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कामाख्या से लेकर उमानंद मंदिर तक : ब्रह्मपुत्र नदी के जल मार्ग से जुड़ेंगे 7 मंदिर, जानिए कौन और विशेषताएं!

मंदिरों तक पहुंचने के लिए हमारे देश में कई तरह के परिवहन साधनों का इस्तेमाल किया जाता है। केदारनाथ और अमरनाथ जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में स्थित तीर्थ स्थलों तक जाने के लिए हेलीकॉप्टर और हवाई मार्ग का इस्तेमाल किया जाता है तो वैष्णो देवी आदि में रोपवे या केबल कारों का उपयोग तक भक्त मंदिर तक का सफर तय करते हैं। बनारस में नाव से गंगा के सभी घाटों और गंगा आरती को देखने का भी प्रावधान है।

उसी तर्ज पर अब असम में भी जल मार्ग से 7 प्रसिद्ध मंदिर एक साथ जुड़ने वाले हैं। तीर्थ यात्रियों की पहुंच को आसान बनाने के लिए केंद्रीय पोर्ट, शिपिंग व वाटरवेज मंत्रालय ने असम सरकार को ब्रह्मपुत्र नदी के जलमार्ग से 7 प्रमुख मंदिरों को जोड़ने की परियोजना को हरी झंडी दिखा दी है।

assam kamakhya temple

क्या होगी यह परियोजना और लागत?

केंद्रीय पोर्ट, शिपिंग व वाटरवेज मंत्रालय ने सागरमाला परियोजना के तहत जल मार्ग से 7 प्रमुख मंदिरों को जोड़ने की असम सरकार पहल को हरी झंडी दिखाई है। मिली जानकारी के अनुसार इस परियोजना की कुल लागत करीब ₹645.56 करोड़ होने वाली है, जिसकी मंजूरी भी वित्त मंत्रालय से मिल चुकी है। बता दें, सागरमाला परियोजना का उपयोग कर मुख्य रूप से समुद्री इलाकों में जल मार्ग आदि बनाने का काम किया जाता है।

बताया जाता है कि इस परियोजना के तहत 12 तैरने वाले टर्मिनल बनाए जाएंगे। इसके साथ ही पांडु और जोगीघोपा में 2 मल्टीमॉडल टर्मिनल, बोगीबील और ढुबरी में दो स्थायी टर्मिनल का निर्माण करने की योजना है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य रिवर टूरिज्म को जल मार्ग के माध्यम से बढ़ावा देना है।

कौन से 7 मंदिरों को जोड़ेगा जल मार्ग?

assam guwahati

असर सरकार की इस परियोजना के तहत ब्रह्मपुत्र नदी के जल मार्ग से जिन 7 मंदिरों को जोड़ा जाएगा, उनमें शामिल हैं -
शक्तिपीठ कामाख्या - असम की राजधानी गुवाहाटी में स्थित शक्तिपीठ कामाख्या का मंदिर एक बेहद लोकप्रिय मंदिर है। यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में शामिल है, जहां माता सती के योनि की पूजा की जाती है। यहां होने वाला अंबुबाछी मेला भी काफी प्रसिद्ध है, जिसमें मान्यता है कि देवी कामाख्या की पूजा उनके मासिक धर्म के दौरान की जाती है। इस समय देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु कामाख्या आते हैं।
पंडुनाथ मंदिर - भगवान शिव को समर्पित यह मंदिर काजिरंगा नेशनल पार्क में मौजूद है। इस मंदिर का संबंध महाभारत काल में पांडवों से है।
अश्वक्लांत मंदिर - अपने शानदार परिवेश के लिए मशहूर यह मंदिर भगवान कृष्ण को समर्पित है। मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर में भगवान की मूर्ति की स्थापना स्वयं नारद मुनि ने की थी।
गोविंद मंदिर - तेजपुर दौल में स्थित गोविंद मंदिर भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित एक और मंदिर है, जहां मनाया जाने वाला होली का त्योहार बड़ा ही लोकप्रिय और शानदार होता है।
उमानंद मंदिर - ब्रह्मपुत्र नदी के पिकॉक आईलैंड में स्थित उमानंद मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक मंदिर है।
चक्रेश्वर मंदिर - यह मंदिर भी भगवान शिव को समर्पित एक मंदिर है, जो हाजो में स्थित है। इस मंदिर के आसपास का वातावरण बड़ा ही मनोरम है। मंदिर की ऐतिहासिक मान्यताएं यहां बड़ी संख्या में पर्यटकों को खींचकर लाती है।
औनियाती सात्रा मंदिर - भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित यह एक लोकप्रिय मंदिर है, जो असम के माजुली में स्थित है। बताया जाता है कि इस मंदिर की स्थापना 17वीं शताब्दी में की गयी थी।

इन सभी मंदिरों को ब्रह्मपुत्र नदी के जल मार्ग के माध्यम से एक सूत्र में जोड़ा जाएगा। इन सभी मंदिरों की न सिर्फ धार्मिक मान्यताएं हैं बल्कि इन मंदिरों के आसपास का परिवेश और वातावरण भी बड़ा ही सुन्दर है। इस वजह से ही बड़ी संख्या में पर्यटक और तीर्थ यात्री इन मंदिरों में हर साल आते रहते हैं।

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