अयोध्या में तैयार हो रहे राम मंदिर में रामलला के स्थापित होने की तारीख धीरे-धीरे नजदीक आ रही है। इसके साथ ही मंदिर के निर्माण की गति में भी तेजी आ गयी है। दुनिया भर में फैले राम भक्त बेसब्री से उस पल का इंतजार कर रहे हैं जब मंदिर में रामलला की भव्य प्रतिमा स्थापित होगी। इस बीच राम मंदिर से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आयी है।

मंदिर के प्रथम तल में प्रभु श्रीराम की रामलला स्वरूप की प्रतिमा को भी स्थापित किया जाएगा, जिसकी अभी अयोध्या में पूजा की जाती है। रामलला की इस प्रतिमा के लिए खास तौर पर एक भव्य सिंहासन का निर्माण किया जा रहा है जिसपर सोने की परत चढ़ी होगी।
कब तक तैयार होगा पहला तल
अयोध्या के भव्य राम मंदिर का उद्घाटन 22 जनवरी 2024 को दोपहर लगभग 12:30 बजे किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और देशभर से आये हजारों साधु-संतों व विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति में मंदिर के पहले तल में रामलला की मूर्ति स्थापित की जाएगी। उससे पहले किसी भी तरह से मंदिर के पहले तल का निर्माण कार्य पूरा करने की योजना है। मिली जानकारी के अनुसार मंदिर के निर्माण का 80 फीसदी काम पूरा हो चुका है। बाकी बचे 20 फीसद काम को 15 दिसंबर 2023 तक किसी भी परिस्थिति में पूरा करने की योजना है।

बताया जाता है कि अभी गृह मंडप के फर्श पर संगमरमर बिछाने का काम चल रहा है। इसके साथ ही राम मंदिर की बाहरी दीवार के प्रवेश द्वार को भी अंतिम रूप दिया जा रहा है। मंदिर के पहले तल में 17 खंभे लगाने का काम हो चुका है, अब सिर्फ 2 खंभे लगाना ही बाकी है। इन सभी कार्यों को नवंबर के अंत या अधिक से अधिक 15 दिसंबर तक पूरा करने की योजना है।
कहां बन हो रहा है सिंहासन
मंदिर के प्रथम तल में ही रामलला के विराजमान होने के लिए संगमरमर से 8 फीट ऊंचा भव्य सिंहासन को तैयार किया जा रहा है। बताया जाता है कि इस सिंहासन को राजस्थान में वहां के कुशल कारीगर तैयार कर रहे हैं। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से मिली जानकारी के अनुसार यह सिंहासन 8 फीट ऊंचा, 3 फीट लंबा और 4 फीट चौड़ा होगा।

संगमरमर के इस सिंहासन पर सोना चढ़ाया जाएगा, जिसको बनाने का कार्य अपने अंतिम चरण में है। सोना चढ़े इस सिंहासन पर रामलला की 5 पुरानी मूर्ति को स्थापित किया जाएगा जिसकी वर्तमान समय में मंदिर के स्थान पर पूजा होती है। संभावना है कि 15 दिसंबर तक यह सिंहासन राजस्थान से अयोध्या पहुंच जाएगा।
कहां से आया सोना और कितना हुआ इस्तेमाल
मिली जानकारी के अनुसार रामलला के सिंहासन पर सिर्फ सोना ही नहीं बल्कि चांदी और दूसरे महंगे धातुओं का इस्तेमाल भी किया जाएगा। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से मिली जानकारी के अनुसार देश और विदेश में फैले भगवान राम के भक्तों ने भारी मात्रा में सोने और चांदी की वस्तुएं मंदिर को दान में दी हैं। ट्रस्ट को दान में दी गयी सोने-चांदी की वस्तुओं, सिक्कों, ईंटों और अन्य सामग्रियों को पिघलाकर उन्हें सुरक्षित रखा जा रहा है।

बताया जाता है कि दान में मिले सोने-चांदी का इस्तेमाल कर ही रामलला के लिए भव्य सोना चढ़ा संगमरमर का सिंहासन तैयार किया जा रहा है। हालांकि इस सिंहासन में कितने किलो सोने का इस्तेमाल किया गया है, इस बारे में ट्रस्ट ने कोई खुलासा नहीं किया है। साथ ही बताया जाता है कि भक्तों के दान देने का सिलसिला अभी भी जारी है और उन कीमती धातुओं को पिघलाकर उन्हें भविष्य में भी सुरक्षित किया जाएगा।



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