22 जनवरी को अयोध्या के राम मंदिर में रामलला की मूर्ति स्थापित हो चुकी है। काले रंग के शीला से रामलला की मनमोहक मूर्ति को तैयार करने में कर्नाटक के मूर्तिकार को 6 महीनों से भी अधिक का समय लग गया है। राम मंदिर के उद्घाटन के बाद रामलला की सभी तस्वीरों में उनकी मनमोहक मुस्कान के अलावा जिस चीज ने लोगों का ध्यान सबसे ज्यादा अपनी तरफ खींचा, वह है रामलला के आभूषण।

मंदिर में प्रभु श्रीराम की 5 वर्षीय बालक स्वरूप की मूर्ति को स्थापित किया गया है। पहले दिन रामलला को पौराणिक कथाओं में वर्णित आभूषणों और वस्त्रों के आधार पर ही सुसज्जित किया गया था। उन्हें पीले रंग की धोती पहनायी गयी थी। बताया जाता है कि वाल्मीकि रामायण और रामचरितमानस में जिस प्रकार रामलला के आभूषणों का वर्णन किया गया है, ठीक उसी आधार पर रामलला के सभी आभूषण तैयार किये गये हैं।
आइए आपको रामलला के मुकुट समेत अन्य सभी आभूषणों के बारे में विस्तार से बताते हैं :
सिर्फ 12 दिनों में तैयार हुए सभी आभूषण
रामलला को सिर से लेकर पैर तक कुल 17 आभूषण धारण करवाएं गये हैं। इन आभूषणों को तैयार करने की जिम्मेदारी लखनऊ के हरसहायमल श्यामलाल ज्वेलर्स को सौंपी गयी थी। ज्वेलर्स ने प्रत्येक आभूषण का निर्माण शास्त्रसम्मत शोभा के आधार पर ही किया है। बताया जाता है कि रामलला के आभूषणों को तैयार करने का ऑर्डर ज्वेलर्स को 1 जनवरी को दिया गया था और 12 जनवरी को ज्वेलर्स सभी आभूषण लेकर अयोध्या पहुंच गया था। रामलला के सम्पूर्ण आभूषणों को तैयार करने में करीब 15 किलो सोना और 18 हजार हीरे और पन्ना का इस्तेमाल किया गया है।

मुकुट नहीं पगड़ी किया धारण
रामलला को कोई मुकुट नहीं बल्कि पगड़ी पहनायी गयी है। दरअसल, राम मंदिर में रामलला की प्रतिमा को एक 5 वर्षीय बालक के रूप में स्थापित की गयी है। इसलिए रामलला को किसी राजा का मुकुट नहीं बल्कि सोने से निर्मित पगड़ी पहनाने का फैसला लिया गया। चुंकि भगवान राम सूर्यवंशी थे, इसलिए रामलला के मुकुट पर भगवान सूर्य का चिन्ह अंकित किया गया।
इसके साथ ही राजसी शक्ति का प्रतीक पन्ना मुकुट के बीच में लगाया गया है। इसके अलावा मुकुट पर उत्तर प्रदेश का राजकीय चिन्ह मछली और राष्ट्रीय पक्षी मोर भी बनाया गया है। मुकुट 1 किलो 700 ग्राम सोने से बना है जिसमें 175 कैरेट जाम्बियन पन्ना, 75 कैरेट हीरा, 262 कैरेट रुबी, माणिक्य जड़ें हैं और इसके किनारे पर मोती की लड़ियां भी लगायी गयी हैं।
तिलक
रामलला का तिलक 16 ग्राम सोने से बना है जिसके बीच में 3 कैरेट के हीरे और दोनों तरफ 10 कैरेट के हीरे लगाए गये हैं। तिलक में बर्मीज रुबी जड़ा गया है।

कुंडल
रामलला के कानों में कुंडल धारण करवाए गये हैं जिसमें मोर की आकृति बनी हुई है। यह कुंडल 22 कैरेट सोने से बना है जिसमें हीरे, माणिक्य और पन्ना जड़े हैं।
अंगूठियां
रामलला को जो अंगूठी पहनायी गयी है उसका वजन 65 ग्राम है। इसमें 4 कैरेट के हीरे और 33 कैरेट पन्ना जड़े हैं। अंगूठी के ठीक बीच में बड़ा सा जाम्बियन पन्ना लगाया गया है। भगवान के दाहिने हाथ में 26 ग्राम का सोने की अंगूठी है जिसमें माणिक्य और हीरे जड़े हैं।
हार
रामलला को 4 हार धारण करवाए गये हैं। छोटा हार करीब 500 ग्राम का है, जिसमें 150 कैरेट माणिक्य और 380 कैरेट पन्ना जड़े हैं। इस हार के ठीक बीच में पन्ना, माणिक्य और हीरे से सूर्यवंश का प्रतिक चिन्ह बनाया गया है। दूसरा हार पंचलड़ा है जिसका वजन लगभग 660 ग्राम है। इसमें 80 हीरे, 550 कैरेट पन्ना जड़े गये हैं। इस हार के पांचों लड़ियां पंचतत्व का प्रतिक हैं।

रामलला के गले में तीसरा हार विजयमाला है। इसका वजन लगभग 2 किलो है जो 22 कैरेट सोने से बना है। इसमें पंच पवित्र पुष्प आदि बने हैं। इस हार की लम्बाई ऐसी रखी गयी है कि यह रामलला के चरणों को छू रहा हो। रामलला को कौस्तुभमणि भी धारण करवायी गयी है जिसे माणिक्य और हीरों से सजाया गया है। शास्त्रों के अनुसार भगवान विष्णु और उनके अवतार कौस्तुभमणि धारण करते हैं, इसलिए रामलला को भी यह धारण करवाया गया है।
करधनी या कमरबंध
रामलला को जो करधनी धारण करवायी गयी है उसका वजन करीब 750 ग्राम है। इसमें 70 कैरेट हीरे और 850 कैरेट माणिक्य व पन्ना जड़े हैं। पौराणिक काल में करधनी राजकुमारों का प्रमुख आभूषण हुआ करती थी। रामलला की करधनी में 5 छोटी-छोटी घंटियां लगायी गयी हैं, जिसमें मोती, माणिक्य और पन्ना लटक रहे हैं।
बाजूबंद
नन्हें रामलला की बाजुओं को सजाने के लिए 22 कैरेट सोने से बना बाजूबंद धारण करवाया गया है जिसका वजन करीब 400 ग्राम है।
कंगन
कंगनों के बिना रामलला के हाथ कितने सूने से लगते। रामलला को जो कंगन धारण करवाएं गये हैं, उन दोनों कंगनों का वजन करीब 850 ग्राम है। इसमें लगभग 100 हीरे और 320 पन्ना जड़े हैं।

पैजनियाँ
रामलला के नन्हें पैरों को सजाने के लिए शुद्ध सोने से बनी पैजनियाँ पहनायी गयी हैं।
खड़ाऊ
रामलला के नन्हें पैरों के लिए सोने के पग खडूआ तैयार किये गये हैं जिनका वजन 400 ग्राम है। इसमें 55 कैरेट हीरे और 50 कैरेट पन्ना जड़े हैं।
धनुष बाण
रामलला भले ही बाल रूप में हैं लेकिन वह एक धनुर्धारी हैं। इसलिए श्रीराम के लिए 22 कैरेट सोने से 1 किलो वजन का धनुष और बाण तैयार किया गया है। धनुष में मोती, माणिक्य और पन्ने की लटकन लगायी गयी है।
चांदी के खिलौने
किसी भी बच्चे का कमरा खिलौनों के बिना कैसे पूरा हो सकता है। रामलला के खेलने के लिए चांदी से बने खिलौने रखे गये हैं जिनमें घोड़ा, हाथी, ऊंट, झुनझुना और लट्टू है।
चरणों के नीचे कमल और मस्तक पर सोने की छत्र
रामलला के चरणों के नीचे कमल शोभायमान हैं, जिसके नीचे सोने की माला सजी हुई है। इसके साथ ही रामलला के प्रभा मंडल के ऊपर सोने का छत्र लगा हुआ है।
सोने और हीरा-पन्ना जड़े आभूषणों के अलावा रामलला को वनमाला भी धारण करवायी गयी है। इसे हस्तशिल्प के लिए समर्पित शिल्पमंजरी संस्था ने तैयार किया है। इसे रंग-बिरंगे विभिन्न फूलों से तैयार किया गया है। बताया जाता है कि राम मंदिर के गर्भगृह में रामलला को आभूषण धारण करवाने और पूरा श्रृंगार करने में करीब ढाई घंटे का समय लगा था। जानकारी के मुताबिक सप्ताह के सातों दिन रामलला के श्रृंगार अलग-अलग होंगे। इसलिए उनके लिए आभूषण भी अलग-अलग ही बनेंगे। आभूषणों को लेकर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से लखनऊ के ज्वेलर्स की बात होनी है।



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