भारत के मून मिशन चंद्रयान 3 पर सिर्फ भारतीयों की ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। 23 अगस्त 2023 की शाम को 6 बजकर 04 मिनट पर चंद्रमा की धरती पर भारतीय स्पेस एजेंसी इसरो द्वारा भेजा गया चंद्रयान 3 लैंड करने की कोशिश करेगा। अब तक चंद्रयान 3 ने चंद्रमा की सभी कक्षाओं को कुशलतापूर्वक पार कर लिया है।

लैंडर विक्रम अभी चंद्रमा की धरती से 25 किमी दूर सूर्योदय का इंतजार कर रहा है। पिछले 17 अगस्त को लैंडर विक्रम को इसके प्रोपल्शन मॉड्यूल से अलग किया गया था। चंद्रमा की कक्षा में चारों तरफ घूम रहे चंद्रयान 3 के प्रोपल्शन मॉड्यूल की लाइफ पहले 4 से 6 महीने की बतायी जा रही है लेकिन अब चंद्रयान 3 से खुशखबरी आयी है। अगर सब कुछ ठीक रहा तो प्रोपल्शन मॉड्यूल अब कई सालों तक काम करता रहेगा। लेकिन यह चमत्कार हुआ कैसे...?
क्या काम होता है प्रोपल्शन मॉड्यूल का
प्रोपल्शन मॉड्यूल एक प्रकार से चंद्रयान 3 का सारथी या फिर रथ था। जिस पर सवार होकर लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान चांद तक पहुंचे हैं। जब 17 अगस्त को चंद्रमा की कक्षा में चंद्रयान 3 के प्रवेश करने की प्रक्रिया के पूरी हो गयी उसके बाद ISRO ने चंद्रयान 3 को दो हिस्सों में बांट दिया। प्रोपल्शन मॉड्यूल चंद्रमा की सबसे नजदीकी कक्षा में ही चक्कर लगाने लगी और चंद्रयान 3 का लैंडर विक्रम, रोवर प्रज्ञान को लेकर चंद्रमा की धरती तरफ बढ़ गया।

लैंडिंग के बाद रोवर प्रज्ञान अगले 14 दिनों तक चंद्रमा की धरती की जांच करेगा और उससे मिलने वाली जानकारी लैंडर विक्रम को देगा। विक्रम उस जानकारी को प्रोपल्शन मॉड्यूल को भेजेगा। इस प्रकार इसरो को चांद के संबंध में जानकारी मिलेगी। रोवर व लैंडर का काम खत्म हो जाने के बाद भी चंद्रयान 3 का प्रोपल्शन मॉड्यूल चांद के चारों तरफ चक्कर काटता रहेगा और चंद्रमा के मौसम व अन्य जानकारियां जुटाता रहेगा।
कैसे बढ़ी प्रोपल्शन मॉड्यूल की लाइफ
जब चंद्रयान 3 को लॉन्च किया गया था, उस समय कहा गया था कि इसके प्रोपल्शन मॉड्यूल का जीवन 4-5 महीनों का होगा। लेकिन अब इसरो के वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर सब कुछ ठीक रहा तो प्रोपल्शन मॉड्यूल कुछ महीने नहीं बल्कि सालों तक काम कर सकता है। पर अचानक यह चमत्कार कैसे हुआ? दरअसल, जब चंद्रयान 3 को लॉन्च किया गया था, उस समय प्रोपल्शन मॉड्यूल 1696.4 किलोग्राम फ्यूल लेकर धरती से रवाना हुआ था।

चंद्रयान 3 के लॉन्चर और रोवर से अलग होने के बाद इसमें लगभग 150 किलोग्राम फ्यूल अभी भी बचा हुआ है। बताया जाता है कि इस फ्यूल के सहारे प्रोपल्शन मॉड्यूल 4-6 महीने नहीं बल्कि कई सालों तक काम कर सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस बात की पुष्टि ISRO चीफ डॉ. एस. सोमनाथ ने भी की है। उन्होंने कहा है कि हमारे पास उम्मीद से ज्यादा फ्यूल बचा है। अगर कोई ज्यादा दिक्कत नहीं आयी तो प्रोपल्शन मॉड्यूल कई सालों तक काम कर सकता है। हालांकि यह चांद के चारों तरफ के ऑर्बिट करेक्शन पर निर्भर करता है।
कब कितना खर्च हुआ फ्यूल
लॉन्च के समय कुल 1696.4 किलोग्राम फ्यूल लेकर चंद्रयान 3 रवाना हुआ था। पृथ्वी के चारों तरफ 5 बार ऑर्बिट बदलने समेत जितनी बार प्रोपल्शन मॉड्यूल का थ्रस्टर ऑन किया गया, उसमें 1546 किलोग्राम फ्यूल खत्म हुआ। इसमें से 793 किलोग्राम फ्यूल पृथ्वी के चारों तरफ ऑर्बिट बदलते समय थ्रस्टर ऑन होने की वजह से खत्म हुआ।
753 किलोग्राम फ्यूल चांद के चारों तरफ 5 बार ऑर्बिट को बदलने में थ्रस्टर यानी इंजन को ऑन करने की वजह से खत्म हुआ। अब चंद्रयान 3 के प्रोपल्शन मॉड्यूल के पास 150 किलोग्राम फ्यूल बचा हुआ है, जिससे यह कई सालों तक काम कर सकता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि प्रोपल्शन मॉड्यूल अगले 4-5 सालों तक काम कर सकता है।
चंद्रयान 3 ने भेजी लैंडिंग वाली जगह की तस्वीरें

चंद्रयान 3 ने लैंडिंग से ठीक 2 दिन पहले चांद के दक्षिणी ध्रुव के उन जगहों की फोटो भेजी है, जहां चंद्रयान 3 लैंड करने की कोशिश करने वाला है। इसरो ने इन तस्वीरों को शेयर करते हुए लिया है, 'ये चांद के सुदूर क्षेत्र की तस्वीरें हैं, जिसे लैंडर के खतरा जांच और बचाव कैमरे ने खींचा है। यह कैमरा लैंडर के नीचे उतरते समय सुरक्षित लैंडिंग क्षेत्र का पता लगाने में सहायता करता है, जहां कोई बोल्डर या गहरा गड्ढ़ा ना हो।'
बता दें, चंद्रयान 3 अपनी लैंडिंग के लिए पूरी तरह से तैयार है। वह चांद की सतह से करीब 25 किमी ऊपर सूर्योदय का इंतजार कर रहा है। चांद पर सूर्योदय होते ही 23 अगस्त की शाम 6 बजकर 04 मिनट पर चंद्रयान लैंडिंग की कोशिशें करेगा। रविवार की सुबह इस मिशन का दूसरा व अंतिम डी-बूस्टिंग सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया, जिससे चंद्रयान 3 की रफ्तार को कम किया गया है। अगर भारत चांद की धरती छुने में सफलता प्राप्त करता है तो यह अमेरिका, चीन और रूस के बाद दुनिया का चौथा देश और दक्षिणी ध्रुव पर उतरने वाला पहला देश बन जाएगा।



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