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जाने पठानकोट में घूमने की जगहों के बारे में

Written By: Goldi

उत्तरभारत के समृद्ध राज्यों में से एक पंजाब एक बेहद ही खूबसूरत राज्य है। पंजाब की मिट्टी की खुशबू पर्यटकों को अपना दीवाना बना देती है। खासकर यहां के गांव पर्यटकों को खूब भाते हैं।

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हमने आपको अपने लेख के जरिये पंजाब की धार्मिक नगरी अमृतसर से यो कई बार रूबरू कराया इसी क्रम में आज हम आपको बताने जा रहें है, पंजाब के सबसे बड़े शहर पठानकोट के बारे में।

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पठानकोट पंजाब राज्य के गुरदासपुर ज़िले में भारत के उत्तरी क्षेत्र और पाकिस्तान के पूर्व की ओर से जुड़ा हुआ एक शहर है। पठानकोट को पहले उदुंबर नाम से जाना जाता था। कांगड़ा और ड़लहौजी की तलहटी पर स्थित, यह शहर हिमालय पर्वत श्रृंखला का प्रवेश द्वार है। कई यात्री हिमालय जाने से पहले इस स्थान पर रुकते हैं।

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पठानकोट हर मौसम में पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। पठानकोट में पर्यटकों के घूमने के लिए कई स्थल हैं, जैसे कि नूरपुर किला शाहपुर कंड़ी किला, शिव मंदिर कथगढ़ और जुगियाल नगरी पर्यटकों के बीच खासा लोकप्रिय हैं। ज्वालाजी और चिंतपूर्णी प्रसिद्ध सप्ताहांत स्थल हैं जिन्हें पठानकोट में छुट्टियां मनाने आए पर्यटक देख सकते हैं।

नूरपुर किला

नूरपुर किला

नूरपुर किला पठानकोट से 26 किमी की दूरी पर स्थित है। इस किले का निर्माण 10 वीं शताब्दी में पठानिया कबीले द्वारा किया गया था। आज भी इस किले पर की नक्काशी को बखूबी देखा जा सकता है। पर्यटक किले के अंदर भगवान श्री कृष्ण को समर्पित मंदिर भी देख सकते हैं। सरकार की अनदेखी के चलते किला अब ज्यादा अच्छी अवस्था में नहीं है..लेकिन आज भी यह किला पर्यटकों के बीच खासा लोकप्रिय है।

मुक्तेश्वर मंदिर

मुक्तेश्वर मंदिर

मुक्तेश्वर मंदिर पठानकोट से केवल 21 कि.मी दूर स्थित है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और इस में एक सफेद संगमरमर का शिवलिंग है जिस पर तांबे की योनि है। इस मंदिर में अन्य देवी देवता जैसे भगवान विष्णु, देवी पार्वती और भगवान गणेश की मूर्तियां भी स्थापित हैं। पौराणिक कथायों के मुताबिक,पांड़व अपने अग्यातवास (निर्वासित) काल दौरान इन गुफाओं में ठहरे थे और भगवान शिव का सम्मान तथा उनकी पूजा करने के लिए इस मंदिर का निर्माण किया। रावी नदी और पर्वतें मंदिर की पृष्ठभूमि के रुप में हैं। मुक्तेश्वर मंदिर को मुकेस्रण मंदिर के रुप में भी जाना जाता है। शिवरात्रि के दिन केवल इस राज्य के ही नहीं बल्कि जम्मू और कश्मीर तथा हिमाचल प्रदेश के यात्रियों को भी अपनी ओर आकर्षित करता है। रावी नदी का बायां किनारा पंजाब राज्य के अंतर्गत आता है और दायां किनारा जम्मू और कश्मीर राज्य के अंतर्गत आता है जो पर्यटकों के लिए एक आकर्षक बिशेषता है।

शाहपुर कंड़ी किला

शाहपुर कंड़ी किला

शाहपुर कंड़ी किला का निर्माण 1505 में जसपाल सिंह पठानिया द्वारा किया गया था..किला परिसर में खूबसूरत मस्जिद और मंदिर को देखा जा सकता है,जो शासकों के धर्मनिरपेक्ष दृष्टिकोण को दर्शाते हैं। इस किले से दिखाई देने वाला नज़ारा काफी लुभावना है, जो रावी नदी और हिमालय पर्वत के साथ और खूबसूरत बन जाता है।

रणजीत सागर बांध

रणजीत सागर बांध

भारत के सबसे बड़े व्यास लाक पाइप में से है, और पंजाब का सबसे बड़ा जल विद्युत बांध भी है।यह रावी नदी पर स्थित है, और इसकी नगरी को शाहपुर कंड़ी कहा जाता है, जो प्रसिद्ध गुरुद्वारा श्री सिंह सभा का निवास स्थान है। खूबसूरत पहाड़ियों और घुमावदार झीलों का यह प्रदेश, किसी भी सैलानी को जरुर अपनी ओर आकर्षित करेगा।

क्या खाएं

क्या खाएं

अगर आप ढ़ाबों के खाने के शौक़ीन है,पंजाब से अच्छे ढ़ाबे आपको कहीं नहीं मिलेंगे..पठानकोट में आपको थोड़ी थोड़ी दूरी पर ढ़ाबे मिलेंगे जहां आप लजीज शाकाहारी और नॉन वेज खानें का स्वाद चख सकते हैं।

क्या खरीदें

क्या खरीदें

कोई भी यात्रा बिना शॉपिंग के पूरी नहीं होती, पठानकोट में आप मिशन रोड़, सुजानपुर बाजार और गांधी चौक में शॉपिंग कर सकते हैं। अगर आप पठानकोट में हैं तो पश्मीना शाल यहां से जरुर खरीदें।

कैसे पहुंचे

कैसे पहुंचे

ट्रेन द्वारा
पठानकोट नियमित रुप से चलने वाली ट्रेनों और बसों द्वारा देश के कई शहरों से जुड़ा है। यहां दो रेलवे स्टेशन हैं एक है पठानकोट और दूसरा है चक्की बैंक, दूसरा रेलवे स्टेशन शहर से केवल 4 कि.मी दूर है।

सड़क द्वारा
बस स्टैंड़ रेलव स्टेशन के निकट स्थित है और यह पठानकोट को शिमला, नई दिल्ली और चंडीगढ़ जैसे प्रमुख शहरों से नियमित बसों की सेवा द्वारा जोड़ता है। पर्यटक अपनी रुचि अनुसार राज्य परिवहन या निजी बसों द्वारा पठानकोट पहुंच सकते हैं।

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