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जरूर देखें पलक्‍कड़ के ये प्राचीन मंदिर

पलक्‍कड़ के प्राचीन मंदिरों के बारे में पढ़ें।

By Namrata Shatsri

पलक्‍कड़ एक पत्तेदार भूमि है जो पहाड़ों और ऊष्‍णकटिबंधीय जंगल से घिरा हुआ है। यहां पर कई नदियां बहती हैं और दुर्लभ पक्षी और पशु भी पाए जाते हैं। इस खूबसूरत जगह पर कई ऐसी जगहें हैं जहां आपको केरल के उमस भरे मौसम से राहत मिलेगी।

हरियाली से भरे पलक्‍कड़ में कई ऐतिहासिक स्‍थल और प्राचीन मंदिर हैं जो राज्‍य के पर्यटकों को यहां आने के लिए आकर्षित करते हैं। ये प्राचीन मंदिर पहाड़ों से और घाटियों से घिरे हैं और दुनियाभर से श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं। तो चलिए जानते हैं पलक्‍कड़ के कुछ प्राचीन मंदिरों के बारे में जिनके दर्शन जरूर करने चाहिए।

कलपाथी मंदिर

कलपाथी मंदिर

पलक्‍कड़ में स्थित कलपाथी मंदिर विशेष महत्‍व रखता है। श्री विशालाक्षी सामेथा श्री विश्‍वनाथ स्‍वामी मंदिर अपने अनूठे वास्‍तुकला और डिज़ाइन के लिए मशहूर है। इस मंदिर को यहां पर आयोजित होने वाले वार्षिक रथ उत्‍सव के लिए भी जाना जाता है। देशभर से लोग इस रथ उत्‍सव को देखने यहां आते हैं।

कलपाथी, केरल राज्‍य का एकमात्र हेरिटेज विलेज है और इसे यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल के रूप में प्रस्तावित किया गया है। इसके अलावा इस मंदिर में पलक्‍कड़ के ब्राह्मणों की संस्‍कृति, त्‍योहार और खानपान का आनंद ले सकते हैं।

श्री ईमूर भगवती मंदिर, कल्‍लेकुलांग्‍रा

श्री ईमूर भगवती मंदिर, कल्‍लेकुलांग्‍रा

श्री ईमूर भगवती मंदिर को हेमामबिका मंदिर के नाम से भी लोकप्रिय है। ये खूबसूरत मंदिर देवी हेमामबिका को समर्पित है। मान्‍यता है कि देवी हेमामबिका इस शर्त पर अपन भक्‍तों को दर्शन देती हैं कि वो उनकी उपस्थिति के बारे में किसी को नहीं बताएंगें।

किवदंती है कि एक बार देवी ने अपने भक्‍तों से पहले तालाब के पास उपस्थित होने का निर्णय किया। उस समय तालाब के पास लोगों की भीड़ इकट्ठा हो गई और देवी को अंतर्ध्‍यान होना पड़ा। उस समय लोगों को स्‍तुति करते हुए दो हाथ दिखाई दिए। तब भीड़ में से एक व्‍यक्‍ति ने तालाब में छलांग लगाकर उन दो हाथों को पकड़ लिया और तभी वह दो हाथ पत्‍थर में परिवर्तित हो गए। आज भी उसी रूप में इस मंदिर में देवी की पूजा की जाती है।

पन्नियूर श्री वाराहमूर्ति मंदिर, कुंबिदी

पन्नियूर श्री वाराहमूर्ति मंदिर, कुंबिदी

इस क्षेत्र का सबसे प्राचीन मंदिर माना जाता है पन्नियूर श्री वाराहमूर्ति मंदिर। मान्‍यता है कि 4000 साल पहले परशुराम जी द्वारा स्‍थापित मंदिरों में से यह प्रथम मंदिर है। इस मंदिर के दर्शन करने बड़ी संख्‍या में श्रद्धालु और इतिहासकार आते हैं।

ये मंदिर पेरुमथाछन बढ़ई के काफी नज़दीक स्थित है और कहा जाता है कि अपने पुत्र की मृत्‍यु के बाद उसका मानसिक रूप से बहुत तनाव में रहता था। वह कुंबिदी आया और यहां पर उसने इस प्राचीन मंदिर के पुर्नरूत्‍थान के कार्य में कारीगरों की मदद की।

श्री अयप्‍पन कावू मंदिर, चेरूपुलास्‍सेरी

श्री अयप्‍पन कावू मंदिर, चेरूपुलास्‍सेरी

हज़ार वर्षों से भी अधिक प्राचीन ये मंदिर इतिहास की किताबों में अत्‍यंत महत्‍व रखता है। इस मंदिर को मालाबार सबरीमाला के नाम से जाना जाता है और ये पलक्‍कड़ के प्रमुख अयप्‍पा मंदिरों में से एक है।

प्रमुख देवता अयप्‍पा के अलावा मंदिर में कई अन्‍य देवी-देवताओं की मूर्तियां जैसे गणपति, नवग्रह, ब्रह राक्षस और नागराज आदि भी भी मूर्तियां स्‍थापित हैं। सबरीमाला तीर्थस्‍थल काल के दौरान इस मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रहती है और यहां देशभर से श्रद्धालु दर्शन करने के लिए आते हैं।pc:Abhilash Pattathil

श्री रामापुरम विष्‍णु मंदिर, वदाक्‍कांथारा

श्री रामापुरम विष्‍णु मंदिर, वदाक्‍कांथारा

केरल के प्रसिद्ध प्राचीन मंदिरों में से एक है श्री रामापुरम विष्‍णु मंदिर। इसे 600 साल पहले रामापुरम वरिआथ परिवार द्वारा बनवाया गया था। इस मंदिर का प्रमुख आकर्षण है शादाधरा प्रतिष्‍ठा में स्‍थापित देवी की मूर्ति और इसका खुला प्रांगण। ऐसा केरल के मंदिरों में बहुत कम ही देखने को मिलता है।

मंदिर में प्रमुख देवता भगवान विष्‍णु के अलावा महागणपति, धनवंतरि, सपाथमाथरूक्‍कल और अष्‍टदिपालका की मूर्ति स्‍थापित हैं।

Pc: Ramanarayanadatta astri

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