22 जनवरी 2024 को अयोध्या में भव्य राम मंदिर का उद्घाटन होने वाला है। 23 जनवरी से मंदिर के द्वार भक्तों के लिए खोल दिये जाएंगे और श्रद्धालु रामलला के दर्शन कर सकेंगे। इस मंदिर से ठीक 25 किमी दूर ही भारत के सबसे बड़े मस्जिद का निर्माण होने वाला है। यह वहीं जमीन है जिसे उत्तर प्रदेश सरकार ने मुस्लिम पक्ष को मस्जिद निर्माण के लिए दी थी। इस मस्जिद के निर्माण के लिए 29 जुलाई 2020 को इंडो-इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन नाम से एक ट्रस्ट का गठन किया गया है।

होगी भारत की सबसे बड़ी मस्जिद
अयोध्या के धनीपुर में इस मस्जिद का निर्माण किया जाएगा। दावा किया जा रहा है कि यह भारत की सबसे बड़ी मस्जिद होगी। सिर्फ इतना ही नहीं मस्जिद में रखी गयी कुरान का आकार दुनिया में सबसे बड़ा होने वाला है। यहां रखी जाने वाली कुरान की ऊंचाई 21 फीट और चौड़ाई 36 फीट होगी। यह कुरान 18-18 फीट पर खुलेगी। मस्जिद का नाम मोहम्मद पैगंबर के नाम पर 'मोहम्मद बिन अब्दुल्ला' रखा जाएगा। मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के अनुसार यह मस्जिद कुल 11 एकड़ के क्षेत्र में बनेगी, जिसमें से राज्य सरकार ने 5 एकड़ जमीन दान में दी है और बाकी की जमीन मस्जिद विकास समिति ने खरीदी है।
बाबर नहीं गरीब नवाज है आइडल

मस्जिद विकास समिति के चेयरमैन और भाजपा नेता हाजी अराफात शेख का कहना है, "बाबर हमारा आइडल नहीं हो सकता है। वह हमारे देश में तीर और तलवार लेकर आया था। हम गरीब नवाज को मानने वाले लोग हैं।" मस्जिद परिसर में एक कैंसर अस्पताल खोला जाएगा, जहां हर जाति और धर्म के लोगों का इलाज होगा। समिति का दावा है कि इससे देश को हम एकता का संदेश दे सकेंगे। इस मस्जिद में जो खास होगा वो निम्न हैं :-
- मस्जिद परिसर में म्यूजियम, स्कूल, कॉलेज और लाइब्रेरी बनायी जाएगी।
- मस्जिद परिसर में सिर्फ 1 नहीं बल्कि इंजीनियरिंग, मेडिकल, डेंटल जैसे कुल 5 कॉलेज बनाए जाएंगे।
- इस मस्जिद का मुख्य आकर्षण इसका वज़ू खाना होगा। यहां दुबई से भी विशाल आकार का एक्वेरियम बनाया जाएगा।
- मस्जिद में एक पूर्ण वेज किचन भी होगा, जो यहां आने वाले लोगों को मुफ्त में खाना परोसेगा।
- सुबह और शाम के वक्त अजान के समय यहां फव्वारा भी चलाया जाएगा।
कब रखी जाएगी मस्जिद की नींव
अयोध्या में तैयार होने वाली मस्जिद के बारे में दावा किया जा रहा है कि यह देखने में ताजमहल से भी अधिक सुन्दर होने वाला है। हाजी अराफात शेख का कहना है भारत संतो, पीर-फकिरों और साधुओं का देश है, गरीब नवाज का देश है। फरवरी 2024 में रमजान से पहले कोई अच्छा सा दिन देखकर हमारे पीर मस्जिद की नींव रखेंगे। इसके लिए मुंबई से ईंट भेजी जाएगी। बताया जाता है कि अगले 5-6 सालों में यह प्रोजेक्ट पूरी तरह से तैयार हो जाएगा। तैयार होने के बाद यहां सबसे पहला नमाज पढ़ने के लिए मक्का के काबा से इमाम-ए-हरम को बुलाया जाएगा।

इस मस्जिद में हर धर्म के लोगों को प्रवेश करने की अनुमति होगी। मस्जिद विकास कमेटी का कहना है कि इसके निर्माण के लिए सरकार से एक रूपए का दान भी नहीं लिया गया है। मस्जिद ने अपनी वेबसाइट तैयार की है, जिसमें क्यूआर कोड स्कैन कर लोग अपनी इच्छानुसार दान दे सकते हैं। दान देते समय लोगों को यह विकल्प भी दिया जाएगा कि वे मस्जिद या फिर कैंसर अस्पताल किसके निर्माण के लिए अपना योगदान देना चाहते हैं।
बता दें, रामजन्मभूमि पर बने बाबरी मस्जिद और उसके विध्वंस के बाद लंबे समय तक इस भूमि को लेकर कोर्ट में कानूनी लड़ाईयां लड़ी गयी थी। आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने सबूतों के आधार पर अपने फैसले में इसके हिंदूपक्ष द्वारा भगवान राम की जन्मभूमि होने का दावा स्वीकार करते हुए यहां मंदिर निर्माण की अनुमति दे दी थी। साथ ही अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को भी मस्जिद निर्माण के लिए जमीन देने का आदेश दिया था।
इसके बाद ही 5 फरवरी 2019 को अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए 'राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' का गठन किया गया। उसी दिन अयोध्या के रौनाही में धनीपुर गांव में सुन्नी वक्फ बोर्ड को मस्जिद के लिए 5 एकड़ जमीन आवंटित भी की गयी थी।



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