राम मंदिर के गर्भगृह में स्थापित होने की दौड़ में तीन मूर्तियां थी। इन तीन मूर्तियों में से रामलला की मूर्ति बनाने के सभी मानकों पर जो मूर्ति खरी उतरेगी, उसे ही 22 जनवरी को राम मंदिर के भूतल में बने गर्भगृह में स्थापित किया जाएगा। पिछले दिनों राम मंदिर को लेकर हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट ने मूर्ति का चयन तो कर लिया था लेकिन अपना फैसला उस समय सुरक्षित रखा था। लेकिन...

अब इस बात का खुलासा हो चुका है कि राम मंदिर के गर्भगृह में कौन सी मूर्ति स्थापित की जाएगी।
भारतीय जनता पार्टी के नेता और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदुरप्पा और केंद्रीय कोयला मंत्री प्रह्लाद जोशी ने अपने X हैंडल (पूर्व का ट्विटर) पर एक पोस्ट शेयर करते हुए इस बात का खुलासा किया है। बता दें, 22 जनवरी को अयोध्या में नवनिर्मित भव्य राम मंदिर के उद्घाटन और रामलला की प्राण प्रतिष्ठा समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत करीब 7000 गणमान्य अतिथि शामिल होने वाले हैं।
इस समारोह में यजमान की भूमिका प्रधानमंत्री खुद निभाने वाले हैं और काशी और अयोध्या के विद्वानों समेत कई विद्वानों का समूह प्राण प्रतिष्ठा का अनुष्ठान संपन्न करवाएगा। 23 जनवरी से आम भक्तों के लिए राम मंदिर के द्वार खोल दिये जाएंगे।
कौन सी मूर्ति होगी स्थापित
कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदुरप्पा और केंद्रीय कोयला मंत्री प्रह्लाद जोशी ने अपने पोस्ट में बताया है कि अरुण योगीराज द्वारा बनायी गयी मूर्ति को राम मंदिर के गर्भगृह में स्थापित किया जाएगा। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने अपने पोस्ट में लिखा है, "जहाँ राम हैं, वहाँ हनुमान हैं। अयोध्या में भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा के लिए मूर्ति का चयन फाइनल हो गया है।
हमारे देश के सुप्रसिद्ध मूर्तिकार, हमारे गौरव श्री योगीराज अरुण। उनके द्वारा बनाई गई भगवान राम की मूर्ति अयोध्या में स्थापित की जाएगी। यह राम हनुमान के अटूट रिश्ते का एक और उदाहरण है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि हनुमान की भूमि कर्नाटक से रामललानी के लिए यह एक महत्वपूर्ण सेवा है।"
कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदुरप्पा ने अरुण योगीराज की मूर्ति राम मंदिर में स्थापित होने की पुष्टि करते हुए अपने पोस्ट में लिखा है, "अब हमें यह याद दिलाने का एक और सौभाग्य आया है कि रामायण में हमारे किष्किन्धे आंजनेय ने अयोध्या में श्री रामचन्द्र के राज्याभिषेक में विशेष भूमिका निभाई थी। मैसूरु के मूर्तिकार अरुण योगीराज की बनाई गई भगवान राम की मूर्ति को अयोध्या के भव्य श्रीराम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के लिए चुना गया है। इससे राज्य के सभी भक्तों का गौरव और प्रसन्नता दोगुनी हो गई है। 'मूर्तिकार योगीराज अरुण' को हार्दिक बधाई।"
बता दें, इससे पहले अरुण योगीराज द्वारा बनायी गयी केदारनाथ में श्री आदिशंकराचार्य और दिल्ली में सुभाष चंद्र बोस की मूर्तियां स्थापित हो चुकी हैं और दोनों मूर्तियों का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ही किया था।
किन मानकों पर तैयार की गयी हैं तीनों मूर्तियां :

राम मंदिर के गर्भगृह में स्थापित होने के लिए 3 भाग्यशाली मूर्तिकारों को मूर्तियां तैयार करने का ऑर्डर दिया गया था। रामलला की मूर्ति बनाने के लिए कुछ खास मानकों का भी निर्धारण किया गया था, जिसके आधार पर मूर्तियों को तैयार किया जाना था। अरुण योगीराज के अलावा रामलला की मूर्ति बनाने की दौड़ में सत्यनारायण पांडे और जीएल भट्ट भी शामिल थे। सत्यनारायण पांडे ने मकराना पत्थरों से रामलला की मूर्ति तैयार की है और जीएल भट्ट ने कर्नाटक के तुंगभद्रा नदी के किनारे स्थित पहाड़ से शिलाएं लाकर रामलला की मूर्ति का निर्माण किया है। रामलला की मूर्ति का निर्माण जिन मानकों पर किये जाने के लिए कहा गया था, वह निम्न हैं :-
- मूर्ति की कुल ऊंचाई 52 इंच हो।
- श्रीराम की भुजाएं घुटनों तक लंबी हो।
- मस्तक सुंदर, आंखें बड़ी और ललाट भव्य हो।
- कमल दल पर खड़ी मुद्रा में मूर्ति होनी चाहिए।
- हाथ में तीर व धनुष हो।
- मूर्ति के चेहरे पर 5 साल के बच्चे की बाल सुलभ कोमलता झलकनी चाहिए।
योगीराज ने कहा था कि उन्हें मूर्ति बनाना शुरू करने से पहले कहा गया था कि मूर्ति एक बच्चे की बनानी है, जो दिव्य हो, क्योंकि यह भगवान के अवतार की मूर्ति है। जो लोग मूर्ति का दर्शन करने आएं, उन्हें दिव्यता का अहसास होना चाहिए।



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