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भारत की इन जगहों की दीवाने विदेशी भी है और बॉलीवुड वाले

Written By: Goldi

दुनिया के समर्द्ध देशों में से एक भारत अपने अंदर कई रंग-बिरंगी विविधता के आकर्षणों को समेटे हुए है। जिन्हें घूमने और देखने के लिए हार साल लाखों की तादाद में देशी समेत विदेशी पर्यटक पहुंचते हैं।

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भारत में सिर्फ घूमने के लिए ही नहीं खाने के लिए भी काफी कुछ है..आप अलग अलग राज्य में कुछ ना कुछ बेहतरीन व्यंजन का स्वाद ले सकते हैं...इन सबके अलावा, हर जगह की सांस्कृतिक विरासत भी होती है जो हमें अपनी ओर खींचती है।

अहमदाबाद

अहमदाबाद

किसी भी शहर को घूमने का मजा जो रात में है वो दिन में नहीं है..रात में शहर रौशनी से जगमगाता हुआ लोगो को अपनी ओर आकर्षित करता है। अगर आप अहमदाबाद में हैं तो रात को इस शाहर की सैर जरुर करें...रात के समय यहां की स्थानीय हवेली और स्मारक आपको रोशनी के आगोश में और भी मनोरम नजर आयेंगे। इसके अलावा केलिको संग्रहालय में भारत के उल्लेखनीय वस्त्रों की एक झलक देखें। शहर से 100 किलोमीटर दूर, पुष्पावती नदी के तट पर स्थित मॉडेरा में सूर्य मंदिर है, जिसके तार 1026 ईस्वी से जुड़े हैं और इस मंदिर का आर्किटेक्चर बेहद आलीशान है। इसके अलावा प्राचीन ज़माने के सीढ़ियों वाले कुओं को देखने के लिए आप पाटन (108 किलोमीटर दूर) भी जा सकते हैं। यहां से पारंपरिक पटोला साड़ी लेने बिलकुल न भूलें।

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थंजावुर, तिरुचिरापल्ली और मदुरै

थंजावुर, तिरुचिरापल्ली और मदुरै

मंदिर किसी भी शहर की समृद्ध विरासत को दर्शाते हैं और उस रूप में तमिलनाडु निश्चित रूप से भारत के 10 बड़े सांस्कृतिक स्थलों में से एक है। थंजावुर में बृहदेश्वर मंदिर और थंजावुर मराठा महल की यात्रा करें। तिरुचिरापल्ली में 17 वीं शताब्दी के रॉक किला भी घूम सकते है, जो शहर के दूसरे छोर से दिखता है जिसमें चट्टानों को काटकर बनाए गए दो मंदिर भी शामिल हैं। और अंत में मदुरै में, मीनाक्षी अम्मान मंदिर परिसर के ऊंचे गोपुरम (गेटवे टावर) के नीचे खड़े हो कर मज़े लें।

PC: Melanie M

 झीलों का शहर उदयपुर

झीलों का शहर उदयपुर

झीलों का शहर माना जाने वाला शहर, उदयपुर को पिचोला झील में नाव की सवारी करके देखा जा सकता है। झील के केंद्र में स्थित जग मंदिर के साथ सिटी पैलेस परिसर, इस अनुभव की सुंदरता को बढ़ाता है। 100 से अधिक कमरे, कई आंगन और शानदार भित्तिचित्रों वाले विशाल महल, गंगूर घाट पर बनी बोगोर की हवेली पर जरूर जाएं। यहां हर शाम को लोक नृत्य का प्रदर्शन होता है। उदयपुर से, माउंट आबू तक, एक दिन की यात्रा करें, जहां आप दिलवाड़ा मंदिर के जटिल संगमरमर की नक्काशी भी देख सकते हैं।

PC: PDTillman

वाराणसी

वाराणसी

वाराणसी जिसे बनारस और काशी के नाम से भी जाना जाता है, की संस्कृति का गंगा नदी और इसके धार्मिक महत्व से एक अटूट और अहम रिश्ता है। यहां आने वाले पर्यटक शाम को गंगा में बोटिंग का लुत्फ ले सकते हैं साथ ही गंगा की महा-आरती में भी हिस्सा ले सकते हैं। वाराणसी घुटे फिरते आपको हर गली नुक्कड़ पर कई सारे मंदिर नजर आयेंगे नदी के किनारे बने घाट, रंगीन बाज़ार और भगवा कपड़े पहने साधू दिखाई देते हैं। शाम को, गंगा आरती में भाग लें, जो घंटियों की ध्वनि, मंत्र, आग और धूप के छल्ले के साथ वास्तव में आत्मोत्थान का अनुभव कराती है। गंगा महोत्सव के पांच दिवसीय शास्त्रीय संगीत और नृत्य समारोह के दौरान वाराणसी जाने का सही समय होता है। दीपावली के दौरान गंगा नदी में तैरते हजारों दिए का मनमोहक नज़ारा देख सकते हैं।PC: Ken Wieland

जयपुर

जयपुर

गुलाबी शहर जयपुर, शानदार महलों, हवेली और स्मारकों के लिए जाना जाता है। विशाल आमेर (एम्बर) किला, शहर से बाहर, 11 किलोमीटर दूर, अपने उच्च सजावट वाले प्रवेश द्वार, जटिल जाली के काम और एक प्रभावशाली शीशमहल के साथ एक बड़ा आकर्षण प्रस्तुत करता है। जयपुर में पर्यटक फुर्सत के पल मजे के साथ बिता सकते हैं। रोमांच प्रेमी यहां आकर ऊंट की सवारी, गर्म हवा के गुब्‍बारों की सैर और रॉक क्‍लाइम्बिंग जैसे खेलों का आंनद उठा सकते है। उत्‍साही लोग अच्‍छा समय व्‍यतीत करने के लिए आस करौली और रणथंभौर जैसे राष्‍ट्रीय उद्यानों की सैर के लिए भी जा सकते हैं। यहां आप हस्‍तकला सामग्री, कलाकृतियों, परिधान और ब्रांडेड कपड़ों की खरीददारी भी कर
सकते हैं।

pc: Hemant Shesh

उड़ीसा

उड़ीसा

भारत में कुछ ही जगहें ऐसी हैं, जो अपनी संस्कृति और विरासत के मामले में अद्वितीय हैं। ओडिशा राज्य भी उन्हीं में से एक है।अपनी समृद्ध परंपरा एवं अपार प्राकृतिक संपदा से युक्त तथा पूर्व में उड़ीसा के नाम से रूप में जाना जाने वाला, ओडिशा, भारत का खजाना एवं भारत का सम्मान है। ओडिशा को प्यार में 'भारत की आत्मा' कहा जाता है।प्रभावशाली मंदिरों के लिए प्रसिद्ध उड़ीसा के भुवनेश्वर में ही 700 से ज्यादा मंदिर हैं! 11 वीं सदी के लिंगराज मंदिर परिसर में स्थित 10 वीं शताब्दी का मुक्तेश्वर मंदिर, अपने उत्कृष्ट धरोहर और अद्वितीय राजा-रानी मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। उसके बाद पुरी में समुद्र किनारे स्थित जगन्नाथ मंदिर है, जहां की रथ यात्रा देखने लायक है। उड़ीसा के सभी मंदिरों में कोणार्क (पुरी से 35 किलोमीटर) के सूर्य मंदिर की नक्काशी सबसे विस्तृत है। बड़े पैमाने पर रथ के आकार में बना यह मंदिर यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर घोषित की गई है, जिसके अवशेष मुख्यत: खंडहर हैं जो हमारे पूर्वजों के वास्तुशिल्प प्रतिभा का एक अद्भुत अनुस्मारक है।

PC: Jyotirmaya

फ़ोर्ट कोची

फ़ोर्ट कोची

भगवान का अपना देश माना जाने वाला प्रदेश केरल सुंदरता से भरा हुआ है - बैकवाटर से लेकर प्राचीन समुद्र तटों वाले केरल का मेरा पसंदीदा स्थल है- फ़ोर्ट कोची। एरनाकुलम से नौका (केवल 3 रुपये, एक दिशीय मार्ग!) ले कर आप पुर्तगाली-प्रभाव वाले शहर का भ्रमण कर सकते हैं। चीनी मत्स्य पालन जाल से भरे समुद्र के किनारे पर टहल सकते हैं; अगर आप भाग्यशाली हैं तो आग्रह करने पर मछुआरे आपको अपनी नौका में सवारी करने दे सकते हैं और आप उनकी मछली पकड़ने में मदद भी कर सकते हैं। यहां आप एक अनोखे यहूदी टाउन की यात्रा करें जहां प्राचीन वस्तुओं से लेकर मसालों के बाज़ार से घिरा एक सिनेगॉग है। कथकली और कलारिपयट्टू देखने के लिए शाम को ग्रीनिक्स गांव में जा सकते हैं।PC: Koonankurish2

भोपाल

भोपाल

भोपाल, भारत का एक प्रसिद्ध शहर और मध्‍यप्रदेश राज्‍य की राजधानी भी है। झीलों के शहर के रूप में प्रसिद्ध भोपाल, पूर्व समय भोपाल रियासत की राजधानी भी हुआ करती थी। भोपाल आपको अपने विशाल बाजारों और खूबसूरत मस्जिदों के साथ आपको मुगलों के काल में वापस ले जाता है। मुगल शिल्पकला की विरासत व एशिया की सबसे बड़ी मस्जिद ताज-उल-मस्जिद के गुलाबी मुखौटे और संगमरमर के गुंबद बेहद प्यारे हैं। अन्य प्रमुख मस्जिद मोती मस्जिद है, जिसका आर्किटेक्चर दिल्ली की जामा मस्जिद के जैसा है। भोपाल और उसके आसपास के क्षेत्रों में कई पर्यटन स्‍थल मौजूद है। केवरा बांध, भोपाल के बाहरी इलाके में यहां का सबसे प्रसिद्ध पिकनिक स्‍पॉट है जो शहर का सबसे सुंदर दृश्‍य प्रस्‍तुत करता है। मनुबहन की टेकरी भी यहां का अन्‍य पिकनिक स्‍थल है जो एक पहाड़ी चट्टान पर स्थित होने के कारण शहर का मनोरम दृश्‍य प्रस्‍तुत करता है, पिकनिक स्‍पॉट होने के अलावा यह जगह जैनियों के लिए धार्मिक जगह भी है।

PC:Arian Zwegers

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