रामलला के आगमन के साथ अयोध्या में पर्यटकों का सैलाब उमड़ पड़ा है। जैसी उम्मीद की जा रही थी, हर दिन लाखों के तादाद में श्रद्धालु राम मंदिर के दर्शन करने पहुंच रहे हैं। इसके साथ ही अयोध्या के अन्य मंदिरों में भी आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ गयी है। इससे पहले हमने अयोध्या के हनुमानगढ़ी और कुबेर टीला के इतिहास के बारे में बताया था। आज हम बात कर रहे हैं अयोध्या के मध्य में स्थित कनक भवन की।

अयोध्या की यात्रा कनक भवन में भगवान राम और माता सीता समेत हनुमान का दर्शन किये बिना पूरी नहीं हो सकती है। कनक भवन को भगवान राम और माता सीता का निजी आवास माना जाता है। यह मंदिर राम जन्मभूमि के उत्तर-पूर्व में स्थित है। यदि आप अयोध्या जाने का प्लान बना रहे हैं, तो अयोध्या के कनक भवन को अपने दर्शनीय स्थलों में जरूर शामिल करें, यह आपको अदभुत अनुभव देगा।
कनक भवन का इतिहास
कनक भवन का निर्माण कब हुआ था, इसके बारे में कोई निश्चित जानकारी नहीं है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार शादी के बाद जब नयी-नवेली दुल्हन बनकर माता सीता अपने ससुराल अयोध्या पहुंची तो माता कैकेयी ने उन्हें मुंह दिखायी में कनक भवन दिया था। कहा जाता है कि उस समय यह भवन पूरी तरह से सोने का बना हुआ था। इसलिए इस भवन का नाम कनक भवन पड़ा।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार द्वापर में भगवान श्रीकृष्ण जब अयोध्या आए थे, तो जीर्णशिर्ण पड़े कनक भवन का जीर्णोद्धार उन्होंने करवाया था। इसके साथ इस मंदिर में उन्होंने श्रीराम और माता सीता की पूजा भी की थी। कालांतर में यह मंदिर फिर से जीर्ण हो गया था। कहा जाता है कि मध्यकाल में, इस मंदिर का जीर्णोद्धार विक्रमादित्य ने करवाया था। बाद में, इस मंदिर का पुनर्निर्माण ओरछा की रानी वृषभानु कुंवरि ने करवाया था। वर्तमान में, जो मंदिर दिखाई देता है, वह रानी वृषभानु कुंवरि द्वारा बनवाया गया है।

कनक भवन का स्वरूप
कनक भवन एक विशाल और भव्य मंदिर है। इसका निर्माण लाल बलुआ पत्थर से किया गया है। मंदिर के गर्भगृह में भगवान राम और देवी सीता की सोने के मुकुट वाली मूर्तियां विराजमान हैं। मंदिर के बाहरी भाग में भगवान राम और देवी सीता की कई अन्य मूर्तियां भी स्थापित हैं। अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर बने राम मंदिर में जहां कृष्ण रंग के रामलला की मनमोहक मुस्कान वाली मूर्ति स्थापित हुई है वहीं कनक भवन में भगवान श्रीराम की संगमरमर से बनी मूर्ति को स्थापित किया गया है।
मान्यताओं के अनुसार यह श्रीराम और देवी सीता का निजी आवास है। इसलिए यहां भगवान हनुमान को भी रहने की अनुमति नहीं थी। लेकिन जहां राम होंगे वहां हनुमान भी तो होंगे। इसलिए कहा जाता है कि काफी अनुरोध करने के बाद श्रीराम ने बतौर पहरेदार हनुमान को इस भवन में आने की अनुमति दे दी थी। कनक भवन में एक कमरा भगवान हनुमान को समर्पित भी मौजूद है।
पुजारी कहलाते हैं राम रसिक
कनक भवन अयोध्या का कोई आम मंदिर नहीं है। यह बड़ा ही अनोखा मंदिर है। चुंकि यह भवन माता सीता को मुंह दिखाई में मिला था, इसलिए इस मंदिर के पुजारी श्रीराम को अपना जीजा मानते हैं। कहा जाता है कि जीजा-साली में जिस प्रकार का प्रेम संबंध होता है, ठीक वैसा ही इस मंदिर के पुजारी और भगवान राम के बीच होता है। मंदिर के पुजारी खुद को भगवान श्रीराम की प्रेमिका मानते हैं और राम-रसिक कहलाते हैं।
मंदिर में पूजा करते समय पुजारी अपने सिर को कभी खुला नहीं छोड़ते और महिलाओं की तरह सिर ढंककर ही भगवान राम की आरती होती है। यूं कहा जा सकता है कि इस मंदिर में महिला-पुरूष के सारे भेद मिट जाते हैं और सभी एकाकार होकर श्रीराम की आराधना करते हैं।

नहीं धारण करते हैं शस्त्र
कनक भवन संभवतः ऐसा एकलौता मंदिर है, जहां श्रीराम कोई भी शस्त्र धारण नहीं करते हैं। दरअसल, इस मंदिर में श्रीराम को युवराज/राजा राम, माता सीता के पति श्रीराम, राजा दशरथ के पुत्र राम और जीजा राम के तौर पर ही देखा जाता है। इसलिए सालभर उन्हें कोई भी शस्त्र धारण नहीं करवाया जाता है। सिर्फ दशहरा के दिनों में ही कनक भवन में श्रीराम को शस्त्र धारण करवाने की सालों पुरानी परंपरा है।
कनक भवन की यात्रा
कनक भवन अयोध्या का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। यह मंदिर अयोध्या शहर के केंद्र में स्थित है। इस मंदिर में दर्शन करने के लिए कोई प्रवेश शुल्क नहीं है। मंदिर सुबह 5 बजे से शाम 8 बजे तक खुला रहता है।
कनक भवन के आसपास के दर्शनीय स्थल
- राम जन्मभूमि मंदिर
- हनुमानगढ़ी
- दशरथ महल
- गुप्तार घाट
- नागेश्वरनाथ मंदिर
- नंदी घाट
- सरयू नदी
अयोध्या एक पवित्र शहर है, जो भगवान राम से जुड़ा हुआ है। कनक भवन अयोध्या का एक प्रसिद्ध मंदिर है, जो भगवान राम और देवी सीता को समर्पित है। यह मंदिर एक दर्शनीय स्थल है, जिसे हर किसी को अवश्य देखना चाहिए।



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