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इस मंदिर के चमत्कार के आगे पाकिस्तान ने भी टेके थे घुटने

Written By: Goldi

भारत मन्दिरों का देश है...यहां हर मंदिर के चमत्कार की एक अलग ही कहानी है। इसी क्रम में आज मै आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहीं.जिसपर करीबन 450 बम फेंके गये लेकिन वह बम मंदिर का एक बाल भी बांका नहीं कर पाए।

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जी हां,इस मंदिर का नाम है तनोट मंदिर..जोकि जैसलमेर से करीब 130 किलो मीटर दूर भारत - पाकिस्तान बॉर्डर के निकट स्थित है। यह मंदिर लगभग 1200 साल पुराना है। वैसे तो यह मंदिर सदैव ही आस्था का केंद्र रहा है पर 1965 कि भारत - पाकिस्तान लड़ाई के बाद यह मंदिर देश - विदेश में अपने चमत्कारों के लिए प्रसिद्ध हो गया। 1965 कि लड़ाई में पाकिस्तानी सेना कि तरफ से गिराए गए करीब 3000 बम भी इस मंदिर पर खरोच तक नहीं ला सके।

Tanot Mata Temple jaisalmer hindi

PC: Manjupal

मंदिर को अकेले निशाना बनकर 450 गोले दागे गए | लेकिन चमत्कारिक रूप से एक भी गोला मंदिर को अपना निशाना नहीं बना सका और मंदिर के आसपास गिर गया और नहीं फटा | मंदिर को एक खरोंच भी नहीं आई और मंदिर आज भी ज्यों का त्यों खड़ा हुआ है। ये बम अब मंदिर परिसर में बने एक संग्रहालय में भक्तो के दर्शन के लिए रखे हुए है।' ये मंदिर भारत ही नहीं बल्कि पाकिस्तानी सेना के लिये भी आस्था का केन्द्र बना हुआ है।

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राजस्थान के जैसलमेर क्षेत्र में पाकिस्तानी सेना को परास्त करने में तनोट माता की भूमिका बड़ी अहम मानी जाती है। यहां तक मान्यता है कि माता ने सैनिकों की मदद की और पाकिस्तानी सेना को पीछे हटना पड़ा।इस घटना की याद में तनोट माता मंदिर के संग्रहालय में आज भी पाकिस्तान द्वारा दागे गये जीवित बम रखे हुए हैं।

Tanot Mata Temple jaisalmer

शत्रु ने तीन अलग-अलग दिशाओं से तनोट पर भारी आक्रमण किया। दुश्मन के तोपखाने जबरदस्त आग उगलते रहे। तनोट की रक्षा के लिए मेजर जय सिंह की कमांड में ग्रेनेडियर की एक कंपनी और सीमा सुरक्षा बल की दो कंपनियां दुश्मन की पूरी ब्रिगेड का सामना कर रही थीं। 1965 की लड़ाई में पाकिस्तानी सेना कि तरफ से गिराए गए करीब 3000 बम भी इस मंदिर पर खरोच तक नहीं ला सके।

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माता का मंदिर जो अब तक सुरक्षा बलों का कवच बना रहा, शान्ति होने पर सुरक्षा बल इसका कवच बन गये। मंदिर को बीएसएफ ने अपने नियंत्रण में ले लिया। आज यहां का सारा प्रबन्ध सीमा सुरक्षा बल के हाथों में है। मंदिर के अन्दर ही एक संग्रहालय है जिसमें वे गोले भी रखे हुए हैं। पुजारी भी सैनिक ही है।

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लोंगेवाला की विजय के बाद, मंदिर परिशर में एक विजय स्तंभ बनाया गया है | जहां हर साल 16 दिसंबर को सेनिको की याद में त्यौहार मनाया जाता है। तनोट माता को आवड माता के नाम से भी जाना जाता है तथा यह हिंगलाज माता का ही एक रूप है। हिंगलाज माता का शक्तिपीठ पाकिस्तान के बलूचिस्तान में है। हर वर्ष आश्विन और चै‍त्र नवरात्र में यहाँ विशाल मेले का आयोजन किया जाता है। प्रतिदिन बढ़ती प्रसिद्धि के कारण तनोट अब एक टूरिज्म स्पॉट की तरह उबर रहा है।

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