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रामलला की मूर्ति बनी है 2 अरब साल पुराने पत्थर को तराशकर, जानिए क्यों कहलाएंगे 'बालक-राम'!

अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर भगवान श्रीराम की मंदिर के भूतल में बने गर्भगृह में रामलला की मनमोहक मुस्कान वाली मूर्ति की स्थापना हो चुकी है। 22 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यजमानी में प्राण-प्रतिष्ठा का अनुष्ठान संपन्न किया गया था। 23 जनवरी यानी मंगलवार से मंदिर के द्वार आम नागरिकों के लिए खोल दिये गये और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ अपने प्रिय रामलला के दर्शन के लिए उमड़ भी रही है।

ram mandir interior

मिली जानकारी के अनुसार मंदिर उद्घाटन के ठीक अगले दिन करीब 5 लाख श्रद्धालुओं ने रामलला के दर्शन किये। वहीं कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के बीच 26 जनवरी को भी मंदिर में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के मुताबिक इस दिन लगभग 3 लाख श्रद्धालुओं ने रामलला के दर्शन किये। 27 जनवरी की सुबह से ही फिर से मंदिर के बाहर रामलला की एक झलक पाने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ रही है।

रामलला की जिस सांवली-सलोनी प्रतिमा के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की इतनी भीड़ उमड़ रही है, क्या आप जानते हैं इस प्रतिमा का निर्माण जिस पत्थर से हुआ है वह कितना पुराना पत्थर है? रामलला की मूर्ति का निर्माण जिस पत्थर से हुआ है, उसने धरती की आधी जिंदगी देखी है। कर्नाटक से लाये गये काले रंग के जिस ग्रेनाइट पत्थर से रामलला की 51 इंच की मूर्ति का निर्माण किया गया है, वह करीब 2.5 अरब साल पुरानी चट्टान है।

क्या है इस चट्टान की खासियत

stone of ramlallas idol

सबसे पहले आपको काले रंग की इस विशेष ग्रेनाइट चट्टान की खासियतों से रू-ब-रू करवा देते हैं। मूर्ति को तराशने के लिए जिस ग्रेनाइट चट्टान का इस्तेमाल प्रसिद्ध मूर्तिकार अरूण योगीराज ने किया है, वह काफी टिकाऊ है। जलवायु परिवर्तन का भी इस मूर्ति पर कोई असर नहीं पड़ेगा। इस मूर्ति की देखभाल कम से कम करने की जरूरत होगी। रॉक एक्सपर्ट्स का मानना है कि जिस पत्थर से रामलला की मूर्ति का निर्माण किया गया है, भारतीय वातावरण में वह पत्थर हजारो सालों तक सुरक्षित रह सकेगी।

जलाभिषेक या किसी भी अन्य प्रकार के अभिषेक का भी इस मूर्ति पर कोई बुरा असर नहीं होगा। मूर्ति न तो पानी सोखती है और न ही कार्बन का इसपर कोई असर होता है। इसका फायदा यह होगा कि गर्भगृह में होने वाली पूजा, जलाभिषेक व हवन आदि का भी इस मूर्ति पर कोई असर नहीं पड़ेगा और सालों-साल यह मूर्ति चमकदार बनी रहेगी।

कैसे बना यह चट्टान और कहां मिला

black stone of ramlallas idol

ग्रेनाइट पत्थरों को सबसे अधिक कठोर चट्टानों की श्रेणी में रखा जाता है। धरती पर मौजूद अधिकांश ग्रेनाइट चट्टानों का निर्माण पिघले हुए लावा से हुआ है, जो पृथ्वी के निर्माण के वक्त मौजूद था। माना जा रहा है कि जिस चट्टान से रामलला की मूर्ति को तराशा गया है वह प्री-कैम्ब्रियन युग का है, जिस युग की शुरुआत करीब 4 अरब साल पहले हुई थी।

इसलिए अनुमान लगाया जा रहा है कि इस चट्टान की आयु कम से कम 2.5 अरब साल होगी। चुंकि वैज्ञानिकों का मानना है कि 4.5 अरब साल पहले पृथ्वी का निर्माण शुरू हुआ था, इसलिए कहा जा सकता है कि इस चट्टान ने धरती के इतिहास का आधा हिस्सा जरूर देखा होगा। मैसूर के एचडी कोटे तालुका में जयापुरा होबली के गुज्जेगौदानपुरा में कृषि भूमि को समतल बनाते समय 78 वर्षीय रामदास को यह काले रंग के ग्रेनाइट की यह कृष्ण शिला मिली थी। इस जगह को इस प्रकार की कृष्ण शिलाएं पायी जाती हैं।

आसमानी नीली रंग की चिकनी सतह वाली बनावट के कारण इस शिला को सोपस्टोन भी कहा जाता है। एक स्थानीय ठेकेदार को जब यह शिला दिखाई गयी तो उन्होंने इसकी गुणवत्ता का आंकलन किया और अपने संपर्कों के माध्यम से अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का ध्यान आकर्षित किया।

रामलला क्यों कहलाएंगे बालक-राम

crowd at ram mandir

22 जनवरी को जब रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा का अनुष्ठा संपन्न किया जा रहा था, उसी समय से रामलला को 'बालक-राम' के नाम से पुकारा जा रहा है। दरअसल, राम मंदिर में भगवान राम की जो मूर्ति स्थापित की गयी है वह 5 साल के एक बालक की मूर्ति है। मूर्ति के चेहरे पर भी किसी 5 साल के बच्चे जैसी मासूमियत ही झलक रही है। इसलिए रामलला को 'बालक-राम' के नाम से पुकारा जा रहा है।

इस बात की जानकारी प्राण-प्रतिष्ठा अनुष्ठान में शामिल काशी के पंडित अरुण दीक्षित ने दी। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि 18 जनवरी को उन्हें इस प्रतिमा की पहली झलक मिली थी। उनका कहना है, "पहली बार जब मैंने मूर्ति देखी, तो मैं रोमांचित हो गया था। मेरे आंखों से आंसू बहने लगे थे। उस समय मैंने जो अनुभव किया उसे शब्दों में बयां नहीं कर सकुंगा।" उन्होंने कहा कि अब वह करीब 50-60 प्राण प्रतिष्ठा का अनुष्ठान करवा चुके हैं, लेकिन रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का अनुष्ठान उनके लिए सबसे आलौकिक रहा है।

बता दें, अयोध्या में राम मंदिर जाने वाले भक्तों के लिए सुविधाएं अब बढ़ा दी गयी है। अयोध्या के एंट्री प्वाएंट साकेत पेट्रोल पंप से लता मंगेशकर चौक और उदया चौराहे से टेढ़ी बाजार तक ई-रिक्शा व ई-बसें चलने लगी हैं। दिव्यांगों, चलने-फिरने में अक्षम व्यक्तियों के वाहनों को मंदिर के पास तक जाने की सुविधा दी जा रही है।

एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और बस स्टैण्ड पर यातायात पुलिस को तैनात किया गया है जो श्रद्धालुओं की मदद कर रहे हैं। इसके साथ ही श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने रामलला की आरती का समय भी जारी किया है। राम मंदिर में सुबह 4 बजे मंगला आरती, 6 बजे उत्थान आरती (श्रृंगार आरती) होगी। 7 बजे से भक्तों को दर्शन मिलना शुरू होगा। दोपहर 12 बजे भोग आरती, शाम 6.30 बजे संध्या आरती और रात 9 बजे रात्रि भोग व 10 बजे शयन आरती होगी।

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