पक्षियों के दर्शन करना और वो भी अपने पौराणिक धरोहरों में, कितना सुंदर होगा ना? चलिए आज हम चलते हैं, हावेरी के बांकापुरा मोर अभ्यारण्य में, जहाँ आप अपने राष्ट्रीय पक्षी की भव्यता को और करीब से देख पाएँगे।
किसी ज़माने में बानकेयरासा नाम का सरदार इस क्षेत्र में राज किया करता था, जिसके नाम पर ही इस क्षेत्र का नाम बांकापुरा पड़ा। आज यह, बांकापुरा किले के बचे अवशेषों, नागरेश्वरा मंदिर और मोर अभ्यारण्य के साथ पुरानी धरोहरों की श्रेणी में शामिल है।
बांकापुरा किले के बचे खुचे कुछ ही अवशेष होने के बावजूद भी यह क्षेत्र बड़ा ही खूबसूरत दिखाई पड़ता है, यहाँ बसे रंगबिरंगे मोरों की वजह से जो दिनभर यहाँ अठकेलियां करते रहते हैं। यहाँ बहुत बड़े तादाद में मोरों के परिवार के होने की वजह से सरकार ने इसे मोर अभ्यारण्य घोषित कर दिया है।

भारतीय मोर
Image Courtesy: Dineshkannambadi
बांकापुरा का मोर अभ्यारण्य देश का दूसरा मुख्य मोर अभ्यारण्य है, जहाँ मोरों को सुरक्षित रखा गया और उनकी देखभाल पूरी तरीके से की जाती है। यह कर्नाटका में ही बसे दो मोर अभ्यारण्यों में से एक है। अन्य दूसरा अभ्यारण्य आदिचुंचनगिरी में है।
बांकापुरा प्रकृति प्रेमियों और पक्षी प्रमियों के लिए एक शानदार जगह है। आज के नये ज़माने में आप मोरों को सिर्फ चिड़ियाघरों में ही देख पाते होंगे, पर यहाँ आप मोरों को खुले आसमान के नीचे नाचते गाते, खुश होते अपनी ही अलग मधुर दुनिया में देख सकते हैं। इस किले में आते ही आपको मोरोँ की झलक दिखनी शुरू हो जाएगी।बांकापुरा के आसपास के कई खाई मोर परिवारों के बसेरे बन चुके हैं।
बांकापुरा के अन्य आकर्षण
बांकापुरा एक पुरातात्विक धरोहरों की भूमि है। बांकापुरा किला और नागरेश्वरा मंदिर बांकापुरा के अन्य आकर्षण हैं।
बांकापुरा किला
बांकापुरा किला मोर अभ्यारण्य का स्थान है। कई रिकॉर्डों के अनुसार माना जाता है कि, यहाँ कई मुख्य राजवशों, जैसे कादंबों, राष्ट्रकूटों, चालुक्यों, होयसालों और बीजापुर के आदीलशाहियों ने राज किया था।
दिलचस्प बात यह है कि, एक बार ब्राह्मण राजवशों ने भी यहाँ आक्रमण किया था। किले के आसपास ही कई ऐसे शिलालेख भी पाए गये हैं, जिनमें पुरानी कन्नड़ लिपि में खोद कर लिखा गया है। उनमें से एक शिलालेख कन्नड़ के महान कवि रण को इंगित करता है, जो बांकापुरा अपने गुरु की तलाश में आए थे।

नागरेश्वरा मंदिर
Image Courtesy: Dineshkannambadi
नागरेश्वरा मंदिर
नागरेश्वरा खुद में ही एक श्रेष्ठ कृति है। 12वीं शताब्दी के इस चालुक्यों की वास्तुकला को अरावतु कंबड़ा गुडी(60 खंभों का मंदिर) के नाम से जाना जाता है। कन्नड़ के शब्द अरावतु का मतलब होता है 60। नागरेश्वरा मंदिर अभी भी बहुत ही अच्छी हालत में खूबसूरती के साथ वैसा ही स्थापित है, हालाँकि इस मंदिर में भी पुराने ज़माने में कई आक्रमण हुए थे। नागरेश्वरा मंदिर भगवान शिव जी को समर्पित है और इसमें आपको पश्चिमी चालुक्यों के पिल्लर आर्ट की विशेषता मिल जाएँगी। ए.एस.आइ के लिस्ट में दर्ज इस स्मारक को बहुत ही कम लोग जानते हैं।
बांकापुरा की अन्य खास बात यह है कि, यह बाड़ा के समीप है जो कनक दास की जन्मभूमि है।
हालाँकि अब सरकार को इस धरोहर की ओर और ध्यान देने की ज़रूरत है क्युंकी हाल ही में अभ्यारण्य के पास ही कई मोर मृत पाए गये हैं। पक्षियों की जल्दी लुप्त होती जा रही समस्या की वजह से ज़रूरी है कि अब उनकी रक्षा और बड़े पैमाने पर की जाए।
नोट: आप जब भी मोर अभ्यारण्य में जाएँ, कृपया उनसे दूरी बना कर रखें। याद रखें की ये उनका बसेरा है, और आप उन्हें किसी भी तरह से परेशन ना करें या नुकसान ना पहुँचाएँ।

नागरेश्वरा मंदिर
Image Courtesy: Dineshkannambadi
बांकापुरा कैसे पहुँचें?
बांकापुरा बेंगलुरू और पुणे हाइवे के मध्य में हावेरी से 22 किलोमीटर की दूरी पर है।
बांकापुरा से नज़दीकी होटल
हावेरी बांकापुरा से सबसे नज़दीक में ही बसा शहर है। वहाँ आपको रहने के लिए कई सारे होटल उपलब्ध हैं।
हावेरी में होटल: हर्षा कंफर्ट्स, शिवा शक्ति पैलेस, वृंदावन लौज, होयसाला होटल
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Read in English: Peacocks in the Fort!



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