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अद्भुत : इस अनोखी अदालत में देवी-देवताओं को मिलती है सज़ा

भारत का अनोखा कोर्ट जहां भगवान को मिलती है सजा। Court in India where the gods and goddesses are punished.

दंड देने का प्रावधान पौराणिक काल से चला आ रहा है। उस दौरान बिना अदालत के सजा देने का काम भगवान और महर्षियों द्वारा किया जाता था। पापियों को सजा उनके कर्मों के अनुरूप मिला करती थी। चूंकि अब हम एक आधुनिक युग में हैं इसलिए इंसानी सजा-दंड देने के लिए अदालतों का गठन किया गया है। और सजा उसी इंसान को मिलती है जो कानून के विरूद्ध जाकर गलत काम करता है।

लेकिन आप यह जानकर हैरान रह जाएंगे कि भारत में एक ऐसी भी अदालत लगती है जहां सजा इंसानों को नहीं बल्कि देवी-देवताओं को दी जाती है। खुद इंसान भगवानों को सजा दिलवाने के लिए फरियाद करता है। हमारे साथ जानिए भारत की एक ऐसी अजीबोगरीब जगह के बारे में जहां लगती है देवी-देवताओं को सजा देने वाली अदालत।

निष्कासन से लेकर मृत्युदंड

निष्कासन से लेकर मृत्युदंड

देवी-देवताओं को सजा सुनाने काम छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में किया जाता है। यहां के केशकाल नगर में स्थित भंगाराम देवी के मंदिर में प्रतिवर्ष जात्रा का आयोजन किया जाता है। देवी भंगाराम यहां के 55 गांवों में मौजूद सैकड़ों देवी-देवताओं की आराध्या हैं।रहस्य पड़ताल : पाताल से जुड़ा कुआं बना वैज्ञानिकों के लिए बड़ी चुनौती

इस खास आयोजन में सभी गांव वाले इकट्ठा होते हैं और अपने संग भगवान की मूर्तियों को भी लेकर आते हैं। जात्रा के दौरान देवी-देवताओं की पेशी होती हैं। गांव वाले अपनी शिकायत भंगाराम देवी से करते हैं। जिसके बाद शुरू होता है भगवान को सजा सुनाने का सिलसिला।

देवी सुनाती है अपना फैसला

देवी सुनाती है अपना फैसला

गांव वालों की फरियाद सुनने के बाद अब समय आता है सजा सुनाने का। सुबह से लेकर देर शाम तक चलने वाले इस बड़े आयोजन के बाद देवी अपना फैसला सुनाती है। मान्यता के अनुसार मंदिर के पंडित के अंदर भंगाराम देवी प्रवेश करती हैं, जिसके बाद देवी अपना सजा सुनाती हैं। अपराध के अनुसार सजा 6 महीने के मंदिर निष्कासन से लेकर मृत्यु दंड तक दिया जाता है।
मृत्यु दंड में मूर्तियां खंडित कर दी जाती हैं। और निष्कासन में मूर्तियों को मंदिर से निकाल बाहर बनी खुली जेल में रख दिया जाताा है। इस दौरान मूर्ति के जेवरों को मंदिर में ही रख दिया जाता है। गांव वाले अपने संग जो भी वस्तु लाते हैं उन्हें यहीं छोड़कर जाना पड़ता है।

इस तरह होती है मंदिर में वापसी

इस तरह होती है मंदिर में वापसी

सजा की अवधि पूरी हो जाने के बाद मूर्ति को वापस मंदिर में स्थापित किया जाता है। अनिश्चितकालीन सजा के लिए देवी-देवताओं को अपनी गलती सुधारने का मौका दिया जाता है। वे तब ही मंदिर में प्रवेश करते हैं जब वे लोककल्याण का वचन देते हैं।

देवी-देवता ये वचन मंदिर के पुजारी को स्वन्न में आकर देते हैं। मंदिर वापसी से पहले संबंधित भगवान की पूजा की जाती है और पूरे सम्मान के साथ मूर्ति को मंदिर में स्थापित किया जाता है। इस दौरान देवी का मंदिर हजारों लोगों से भरा रहता है।

शिकायतों का बड़ा कारण

शिकायतों का बड़ा कारण

यह सवाल किसे के भी मस्तिष्क में आ सकता है कि आखिर भगवान की शिकायत देवी से क्यों की जाता है? बता दें कि लोग अधिकतर शिकायतें मन्नतें पूरी न होने के कारण करते हैं। इसके अलावा शारीरिक रोग, फसल खराब या किसी अन्य परेशानी का भी दोषी भगवान को ही बनाया जाता है।

सबसे बड़ी बात इस जात्रा में महिलाओं के आने पर प्रतिबंध है। यहां तक की वे इस दौरान जात्रा का प्रसाद भी ग्रहण नहीं कर सकती हैं। लोगों का मानना है कि महिलाएं की उपस्थिति माहौल बिगाड़ सकती है।

देवी से जुड़ी किवदंती

देवी से जुड़ी किवदंती

भंगाराम देवी से एक पुरानी किवदंती जुड़ी हुई है। कहा जाता है देवी ने बस्तर के राजा को स्पन्न में दर्शन दिए थे। देवी ने उन्हें कहा कि वे राज्य में प्रवेश करना चाहती हैं। जिसके बाद देवी के स्वागत के लिए राजा अपनी प्रजा के साथ पहुंचे।

लेकिन इसी दौरान तेज तुफान आ गया। देवी घोड़े पर सवाल पहले पुरुष रूप में आईं जिसके बाद वे स्त्री रूप में परिवर्तित हईं। केशकाल की घाटी में बना देवी का मंदिर देवी के प्रगट होने का स्थान है।

कैसे करें प्रवेश

कैसे करें प्रवेश

अगर आप इन अनोखी आदिवासी परंपरा और यहां होने वाले भव्य आयोजन का हिस्सा बनना चाहते हैं तो छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले आ सकते हैं। आप यहां तीनों मार्गों से पहुंच सकते हैं। हवाई मार्ग के लिए आप रायपुर और विशाखापट्टनम एयरपोर्ट का सहार ले सकते हैं। रेल मार्ग के लिए आप रायपुर रेलवे स्टेशन का सहारा ले सकते हैं।

इसके अलावा आप यहां सड़क मार्ग के द्वारा भी पहुंच सकते हैं। बस्तर सड़क मार्ग के लिए आपको वाया जगदलपुर आना पड़ेगा। बेहतर सड़क मार्गों के द्वारा जगदलपुर राज्य के बड़े शहरों से जुड़ा हुआ है।

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