सर्दियों में Fresh Snowfall को एंजॉय करने के लिए सैलानी कश्मीर, डलहौजी, मनाली, कुल्लु और शिमला जैसे शहरों का रुख करते हैं। ये सारे शहर उत्तर भारत में मौजूद है लेकिन क्या दक्षिण भारत में भी बर्फबारी का आनंद उठाया जा सकता है? कई बार सुदूर दक्षिण भारत के किसी शहर से ताजी बर्फबारी का लुत्फ उठाने के लिए उत्तर भारत तक आना संभव नहीं हो पाता है। लेकिन आप दक्षिण भारत में भी ताजे बर्फबारी का आनंद उठा सकते हैं।

जी हां, आंध्र प्रदेश में स्थित लाबांसिंगी गांव दक्षिण भारत में एकमात्र ऐसी जगह है जहां तापमान शून्य या उससे भी नीचे पहुंच जाती है।
कहलाता है दक्षिण का कश्मीर
आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम जिले में स्थित लांबासिंगी गांव समुद्रतल से लगभग 1024 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। अपनी ऊंचाई की वजह से ही इस गांव में सर्दियों के दिनों में तापमान शून्य से नीचे पहुंच जाता है। इसी वजह से इस गांव को दक्षिण का 'कश्मीर' कहा जाता है। यहां आमतौर पर तापमान अधिकतम करीब 32° सेल्सियस से न्यूनतम 6° के बीच रहता है और कभी-कभी 0 ° सेल्सियस से भी नीचे चला जाता है।
सर्दियों में घर से बाहर रहे तो जम जाएंगे
सर्दियां जब अपने पूरे शबाब पर होती हैं, तब उत्तर भारत में शीतलहर की खबरें आम होती हैं। इस समय सूरज कई दिनों तक नहीं उगता है। ठीक उसी तरह सर्दियों के मौसम में लांबासिंगी गांव में भी कई दिनों तक सूरज नहीं उगता है। जिस दिन सूर्य के दर्शन मिले, उस दिन सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक ही यहां सूर्य दिखाई देता है, जिस वजह से यहां के स्थानीय आदिवासी समुदाय के लोगों को रोजमर्रा के कामकाज में काफी मुश्किलें भी होती हैं।

यहीं वजह है कि इस गांव को कोर्रा बयालू भी कहा जाता है। स्थानीय भाषा में कोर्रा का मतलब छड़ी और बयालू का मतलब घर से बाहर होता है। यानी सर्दियों में अगर कोई घर से बाहर रहा तो वह जमकर छड़ी की तरह सख्त बन जाएगा।
लांबासिंगी जाने का बेस्ट समय
लांबासिंगी गांव जाने का बेस्ट समय दिसंबर और जनवरी का महीना होता है। इस समय सर्दियां जोड़ों पर होती है और यहां तापमान शून्य के करीब पहुंच जाता है। हालांकि हर साल यहां बर्फबारी नहीं होती लेकिन जब भी होती है, तब दिसंबर से जनवरी के बीच ही होती है। बर्फबारी के अलावा आप यहां धुंध से घिरे पहाड़, हरियाली और शांत वातावरण को जरूर एंजॉय करेंगे। लांबासिंगी आने वाले पर्यटक यहां से कॉफी और काली मिर्च जरूर खरीदते हैं, जो यहां बड़े पैमाने पर उगायी जाती है। हाल के कुछ सालों से यहां सेब भी बड़ी संख्या में उगाए जाते हैं।
विकसित हो रहा है इको टूरिज्म

पिछले कुछ सालों से इस गांव में पर्यटकों के आने-जाने का सिलसिला बढ़ा है। इसलिए यहां छोटे-छोटे होटल तैयार किये जा रहे हैं। इसके अलावा आंध्र प्रदेश टूरिज्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (APTDC) ने भी यहां रिसॉर्ट बनाए हैं, जहां पर्यटकों के लिए काफी अच्छे पैकेज उपलब्ध करवाए जाते हैं। विशाखापत्तनम या आसपास के शहरों में आने वाले पर्यटक यहां कुछ समय के लिए ठहरने और दक्षिण भारत के इस कश्मीर की खुबसूरती को निहारने के लिए आने लगे हैं।
कैसे पहुंचे लांबासिंगी
लांबासिंगी से सबसे नजदीकी एयरपोर्ट विशाखापत्तनम है, जो यहां करीब 107 किमी दूर है। विशाखापत्तनम से लांबासिंगी के लिए सरकारी व प्राईवेट बस सेवा मिल जाएगी जो आपको सीधे लांबासिंगी पहुंचा देंगे। लांबासिंगी में हर साल बर्फबारी नहीं होती है और यहां कब बर्फबारी होगी, इस बात का पता किसी को नहीं रहता है। अगर आपकी किस्मत अच्छी हुई तो संभव है कि दक्षिण भारत के इस गांव में इस साल आपको बर्फबारी का आनंद उठाने का मौका मिल जाए।



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