सफेद रंग की एक इमारत जिसे बनने में लग गये 100 सालों से भी अधिक का वक्त। अब दे रही है ताजमहल को टक्कर। आगरा में स्थित इस इमारत का निर्माण सफेद रंग के संगमरमर से ही किया गया है, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में इन दिनों पर्यटक पहुंच रहे हैं।
पर्यटक अक्सर इस इमारत की तुलना ताजमहल से भी करने लगते हैं। इतनी देर से हम जिस इमारत की बात कर रहे हैं वह राधा स्वामी बाग में स्थित समाधि, जिसे पूरी तरह से बनने में 100 सालों से भी अधिक का समय लग गया है।
आगरा घूमने जाने वाले पर्यटकों की मस्ट वीजिट लिस्ट में ताजमहल को टक्कर देते बेदाग संगमरमर से निर्मित यह इमारत भी शामिल हो चुकी है। यह इमारत राधास्वामी संप्रदाय के संस्थापक की नवनिर्मित समाधि है, जो ताजमहल से महज 12 किमी की दूरी पर मौजूद है। इसका निर्माण राजस्थान के मकराना मार्बल से किया गया है। ताजमहल के तर्ज पर ही बनी यह सफेद रंग की इमारत इन दिनों पर्यटकों को खूब आकर्षित कर रही है।
ताजमहल, जिसका निर्माण 17वीं शताब्दी के कुशल कारीगरों ने किया था, को बनने में 22 सालों का समय लगा था। वहीं स्वामी बाग समाधि का निर्माण करने में 100 सालों से भी ज्यादा का समय लग गया। इस समाधि का निर्माण धर्म व आस्था को बढ़ावा देने वाला बताया जाता है। राधास्वामी मत के अनुयायी पूरी दुनिया में फैले हुए हैं। बताया जाता है कि वसंत पंचमी के दिन आगरा में सभी एकत्रित होते हैं और इस मौके पर बड़ा भंडारा भी होता है। जिसके लिए पूरे इलाके को सजाया जाता है।

ताजमहल की तरह ही 193 फुट ऊंची इस विशाल संरचना की नींव 52 कुंओं पर रखी गयी है। भारत के सबसे महत्वकांक्षी निर्माणों में से एक इस समाधि को राजस्थान के मकराना में मिलने वाले सफेद संगमरमर के पत्थरों से तैयार किया गया है। हर दिन बड़ी संख्या में इस समाधि को देखने के लिए पर्यटक यहां पहुंच रहे हैं। यह समाधि राधास्वामी संप्रदाय के संस्थापक स्वामीजी महाराज को समर्पित है।
बताया जाता है कि इस समाधि के निर्माण में अभी भी कुछ काम बाकी है। निर्माण कार्य देख रहे एक अधिकारी ने बताया कि आधुनिक युग में हमारे पास बड़े और अत्याधुनिक मशीनें और लिस्टर्स आदि हैं, जिनकी तकनीकों का इस्तेमाल कर इस समाधि का निर्माण कार्य जल्द से जल्द पूरा किया जा रहा है।
कहां है राधा स्वामी समाधि

यह समाधि आगरा के दयालबाग क्षेत्र में स्थित स्वामी बाग कॉलोनी में मौजूद है। यहां प्रवेश तो निःशुल्क है लेकिन फोटोग्राफी की अनुमति नहीं है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो इस समाधि के निर्माण में अब तक 400 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। बताया जाता है कि इस समाधि का निर्माण वर्ष 1904 में शुरू हुआ था। उस समय जो मजदूर काम करने आये थे, उनकी ही चौथी पीढ़ी वर्तमान में इस समाधि का निर्माण कर रही है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार राधास्वामी समाधि जिस जमीन पर खड़ा है, किसी जमाने में वह रेतीली हुआ करती थी। 1200 एकड़ में फैला दयालबाग और स्वामीबाग पहले रेत का टीला था। राधास्वामी मत के अनुयायियों ने इसे हरे-भरे क्षेत्र में बदल दिया।
कैसी है वास्तुकला
इस समाधि स्थल को मकराना के सफेद संगमरमर से बनाया गया है लेकिन प्रवेश द्वार पूरी तरह से लाल पत्थरों से निर्मित है। राधास्वामी समाधि की नक्काशी और खूबसूरती देखने लायक है। मंदिर में लगे पत्थरों को मजदूर हाथों से तराश रहे हैं। समाधि में शीतलता और सौम्य वातावरण बनाए रखने के लिए वैसे ही रंगों का चुनाव किया गया है। समाधि के ठीक ऊपर गुंबद है, जिसे तैयार करने में कई सालों का समय लग गया था। इस गुम्बद पर 15 किलो सोने की परत और 140 किलो सोने से नक्काशी किया गया कलश लगाया गया है।

52 कुंओं की नींव पर यह इमारत टिकी हुई है। पत्थरों को 60 फीट गहराई वाले कुंओं में डालकर स्तंभ बनाए गये हैं। समाधि के मुख्य द्वार के सामने भी एक कुआँ है, जिसके पानी को प्रसाद के रुप में ग्रहण किया जाता है। पूरी समाधि में की गयी हर एक नक्काशी को देखकर आंखें खुली की खुली रह जाएंगी। संगमरमर के जोड़ों को ढंकने के लिए उनपर भी खूबसूरती से बेल-बुटे और फूलों की नक्काशी की गयी है।
निर्माण में 5 प्रकार के पत्थरों का हुआ इस्तेमाल

- सफेद और गुलाबी रंग का संगमरमर राजस्थान के मकराना से मंगाया गया।
- हरे रंग का संगमरमर गुजरात के वडोदरा से मंगवाया गया।
- राजस्थान के पाली और जैसलमेर से अबरी संगमरमर आया।
- मध्य प्रदेश के ग्वालियर से दारचीनी पत्थर लाया गया।
- गुजरात और दक्षिण भारत से पच्चीकारी और जड़ाई के लिए कीमती पत्थर अकीक, मरगज, सिमाक, रतक, गवा, बिल्लौर, लाजवर्द, गौरी, पितोनिया, डूंगासरा, यशब आदि लाया गया।



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