भगवान की विभिन्न मूर्तियों को अलग-अलग तरह की चीजों से सजाने और उनका श्रृंगार होने की बात तो आपने जरूर सुना होगा। कहीं देव-देवियों की मूर्तियों को सोने-चांदी से सजाया जाता है तो कहीं फल व फूलों से भगवान का श्रृंगार किया जाता है। सर्दियों में गर्म कपड़े और गर्मी के मौसम में नर्म कपड़ों से बने परिधानों से भी भगवान को सजते हुए आपने जरूर देखा होगा।

लेकिन क्या कभी आपने किसी भी मंदिर में भगवान की मूर्ति का श्रृंगार खट्टी इमली वाले चावल से करने की बात सुनी है? नहीं न...भगवान वेंकटेश्वर का यह अनोखा श्रृंगार किया गया है आंध्र प्रदेश के कांकिनाडा जिले में। यहां मनाया जा रहा है पवित्र धनुर्मासम त्योहार (Dhanurmasam Festival), जिसमें भगवान वेंकटेश्वर का यह श्रृंगार 150 किलो चावल से किया गया है।

जैसा कि हम सभी जानते हैं, दक्षिण भारतीय राज्यों में इमली के खट्टेपन का इस्तेमाल कई तरह के व्यंजनों को बनाने में किया जाता है। उसी तरह से आंध्र प्रदेश में पके हुए चावल में इमली के खट्टेपन को मिलाकर बनायी जाती है खट्टी इमली चावल जिसे कहा जाता है पुलिहोरा (Pulihora)। 150 किलो इसी पुलिहोरा से आंध्र प्रदेश के कांकिनाडा जिले में टूनी मंडल के अन्नवरम गांव में किया गया है भगवान वेंकटेश्वर का श्रृंगार। यह श्रृंगार पवित्र धनुर्मासम त्योहार के दौरान किया गया है, जो हिंदू कैलेंडर का एक पवित्र व महत्वपूर्ण महीना है।
इस मौके पर बड़ी संख्या में भक्त 'गोविंदा' का जयकारा लगाते हुए मंदिर परिसर में भगवान के अद्भुत श्रृंगार का दर्शन करने पहुंच रहे हैं। मंदिर के पुजारियों ने इस मौके पर विशेष पूजा का आयोजन किया जिसने भगवान के इस दुर्लभ पुलिहोरा अवतार को और भी खास बना दिया। यहां आने वाले श्रद्धालुओं को ऐसा अध्यात्मिक अनुभव हो रहा है, जिसे वे लंबे समय तक याद रखेंगे।

मंदिर कमेटी का कहना है कि पुलिहोरा की सजावट एक विशेष मौके पर किया गया भगवान का श्रृंगार है। यह न सिर्फ भगवान के एक अनोखे अवतार को दर्शाता है बल्कि मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के मन में भी पवित्र भावनाओं को जगाता है। यह भगवान के पूजा में श्रद्धालुओं को डूबने के लिए प्रोत्साहित तो कर ही रहा है, साथ में साधारण साज-सज्जा से अलग भगवान वेंकटेश्वर की साज-सज्जा ने बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को आकर्षित भी किया है।

बता दें, धनुर्मासम के दौरान मंदिर परिसर में पूजा-पाठ और धूप व फूलों की सुगंध फैलती रहती है, जो इस स्थान की पवित्रता और भी बढ़ा देती है। मंदिर के पुजारी का कहना है कि भगवान वेंकटेश्वर की पूजा करने वाला हर भक्त, चाहे वह शारीरिक रूप से मंदिर परिसर में उपस्थित हो अथवा नहीं, उसे इस वार्षिक पूजा व त्योहार के दौरान भगवान वेंकटेश्वर और देवी गोडादेवी का आर्शीवाद जरूर मिलता है।

धनुर्मासम त्योहार के दौरान बड़ी संख्या में भक्त मंदिर में आयोजित होने वाली विशेष पूजाओं में बढ़-चढ़ कर शामिल होते हैं। सिर्फ कांकिनाडा ही नहीं बल्कि आसपास के जिलों व गांवों से भी बड़ी संख्या में भगवान वेंकटेश्वर के भक्त एस. अन्नवरम प्रस्न्न वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में साल में एक बार आयोजित होने वाले इस उत्सव में हिस्सा लेने पहुंचते हैं।



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