अपनी नैसर्गिक सुंदरता, एडवेंचर खेलों, ऊंची ऊंची पहाड़ियों, हरे भरे वनों और प्रचुर वन्य जीवन के चलते उत्तर भारत में स्थित कुमाऊं क्षेत्र ने हमेशा से ही देश के अलावा विदेशों से भी आने वाले पर्यटकों का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित किया है। आज यहां जहां एक तरफ विश्व के सबसे खूबसूरत हिल स्टेशन हैं तो वहीँ दूसरी तरफ यहां एक से बढ़कर एक बर्फ़ से ढंकी खूबसूरत पर्वत श्रृंखलाएं भी हैं। Read : विश्व का इकलौता मंदिर जहां 10 अलग रूपों में विराजें हैं भगवान विष्णु
यूं तो कुमाऊं क्षेत्र में कई खूबसूरत हिल स्टेशन हैं लेकिन आज अपने इस लेख में हम आपको जिस हिल स्टेशन से अवगत करा रहे हैं वो अपने आप में बेमिसाल और उसकी यात्रा स्वर्ग सरीखी है। जी हां हम बात कर रहे हैं उत्तराखंड के सबसे बेहतरीन हिल स्टेशनों में शुमार अल्मोड़ा की। सुयाल और कोसी नदी के बीच 5 किमी लंबी घोड़े की पीठ के आकर की पहाड़ी पर बसा अल्मोड़ा कुमाऊं क्षेत्र का बेहद चर्चित हिल स्टेशन है। Read : मंदिर जहां 1857 अंग्रेज परोसते थे शराब और कॉफी
हरे भरे सुंदर जंगलों से घिरा यह शहर समुद्र तल से 1651 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहां चंद वंश और कत्यूरी वंश ने 15वीं और 16वीं शताब्दी में शासन किया था। अल्मोड़ा की पहाड़ियों से पर्यटक हिमालय की बर्फ से ढंकी चोटियों का विहंगम नजारा देख सकते हैं। इस जगह की कई ऐसी खासियत है, जिससे विश्व भर के पर्यटक इनकी ओर खिंचे चले आते हैं। तो आइये इस आर्टिकल के जरिये जानें अल्मोड़ा में क्या क्या देख सकते हैं आप

कैसे जाएं अल्मोड़ा
अल्मोड़ा आने के लिए निकटतम रेलवे स्टेशन काठगोदाम है जो देश के सभी प्रमुख शहरों से ट्रेन के माध्यम से जुड़ा है| काठगोदाम आकर आप टैक्सी ले सकते हैं जो आपको अल्मोड़ा तक ले जायगी| वायु मार्ग द्वारा भी अल्मोड़ा जाया जा सकता है. पंतनगर हवाई अड्डा अल्मोड़ा का निकटतम हवाई अड्डा है जो अल्मोड़ा से 108 किलोमीटर दूर है| बस के माध्यम से भी आप यहां आसानी से पहुँच सकते हैं|

बिनसर
अल्मोड़ा जिले में स्थित बिनसर एक पर्यटन स्थल के रूप में काफी लोकिप्रय है। भगवान शिव को बिनसर देव के नाम से भी जाना जाता है और उन्हीं के नाम पर इस जगह का नामकरण हुआ है। हिमालय पर्वतमालाओं की पृष्ठभूमि में बसा बिसनर कभी गर्मियों में चंद राजाओं की राजधानी हुआ करता था।कुमाऊं क्षेत्र का सबसे ऊंचा हिल स्टेशन बिसनर झंडीढर पहाड़ियों पर समुद्र तल से 2400 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। पास में ही भगवान शिव का एक मंदिर है। इसके अलावा यहां से हिमालय की केदारनाथ, शिविलंग, त्रिशूल और नंदा देवी चोटियों का नयनिभराम दृश्य देखने को मिलता है।

बिनसर वन्यजीव अभयारण्य
45.59 वर्ग किमी में फैला बिनसर वन्यजीव अभयारण्य यहां का प्रमुख पर्यटन स्थल है। अल्मोड़ा शहर से 30 किमी में बना यह अभयारण्य समुद्र तल से 900 मीटर से लेकर 2500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह जगह तेंदुआ, कस्तूरी मृग, जंगली बिल्ली, चितराला, लोमड़ी, लंगूर, बंदर, साही, उड़ने वाली गिलहरी, भौंकने जैसी आवाज निकालने वाले हिरन के अलावा कई जीवों के लिए प्राकृतिक आवास की तरह है। बर्ड लाइफ इंटरनेशन द्वारा इस अभयारण्य को एक महत्वपूर्ण बर्ड एरिया घोषित किया गया है। यहां 200 से अधिक प्रजाति की पक्षियां हैं।

ब्राइट एंड कॉर्नर
राइट एंड कॉर्नर से सूर्योदय, सूर्यास्त और चांद के निकलने का जादुई नजारा देखा जा सकता है। अल्मोड़ा से 2 किमी दूर स्थित यह जगह बेहद चर्चित पर्यटन स्थल है। यहां से बर्फ से ढकी चोटियों के पीछे से सूरज को निकलते और फिर बर्फीली चोटियों के आगोश में सूरज को समाते देखना जिन्दगी में कभी न भूलने वाला अनुभव साबित होता है। इस जगह का नामकरण राजा ब्राइटन के नाम पर किया गया है और यहां से ही माल रोड की शुरुआत होती है।

चित्तई मंदिर
चैती मंदिर के नाम से प्रसिद्ध चित्तई मंदिर अल्मोड़ा से 6 किमी दूर है। यह मंदिर कुमाऊं क्षेत्र के पौराणकि भगवान और शिव के अवतार गोलू देवता को समिर्पत है। ऐसी मान्यता है की इस मंदिर का निर्माण चंद वंश के एक सेनापति ने 12वीं शताब्दी में करवाया था। पहाड़ी पर बसा यह मंदिर चीड़ और मिमोसा के घने जंगलों से घिरा हुआ है। हर साल भारी संख्या में श्रद्धालु यहां पूजा अर्चना करने के लिए आते हैं। जिन लोगों को अदालत से न्याय नहीं मिलता है, वो अपने अदालती दस्तावेज को इस मंदिर की दीवार पर चिपका कर भगवान से न्याय की गुहार लगते हैं। जिनकी मनोकामना पूरी हो जाती है वे यहां बकरे की बलि चढ़ाते हैं। चित्तई मंदिर तक पहुंचने के लिए पर्यटक बस या टैक्सी का सहारा ले सकते हैं।

हिरन पार्क
अल्मोड़ा से 3 किमी दूर नारायण तिवारी देवाई (एनटीडी) में स्थित हिरन पार्क की ओर भी पर्यटक खूब आकर्षित होते हैं। घने हरे देवदार के पेड़ों से घिरी यह जगह कई जीव जंतुओं के लिए प्राकृतिक आवास है। यहां हिरन, तेंदुआ और हिमालय के काले भालू बखूबी देखे जा सकते हैं। फुर्सत के पलों में शाम के समय यहां घूमना दिल को सकून पहुंचाने वाला होता है।

लाल बाजार
शॉपिंग की दृष्टि से लाल बाजार अल्मोड़ा का सबसे पसंदीदा स्थान है। यहां कई किस्म की स्वादिष्ट मिठाइयों के अलावा तांबे और पीतल से बनी चीजें उचित मूल्यों पर मिलती हैं। खरगोश के बाल से बने ऊनी कपड़े यहां का मुख्य आकर्षण हैं। यह कपड़े काफी मुलायम और गर्म होते हैं और खरगोश की एक ख़ास नस्ल से बनाई जाती है। धातु के बर्तन और सजावट के सामान भी यहां खूब मिलते हैं।

नंदा देवी मंदिर
कुमाऊं क्षेत्र के पवित्र स्थलों में से एक नंदा देवी मंदिर का विशेष धार्मिक महत्व है। इस मंदिर का इतिहास 1000 साल से भी ज्यादा पुराना है। कुमाऊंनी शिल्पविधा शैली से निर्मित यह मंदिर चंद वंश की ईष्ट देवी को समिर्पत है। इसका निर्माण शिव मंदिर के बाहरी दलान पर किया गया है। यहां एक मुकुट भी है, जो इसकी ख़ूबसूरती को और भी बढ़ा देता है। इस तीर्थ स्थान की दीवार पर पत्थरों पर उकेरी गई कलाकृतियां बरबस ही हमारा ध्यान खींच लेती हैं। हर साल सितंबर के महीने में यहां नंदा देवी मेल का आयोजन किया जाता है और इस दौरान बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंचते हैं।



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