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Chandrayaan 3 : आज शाम से शुरू होगी लैंडिंग की तैयारी, लैंडर मॉड्यूल को किया जाएगा डी-बूस्टिंग

द इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (ISRO) चंद्रमा की धरती पर सफलतापूर्वक सॉफ्ट लैंडिंग करने से महज कुछ ही कदमों की दूरी पर है। 23 अगस्त की शाम को इसरो का चंद्रयान 3 चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव की धरती को छुकर एक नया कीर्तिमान स्थापित कर सकता है। अगर ऐसा होता है दुनिया में इस कारनामे को करने वाला भारत चौथा देश बन जाएगा।

chandrayaan-3

इससे पहले अमेरिका, रुस और चीन के चंद्रयान ही चांद पर सफलतापूर्वक लैंड कर पाए हैं। 14 जुलाई को इसरो के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से चंद्रयान 3 को लॉन्च किया गया था। 17 अगस्त को चांद की कक्षा में प्रवेश की प्रक्रिया पूरी होने के बाद चंद्रयान से लैंडर व रोवर को सफलतापूर्वक अलग कर दिया गया। यह इस मिशन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव था। अब 18 अगस्त की शाम से चंद्रयान 3 को धीरे-धीरे लैंडिंग के लिए तैयार करने की प्रक्रिया शुरू होने वाली है।

चंद्रमा की कक्षा में हो गये हैं भारत के 3 स्पेसक्राफ्ट

17 अगस्त को जब चंद्रयान 3 से प्रपोल्शन मॉड्यूल व लैंडर मॉड्यूल को सफलतापूर्वक अलग किया गया, उसके बाद चंद्रमा की कक्षा में भारत के तीन स्पेस क्राफ्ट हो गये। इनमें से एक चंद्रयान 3 का प्रपोल्शन मॉड्यूल है, दूसरा लैंडर मॉड्यूल 'विक्रम' (जो अब धीरे-धीरे चंद्रमा की धरती की तरफ बढ़ता जा रहा है) और तीसरा स्पेस क्राफ्ट चंद्रयान 2 का ऑर्बिटर है। जी हैं, चंद्रयान 2 का ऑर्बिटर अभी तक चंद्रमा की कक्षा में चारों तरफ चक्कर काट रहा है।

आज लगाया जाएगा लैंडर 'विक्रम' पर ब्रेक

lander vikram

चंद्रयान 3 के लैंडर मॉड्यूल 'विक्रम' को आज यानी 18 अगस्त को ब्रेक लगाया जाएगा। ऐसा इसलिए होगा ताकि लैंडिंग के लिए उसे तैयार किया जा सकें और उसकी रफ्तार को कम किया जा सकें। 18 अगस्त की शाम तक लैंडर 'विक्रम' चांद के 30km x 100 km ऑर्बिट में पहुंच जाएगा। यहां पहुंचने के बाद चांद का सबसे करीबी प्वाएंट Perilune 30 km दूर और सबसे बाहरी प्वाएंट Apolune 100 km दूर रह जाएगा।

लैंडर को जैसे ही 30km x 100 km का ऑर्बिट मिल जाएगा, उसकी रफ्तार को कम करना शुरू किया जाएगा। इसके लिए ही 18 अगस्त की शाम को करीब 4 बजे, 1 मिनट के लिए इसे डी-बूस्टिंग की जाएगी यानी इसपर ब्रेक लगाया जाएगा। अगली डी-बूस्टिंग 20 अगस्त की आधी रात के बाद होगी।

कौन सी होगी सबसे मुश्किल घड़ी

Moon

लैंडर 'विक्रम' को डी-बूस्टिंग करने के बाद यह 30 किमी की ऊंचाई से धीरे-धीरे चांद की धरती की तरफ बढ़ेगा। इसके बाद होगा सबसे मुश्किल काम जिसपर चंद्रयान 3 की सॉफ्ट लैंडिंग निर्भर करती है। दरअसल, इस समय चंद्रयान 3 चंद्रमा की कक्षा में हॉरिजॉन्टल स्थिति में चक्कर लगा रहा है। लेकिन लैंडिंग के समय इसे 90° के एंगल पर घुमाकर वर्टिकल किया जाएगा। यहीं वह मुश्किल घड़ी होगी जिसपर चंद्रयान 3 की सॉफ्ट लैंडिंग काफी ज्यादा निर्भर करती है। हालांकि ISRO के चीफ एस. सोमनाथ का कहना है कि चंद्रयान 3 को इस तरह से तैयार किया गया है कि अगर इसके सारे सेंसर्स और इंजन फेल भी हो जाते हैं, तब भी यह चंद्रमा की धरती पर लैंड कर जाएगा।

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