है।
साथ ही इस पवित्र जल से स्नान के बाद संतान की प्राप्ति भी होती है। खासकर शीतला माता की पूजा के लिए इस कुएं के जल का प्रयोग किया जाता है। क्योंकि मान्यता के अनुसार यह कुआं गंगासागर से जुड़ा है। इसलिए गंगा की ही तरह इस कुएं की पूजा की जाती है।

कैसे करें प्रवेश

कैसे करें प्रवेश

PC- Bijay chaurasia

अगम कुआं बिहार के पटना शहर में है। जहां आप तीनों मार्गों के द्वारा आसानी से पहुंच सकते हैं। रेल मार्ग के लिए आप पटना जंक्शन और हवाई मार्ग के लिए आप पटना एयरपोर्ट का सहारा ले सकते हैं। इसके अलावा आप यहां सड़क मार्गों के द्वारा भी पहुंच सकते हैं। बेहतर सड़क मार्गों द्वारा पटना कई बड़े शहरों से जुड़ा हुआ है।

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