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ताजे ताजे चीकू का स्वाद लेना है पहुंच जाओ बोर्डी

Posted By: Staff

बेंगलुरुवासियों की तरह मुंबई वाले भी बेहद लकी है , क्यों कि मुंबई के आसपास कई ऐसी खूबसूरत स्थान है जहां वीकेंड के दौरान मुंबईकर्स परिवार के साथ छुट्टियां मनाने जा सकते हैं। वैसे भी मुंबई की भागती दौड़ती जिंदगी कभी कभी बेहद थका देती है। ऐसे में मुंबई वासियों को जरुरत होती है एक शांत और सुकून देने वाली जगह की।

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यूं तो मुंबई के पास लोनावला,पनवेल,महाबलेश्वर आदि कई जगह है, लेकिन उसके बावजूद आप कोई नई जगह घूमना चाहते हैं, तो आपके लिए बोर्डी एकदम बेस्ट प्लेस है। यहां आप समुद्री तट का किनारा भी देख सकते हैं, साथ ही साहसिक खेलो का फायदा भी ले सकते हैं। बोर्डी मुंबई से उत्तर की ओर 155 किमी दूर स्थित छोटा सा तटीय शहर है।बोर्डी में आप ताजे चीकू का स्वाद भी ले सकते हैं। बोर्डी के शांत तटों की मिट्टी काली है।

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बोर्डी में मुख्‍य रूप से पारसी समुदाय के लोग रहते हैं। पारसी समुदाय के लोगों का व्‍यवहार काफी मैत्रीपूर्ण होता है। इनमें से कई लोगों के बोरडी में बंगले भी है जोकि पर्यटकों को किराए पर दिए जाते हैं। यहां आप पारसी खाने का स्‍वाद ले सकते हैं।

बोर्डी आने का सही समय

बोर्डी आने का सही समय

बोर्डी आने का सही समय अक्‍टूबर से फरवरी के बीच है। इस दौरान यहां का मौसम 12 डिग्री सेल्‍सियस से भी नीचे गिर जाता है।
PC:Rajarshi MITRA

मुंबई से बोर्डी का रूट

मुंबई से बोर्डी का रूट

रूट 1 : छेद्दा नगर - ईस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे - एनएच 48 - दहानु-जेवहर रोड - दहानु रोड - बोर्डी (158 किमी - 3 घंटे)

रूट 2 : छेद्दा नगर - पूर्वी एक्सप्रेस राजमार्ग - एनएच 160 - वासिंद - दहागाँव रोड़ - शिरीष पाडा में एनएच 848 - वाडा-मनोर रोड - एनएच 48 - दहानु-जेवहर रोड - घोलवाद - दहानु रोड -बोर्डी (189 किमी - 4 घंटे)

बोर्डी के रास्‍ते में इन जगहों को देख सकते हैं :

ठाणे

ठाणे

सुबह जल्‍दी निकलें। मुंबई से 25 किमी दूर है ठाणे । ठाणे में मालेदार मिसल पर लोकप्रिय मसालेदार मिसल पाव खा सकते हैं। महराष्‍ट्र की इस डिश को खाए बिना आप आगे नहीं बढ़ सकते। इस शहर को इसकी खूबसूरत झीलों के लिए जाना जाता है। इस शहर में लगभग 33 झीलें हैं।PC:Martin Lewison

वसई

वसई

ठाणे से 36 किमी दूर स्थित वसई में घूमने के लिए कई दिलचस्‍प जगहे हैं, जैसे चिन‍चोटि झरना, गणेशपुरी मंदिर, सुरुच बाग और वसई किला है। वसई किले को बसिन फोर्ट भी कहा जाता है। ये पुर्तगाली दौर में बनवाया गया था। हालांकि अब नष्‍ट हो चुके इस किले पर कई बॉलीवुड फिल्‍मों की शूटिंग हो चुकी है। पर्यटकों के बीच भी ये काफी मशहूर है।PC:Sameer Prabhu

मनोर

मनोर

मनोर को पालघर का गेटवे माना जाता है क्‍योंकि महाराष्‍ट्र के पालघर जिले में मनोर सबसे पहला शहर पड़ता है। यहां पर कई समुद्रतट हैं जहां आप वीकेंड पर आराम से छुट्टियां मना सकते हैं।PC: Dinesh Valke

दहानु

दहानु

दहानु शब्‍द धेनु ग्राम से लिया गया है जिसका मतलब होता है गायों का गांव। इस गांव में अधिकतर लोग गायों को चराने का काम करते हैं।

दहानु, चीकू फल के लिए भी लोकप्रिय है। इस शहर में पूरे राज्‍य के चीकू का उत्‍पादन 35 प्रतिशत होता है। इसके अलावा यहां पर नारियल और गुलाब के बगीचे भी हैं।PC:Raman Patel

बोर्डी तट

बोर्डी तट

बोर्डी तट काफी सुंदर और शांत हैं। वीकेंड पर घूमने के लिए ये जगह बिलकुल उत्तम है। यहां पर पानी का स्‍तर कभी भी बहुत ज्‍यादा या सीमा को पार नहीं करता है। तट से पानी आधा किलोमीटर दूर रहता है।

इस वजह से परिवार और दोस्‍तों के साथ पिकनिक मनाने या रोमांटिक समय बिताने के लिए ये जगह बिल्कुल बेस्ट है और यहां बच्‍चों को भी खेलने में कोई खतरा नहीं है। इस तट के पास आप भारत के सबसे बेहतर चीकू के बागान भी देख सकते हैं।PC:Ajay Panachickal

कल्‍पतरु बॉटनिकल गार्डन

कल्‍पतरु बॉटनिकल गार्डन

उंबेरगांव में स्थित बोटानिकल गार्डन को मरीन गांव कहा जाता है। इस गांव में स्थित बोटानिकल गार्डन में हरियाली के साथ कई खूबसूरत पेड़ भी हैं।ये गार्डन मॉनसून के दौरान बहुत खूबसूरत लगता है। टीवी के प्रसिद्ध शो रामायण के लिए वृंदावन स्टूडियो यहां लगाया गया था।
PC: Dinesh Valke

बहरोत गुफाएं

बहरोत गुफाएं

भारत में पारसी और जोरोएस्ट्रियन मंदिर सिर्फ बहरोत की गुफाओं में स्थित है। पारसी लोगों के लिए ये जगह ऐतिहासिक महत्‍व रखती है। भारत के अंतिम पारसी वंश से मिट्टी के बर्तन, कांच के बने पदार्थ और सिक्के यहां पाए गए थे।

माना जाता है कि 1351 ईस्‍वीं में 13 सालों तक जोरोएस्‍ट्रियन के पूर्वजों ने मुस्लिम आक्रमणकारियों से बचने के लिए बहरोत की गुफाओं में शरण ली थी। बहरोत के पर्वत पर ये गुफाएं हैं जोकि पश्‍चिमी घाट के छोर पर 1500 फीट की ऊंचाई पर हैं। सदियों से इस मंदिर में एक पवित्र ज्‍योति जल रही है।PC:Thejasvi M

असावली बांध

असावली बांध

असावली बांध 78 फीट की ऊंचाई पर हरी झील पर स्थित है। इसके सामने पश्चिमी घाट के शानदार पहाड़ देख सकते हैं साथ ही इसके पास हरियाली से भरा गांव भी है। असावली बांध में हर ओर प्रकृति की छटा बिखरी हुई है। यहां से हर जगह हरियाली दिखाई देती है। पिकनिक मनाने के लिए ये जगह बेहतर है।PC: Vinod Sankar

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