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श्रीकृष्ण के इस मंदिर में बदले जाते हैं दिन में पांच बार ध्वज, वजह है काफी रोचक

श्रीकृष्ण के भक्तों के लिए गुरुवार यानी 18 अगस्त को सबसे खास दिन आने वाला है। नहीं समझें, अरे भाई गुरुवार को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी है। इस दिन आपको हर ओर बस एक ही नारा सुनने को मिलेगा "हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की"। देश के कोने-कोने से भक्त इस दिन भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन के लिए आते हैं और उनके मंदिर में होने वाले धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लेते हैं। ऐसे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं श्रीकृष्ण के एक ऐसे मंदिर के बारे में, जहां की घटनाएं, पूजा-क्रम काफी रोचक हैं।

भारत में एक ऐसा श्रीकृष्ण का मंदिर है, जहां दिन में पांच बार ध्वज बदला जाता है। इस ध्वज की खास बात ये है कि यहां ध्वज चढ़ाने के लिए एडवांस बुकिंग की जाती है। बांके बिहारी की दिन में पांच पहर आरती की जाती है, इसी समय ये ध्वज भी बदला जाता है, जो सिर्फ द्वारका के अबोटी ब्राह्मण ही चढ़ाते हैं। जिसे भी ध्वज चढ़ाने के लिए मौका है, वह पहले भगवान के चरणों में समर्पित करता है, फिर मंदिर के ऊपरी शिखर पर चढ़ा देता है।

खास दर्जी करता है ध्वज की सिलाई

खास दर्जी करता है ध्वज की सिलाई

मंदिर के शिखर पर चढ़ाए जाने वाले ध्वज की सिलाई एक खास दर्जी करता है, जिसमें सूर्य-चंद्रमा का चित्र अंकित होता है। इस ध्वज का परिमाण 52 गज का होता है। इसके पीछे भी मुख्य किवदंतियां है, जो मंदिर के पुजारी और लोकल लोगों के द्वारा बताया जाता है। ध्वज को लेकर पहली किवदंती ये है कि 12 राशि, 27 नक्षत्र, 10 दिशाएं, सूर्य, चंद्र और श्री द्वारकाधीश मिलकर 52 होते हैं, इसीलिए पालनहार कन्हैया को 52 गज का ध्वज अर्पित किया जाता है। दूसरी किवदंती ये है कि श्रीकृष्ण के समय द्वारिका में 52 द्वार हुआ करते थे। इसलिए भगवान को 52 गज का ध्वज चढ़ाया जाता है।

द्वारिकाधीश मंदिर का इतिहास

द्वारिकाधीश मंदिर का इतिहास

गुजरात तट के किनारे बसा द्वारका धाम 'जगत मंदिर या निज मंदिर' के नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर का निर्माण 15-16वीं शाताब्दी में किया गया था। मंदिर को लेकर कहा जाता है कि ये मंदिर करीब 5000 साल पुराना है, लेकिन पुरातात्विक सर्वेक्षण की मानें तो यह मंदिर करीब 2500 साल पुराना बताया जाता है। यह मंदिर 5 मंजिला है, जिसमें 72 स्तंभ है। मंदिर को लेकर कहा जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण के पर-पोते वज्रनाथ ने कराया था और ये कहा जाता है कि जब कन्हैया ने द्वारका में अपनी नगरी बसाई थी, तब मंदिर के गर्भ गृह में ही भगवान श्रीकृष्ण का शयन कक्ष हुआ करता था। यह मंदिर चार धामों (अन्य तीन धाम- रामेश्वरम , बद्रीनाथ और पुरी) में से एक है।

मंदिर में आरती का समय

मंदिर में आरती का समय

मंगला आरती - सुबह 7.30 बजे
श्रृंगार आरती - सुबह 10.30 बजे
मंदिर आरती - सुबह 11.30 बजे
संध्या आरती - शाम 7.45 बजे
शयन आरती - शाम 8.30 बजे

कैसे पहुंचे द्वारिकाधीश मंदिर

कैसे पहुंचे द्वारिकाधीश मंदिर

द्वारिकाधीश मंदिर पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी हवाई अड्डा पोरबंदर में स्थित है, जो मंदिर से करीब 108 किमी. की दूरी पर स्थित है। वहीं, मंदिर का नजदीकी रेलवे स्टेशन द्वारका में ही है, लेकिन एक छोटा स्टेशन होने के कारण कई बार आपको यहां के लिए डायरेक्ट ट्रेन नहीं मिलती, जिसके चलते आप राजकोट जंक्शन (225 किमी.) या अहमदाबाद जंक्शन (440 किमी.) से मंदिर परिसर तक पहुंच सकते हैं।

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