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जाने सेवेन सिस्टर के खूबसूरत राज्य त्रिपुरा एक ट्रैवलर की नजर से

By: Goldi

त्रिपुरा के पूर्वोत्तर राज्‍य में बड़ी संख्‍या में ऐतिहासिक स्‍थल देखने को मिलते हैं। सेवन सिस्‍टर्स के बीच ये जगहें विशेष महत्‍व रखती हैं और इन्‍हें देश में पुरातात्विक और विरासत पर्यटन के लिए भी जाना जाता है। यहां खुली हवा में ऊर्ध्‍वाधर दीवारें हैं जिन्‍हें अब पर्यटन आकर्षण के रूप में तब्‍दील कर दिया गया है।

उड़ती हुई रंग-बिरंगी तितलियों को देखना है तो जरुर जायें यहां

भारत का तीसरा सबसे छोटा शहर है त्रिपुरा और यहां पर ऐतिहासिक महत्‍व रखने वाली अनेक धरोहरें हैं जो बड़ी संख्‍या में पर्यटकों को इस छोटे से शहर में आने के लिए आकर्षित करती हैं। ये जगह पुरातात्‍विक स्‍थान बन सकता है। आइए एक नज़र डालते हैं इस राज्‍य की खूबसूरत जगहों पर ...

उनाकोटि

उनाकोटि

उनाकोटि एक ऐतिहासक तीर्थस्‍थल है एवं यह स्‍थान भगवान शिव को समर्पित है। सातवीं से नौंवी शताब्‍दी या उससे पहले इस मंदिर की स्‍थापना की गई थी। इस मंदिर के पत्‍थरों पर सुंदर नक्‍काशी और भित्ति चित्र तीर्थयात्रियों को आकर्षित करते हैं। यहां पर झरने भी बहते हैं और आसपास का पर्वतीय नज़ारा प्रकृति की खूबसूरत देन है।

इस स्‍थान पर स्‍थापित मूर्ति को पत्‍थर को काटकर बनाया गया है साथ ही ये पत्‍थर की मूर्ति है। पत्‍थर को काटकर की गई नक्‍काशी में भगवान शिव का मस्‍तक और गणेश जी की आकृति बनी हुई है। यहां पर भगवान शिव को उनाजोतिश्‍वरा काल भैरव के नाम से जाना जाता है। भगवान शिव की इस संरचना क लंबाई 30 फीट है।PC: Shubham2712

उदयपुर

उदयपुर

अगरतला से 55 किमी की दूरी पर स्थित उदयपुर त्रिपुरा सुंदरी मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। मां दुर्गा के 52 शक्‍तिपीठों में से एक त्रिपुरा सुंदरी मंदिर भी है। मान्‍यता है कि इस स्‍थान पर देवी सती का दाहिना पैर गिरा था।

इस मंदिर का निर्माण महाराजा धन्‍य माणिक्‍य द्वारा सन् 1502 में करवाया गया था। मंदिर परिसर में दो देवताओं की मूर्ति स्‍थापित है और यही इस स्‍थान का मुख्‍य आकर्षण भी है। इसमें से एक मूर्ति की ऊंचाई 5 फीट है जिसका नाम त्रिपुरा सुंदरी है और दूसरी मूर्ति की ऊंचाई 2 फीट है जिसका नाम छोटिमा है।PC: Soman

नीर महल

नीर महल

नीर महल का मतलब होता है पानी का महल। नीर महल पहले राजा बीर बिक्रम किशोर माणिक्‍य बहादुर का शाही महल हुआ करता था। यह त्रिपुरा के राजा था। इस महल को 1938 में रुद्रसागर झील के मध्‍य बनवाया गया था एवं इस तरह का यह एकमात्र सबसे बड़ा स्‍थान है। इसकी तरह दूसरा स्‍थान राजस्‍थान में जल महल है।

इस महल को दो भागों में विभाजित किया गया है। इसके पश्चिमी हिस्‍से को अंदर महल कहा जाता है और पूर्वी हिस्‍से को एक खुले थियेटर के रूप में रखा गया है जहां राजा और उनके परिवार के लिए सांस्‍कृतिक कार्यक्रम, नृत्‍य प्रस्‍तुति और नाटक का आयोजन किया जाता था।
PC: Soman

बोक्‍सा नगर

बोक्‍सा नगर

बांग्‍लादेश से विभाजन के समय सीमा निर्माण के दौरान वन क्षेत्र के निरूपण कार्य में बोक्‍सा नगर का पता चला था। स्‍थानीय लोगों का कहना है कि इस स्‍थान पर सर्पों के देवता मनस्‍सा का प्राचीन मंदिर स्‍थापित है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण का ध्‍यान भी इस संरचना की ओर आकर्षित हुआ है।

साल 1997 में यहां पर खुदाई में बौद्ध की मूर्ति मिली थी जिसके बाद पुरातत्‍वविदों ने इसे मनस्‍सा मंदिर की जगह बौद्ध मंदिर घोषित कर दिया था।

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